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शिशुओं के विकास के भ्रामक दावों पर सरकार सख्त, इस स्टार्टअप पर की कड़ी कार्रवाई

प्राधिकरण ने अपने आदेश में कहा कि कंपनी ने सफलता की झूठी गारंटी दी. कंपनी ने '90% सफलता दर' जैसे आंकड़े पेश किए, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया कि ये आंकड़े किस आधार पर निकाले गए. साथ ही अभिभावकों पर मनोवैज्ञानिक दबाव डालने के लिए विज्ञापनों में इस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया गया जिससे माता-पिता के मन में यह डर पैदा हो कि यदि वे इस प्रोग्राम को नहीं चुनते, तो उनका बच्चा पिछड़ जाएगा.

शिशुओं के विकास के भ्रामक दावों पर सरकार सख्त, इस स्टार्टअप पर की कड़ी कार्रवाई
प्रतीकात्मक तस्वीर.
  • केंद्र सरकार ने राइजिंग सुपरस्टार्स के खिलाफ शिशुओं के विकास से जुड़े झूठे दावे करने पर कड़ी कार्रवाई की है.
  • CCPA ने पाया कि कंपनी के विज्ञापनों में दावे वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं थे और ठोस डेटा का अभाव था.
  • कंपनी ने 90 प्रतिशत सफलता दर जैसे आंकड़े पेश किए, लेकिन इनके आधार और सत्यापन का खुलासा नहीं किया.
नई दिल्ली:

केंद्र सरकार ने नवजात शिशुओं के विकास के बारे में बढ़-चढ़ कर दावे करने वाले राइजिंग सुपरस्टार्स के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है. यह फैसला शिक्षा और अर्ली-लर्निंग सेक्टर में भ्रामक विज्ञापनों के खिलाफ अपनी मुहिम को तेज करते हुए केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण CCPA ने किया. 25 फरवरी, 2026 को जारी किए गए इस अंतिम आदेश में संस्थान पर अनुचित व्यापार प्रथाओं और बच्चों के विकास से जुड़े झूठे दावे करने के लिए भारी जुर्माना लगाया गया है.

मालूम हो कि राइजिंग सुपरस्टार्स एक तेजी से विकसित हो रहा तकनीकी स्टार्टअप है. जो 0-6 वर्ष की आयु के बच्चों में प्रतिदिन केवल 5 मिनट की स्क्रीन-मुक्त गतिविधियों के माध्यम से सर्वांगीण क्षमताओं के विकास का दावा करती है. 

क्या है पूरा मामला?

सीसीपीए की जांच में यह पाया गया कि 'रेज़िंग सुपरस्टार्स' अपने विज्ञापनों में ऐसे दावे कर रहा था जो वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं थे. 
संस्थान का दावा था कि उनके प्रोग्राम के माध्यम से नवजात शिशुओं और छोटे बच्चों के बौद्धिक स्तर (IQ) और विकास की गति में असाधारण वृद्धि की जा सकती है. इनमें कहा गया था कि शिशु तीन महीने में रेंगने, आठ महीने में चलने और दो साल की उम्र में दौड़ने लगा था. प्राधिकरण ने पाया कि इन दावों के समर्थन में कंपनी के पास कोई ठोस डेटा या स्वतंत्र वैज्ञानिक शोध मौजूद नहीं था.

भ्रामक विज्ञापनों पर प्रहार

प्राधिकरण ने अपने आदेश में कहा कि कंपनी ने सफलता की झूठी गारंटी दी. कंपनी ने '90% सफलता दर' जैसे आंकड़े पेश किए, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया कि ये आंकड़े किस आधार पर निकाले गए. साथ ही अभिभावकों पर मनोवैज्ञानिक दबाव डालने के लिए विज्ञापनों में इस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया गया जिससे माता-पिता के मन में यह डर पैदा हो कि यदि वे इस प्रोग्राम को नहीं चुनते, तो उनका बच्चा पिछड़ जाएगा.

इन दावों में पारदर्शिता का अभाव भी था. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत यह अनिवार्य है कि विज्ञापन में दी गई जानकारी सत्य और सत्यापन योग्य हो, जिसका पालन यहाँ नहीं किया गया.

CCPA की सख्त कार्रवाई

मुख्य आयुक्त निधि खरे के नेतृत्व में CCPA ने हाल के महीनों में कोचिंग और एडु-टेक संस्थानों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है. 'रेज़िंग सुपर स्टार्स' को आदेश दिया गया है कि वे अपने सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और प्रिंट विज्ञापनों से इन भ्रामक दावों को तुरंत हटाएं. आदेश के 15 दिनों के भीतर कंपालयंस रिपोर्ट जमा करने को कहा गया है. 

साथ यह चेतावनी भी दी गई है कि भविष्य में इस तरह के किसी भी अपुष्ट दावों से बचें, अन्यथा उनका लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है.

उद्योग पर प्रभाव

शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदेश उन स्टार्टअप्स के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो "अर्ली ब्रेन डेवलपमेंट" के नाम पर माता-पिता की भावनाओं और चिंताओं का फायदा उठाते हैं. उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि शिक्षा कोई व्यापारिक वस्तु नहीं है और इसमें "सफलता की गारंटी" जैसे शब्दों का प्रयोग पूरी तरह से प्रतिबंधित है.

यह मामला न केवल एक कंपनी पर जुर्माने तक सीमित है, बल्कि यह पूरे शिक्षा जगत को पारदर्शिता की ओर ले जाने वाला एक बड़ा कदम है. CCPA ने एक बार फिर 'जागो ग्राहक जागो' के नारे को चरितार्थ करते हुए अभिभावकों को सतर्क रहने की सलाह दी है.
 

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