मध्य प्रदेश के जबलपुर को मार्बल नगरी के नाम से जाना जाता है. लेकिन, अब प्रदेश के कटनी जिले को भी ऐसी ही कुछ पहचान मिल सकती है. क्योंकि जिले के मार्बल को जीआई टैग (जियोग्राफिकल इंडिकेशन) के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की तैयारी की जा रही है. अगर, यह संभव हुआ तो कटनी का मार्बल उन चुनिंदा उत्पादों की श्रेणी में शामिल हो जाएगा, जिनकी पहचान उनके भौगोलिक क्षेत्र से होती है. कटनी के मार्बल को जीआई टैग मिलने से उसकी ब्रांडिंग और मार्केटिंग की दिशा में बड़ा फायदा होगा. जिससे जिले में दशकों से सुस्त पड़े मार्बल कारोबार को नई उड़ान मिलने की संभावना बढ़ जाएगी.
कलेक्टर से मांग के बाद एक्शन
दरअसल, कटनी में आयोजित 'उद्यमी संवाद' के दौरान मार्बल कारोबारियों ने जिला कलेक्टर आशीष तिवारी से कटनी मार्बल को जीआई टैग दिलाने की मांग रखी थी. व्यापारियों का कहना था कि मार्बल की बेहतर क्वालिटी होने के बाद भी ब्रांडिंग और मार्केटिंग की कमी के कारण यह उद्योग लगातार पिछड़ रहा है.
मार्बल एसोसिएशन करेगा आवेदन
कारोबारियों की मांग के बाद कलेक्टर ने जिला उद्योग केंद्र की महाप्रबंधक ज्योति सिंह को सभी कारोबारियों को जोड़कर एक पंजीकृत मार्बल एसोसिएशन गठित करने के निर्देश दिए थे. अब यह एसोसिएशन जीआई टैग के लिए औपचारिक आवेदन करेगा. कलेक्टर आशीष तिवारी का कहना है कि प्रशासन जीआई टैग को लेकर पूरा सहयोग करेगा.
क्या है कटनी मार्बल की खासियत?
जानकारों के अनुसार, कटनी मार्बल में कई खासियत हैं जो इसे खास बनाती हैं. यह अपनी अनोखी रंगत के लिए जाना जाता है. इसमें बेज, पीला, भूरा हरा और गुलाबी जैसे कई आकर्षक शेड्स मिलते हैं. यह देखने में महंगे इटैलियन मार्बल जैसा लगता है, लेकिन यह काफी सस्ता और टिकाऊ होता है. यहां के मार्बल को काफी मजबूत माना जाता है, साथ ही इसमें फिनिशिंग और पॉलिशिंग भी शानदार आती है.
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