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नरेंद्र मोदी की सरकार में सिकुड़ गया नक्सलवाद, आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को मिल रही हैं ये सुविधाएं

सरकार ने मंगलवार को लोक सभा में बताया कि देश में इस समय केवल आठ जिले ही उग्र वामपंथ की समस्या से पीड़ित हैं. इन आठ में से केवल तीन जिले ही इस समस्या से सबसे अधिक प्रभावित हैं.

नरेंद्र मोदी की सरकार में सिकुड़ गया नक्सलवाद, आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को मिल रही हैं ये सुविधाएं
नई दिल्ली:

सरकार ने बताया है कि 2016 में देश के 126 जिले उग्र वामपंथ (नक्सलवाद) से प्रभावित थे. लेकिन उसके प्रयासों की वजह से अब ऐसे जिले की संख्या घटकर आठ रह गई है. इनमें से केवल तीन जिले ही उग्र वामपंथ की समस्या से सबसे अधिक प्रभावित हैं. सरकार के मुताबिक साल 2010 में वामपंथी उग्रवाद से संबंधित 1936 घटनाएं हुई थीं. लेकिन 2025 में केवल 234 घटनाएं दर्ज की गईं. सरकार ने यह जानकारी मंगलवार को एक तारांकित सवाल के जवाब में लोकसभा में दी. सरकार के आंकड़ों के मुताबिक 2025 में 1022 वामपंथी उग्रवादी गिरफ्तार किए गए तो दो हजार 337 ने आत्मसमर्पण किया. सरकार के मुताबिक 2019 के बाद से वामपंथी उग्रवादियों का यह सबसे बड़ा समर्पण है. 

आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को कितना पैसा देती है सरकार

बीजेपी के रमेश अवस्थी और कमलजीत सहरावत ने सरकार से जानना चाहा था कि 31 मार्च 2026 तक भारत को नक्सल मुक्त बनाने की दिशा में क्या प्रगति हुई है. दोनों सदस्यों ने सरकार से नक्सलियों की गिरफ्तारी, आत्मसमर्पण और उनके पुनर्वास को लेकर भी जानकारी मांगी थी. इन सवालों का जवाब गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने दिया. सरकार ने बताया कि वामपंथी उग्रवाद से निपटने के लिए सरकार ने 2015 में 'एलडब्लूई निपटने के लिए राष्ट्रीय नीति एवं कार्य योजना'बनाई थी. सरकार ने सुरक्षा संबंधी व्यय (एसआरई) योजना के तहत उग्र वामपंथ से प्रभावित राज्यों को तीन हजार 681 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता उपलब्ध कराई गई है. इसका इस्तेमाल सुरक्षा बलों, आत्मसमर्पण करने वाले वामपंथी उग्रवादियों के पुनर्वास और वामपंथी उग्रवाद में मारे गए नागरिकों और वीरगति को प्राप्त हुए सुरक्षाकर्मियों के परिवारों को मदद पहुंचाने में किया गया है. 

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गृह राज्य मंत्री ने सदन को जानकारी दी कि एसआरई के एक भाग के रूप में आत्मसमर्पण सह पुनर्वास नीति भी बनाई गई है. इसके तहत केंद्र राज्यों की मदद करती है. इसके तहत आत्मसमर्पण करने वासे उच्च रैंक वाले वामपंथी उग्रवादी कैडरों को पांच लाख रुपये और अन्य उग्र वामपंथी कैडरों को ढाई लाख रुपये का अनुदान तत्काल दिया जाता है. इसके अलावा हथियारों और गोला-बारूद के साथ समर्पण करने पर प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है. इनके अलावा आत्मसमर्पण करने वाले उग्र वामपंथियों को तीन साल तक 10 हजार रुपये महीना का वजीफा भी दिया जाता है. इसके अलावा आत्मसमर्पण करने वाले उग्र वामपंथी को अपने मनपसंद  काम या व्यवसाय का प्रशिक्षण भी दिलवाया जाता है. इसके अलावा प्रभावित राज्य भी अपने मुताबिक पुनर्वास नीति बनाते हैं.

नक्सलवाद से प्रभावित इलाकों में विकास की धारा

वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित इलाकों में विकास पहुंचाने की पहल भी सरकार ने की है. इसके तहत इन इलाकों में 15 हजार 16 किमी सड़क का निर्माण किया गया है. संचार व्यवस्था सुधारने के लिए सरकार ने इन इलाकों में नौ हजार 233 टॉवर भी शुरू किए हैं. इन इलाकों में 46 आईटीआई और 49 कौशल विकास केंद्र खोले गए हैं.

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सरकार ने बताया है कि राष्ट्रीय नीति और कार्य योजना 2015 की वजह से वामपंथी उग्रवाद पर हाल के दिनों में काफी अंकुश लगा है. सरकार ने बताया है कि 2018 में देश के 126 जिले वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित थे. लेकिन दिसंबर 2025 तक इनकी संख्या घटकर आठ रह गई थी. इनमें से केवल तीन जिले ही वामपंथी उग्रवाद से सबसे अधिक प्रभावित हैं. 

गृहराज्य मंत्री ने बताया है कि साल 2010 में वामपंथी उग्रवाद की सबसे अधिक घटनाएं हुई थीं. उस साल ऐसी 1936 घटनाएं दर्ज की गई थीं. लेकिन 2025 तक इसमें 88 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. पिछले साल केवल 234 घटनाएं ही दर्ज की गई थीं. वहीं इन घटनाओं में मरने वाले नागरिकों और सुरक्षा बलों के जवानों की संख्या में भी कमी आई है. साल 2010 में जहां ऐसी 1005 मौतें हुई थीं तो 2025 में यह घटकर 100 रह गईं. पिछले साल सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में 364 नक्सलियों को मार गिराया था और 1022 को गिरफ्तार किया गया था. वहीं दो हजार 337 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था. 

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