- गिरिराज सिंह ने बताया कि पीएम मोदी से उनकी मुलाकात 1991 में युवा मोर्चा की दिल्ली रैली के दौरान हुई
- उन्होंने बताया कि कैसे कांग्रेस की पाबंदी के बाद भी पीएम मोदी ने अपनी रणनीति से रैली को सफल बनाया था
- गिरिराज सिंह ने कहा कि मोदी पहले कार्यकर्ताओं के दिलों के नेता बने और बाद में जनता ने उन्हें प्रधानमंत्री चुना
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपने तीन दशक से ज्यादा पुराने संबंधों, शुरुआती मुलाकातों और उनके कामकाज के तौर-तरीकों पर एनडीटीवी को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में खुलकर बात की. गिरिराज सिंह पीएम मोदी के विजन और गरीबों के प्रति उनके समर्पण का जिक्र करते हुए कैमरे पर ही भावुक हो गए और उनकी आंखों से आंसू छलक गए. उन्होंने कहा कि महादेव उनकी आयु भी पीएम मोदी को दे दें, ताकि देश आने वाले 20-30 सालों में भारत, दुनिया का सबसे विकसित राष्ट्र बन सके.
गिरिराज सिंह पीएम मोदी से पहली बार कब मिले?
गिरिराज सिंह ने बताया कि नरेंद्र मोदी से उनकी पहली मुलाकात 1991 में दिल्ली में युवा मोर्चा की एक बड़ी रैली के दौरान हुई थी. उस वक्त केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी और मुरली मनोहर जोशी बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे. कांग्रेस ने उस रैली को रोकने की पूरी कोशिश की थी. गिरिराज सिंह ने याद करते हुए कहा, "उस समय एक व्यक्ति हाथ में वॉकी-टॉकी लिए लुटियंस जोन में अपनी टीम को निर्देश दे रहा था. हम बिहार से आते थे, उस वक्त वॉकी-टॉकी के बारे में ज्यादा नहीं जानते थे. नरेंद्र मोदी ने उस समय टेक्नोलॉजी का ऐसा इस्तेमाल किया कि कांग्रेस का सारा चक्रव्यूह टूट गया. उन्होंने पर्दे के पीछे रहकर पूरी रणनीति को सफल बनाया. इसके बाद कश्मीर की एकता यात्रा के दौरान लाल चौक पर तिरंगा फहराने की ऐतिहासिक रणनीति में भी मोदी की सांगठनिक कुशलता देखने को मिली.
श्रीनगर के लाल चौक पर फहराया था तिरंगा
गिरिराज ने बताया कि तभी उनसे मेरी पहली मुलाकात हुई. छोटी-छोटी दाढ़ी, तेज, टेक्नोलॉजी रणनीति और वो रणनीति सफल भी हुई. हर कोई रणनीतिकार के बारे में बात कर रहा था. हम लोग उस समय बस इतना ही जानते थे. उसके बाद लंबी यात्रा चलने लगी. फिर कश्मीर की एकता यात्रा हुई. मैं बिहार का संयोजक था. उस समय झारखंड बिहार एक ही था.उस समय नरेंद्र मोदी मुरली मनोहर जोशी जी के सारथी बने.तब तक नरेंद्र मोदी जी का ओरा हम लोगों के ऊपर दिखने लगा.एक व्यक्ति जो रणनीतकार है, संगठन महामंत्री रहे, आरएसएस के प्रचारक हैं. तब मेरे जैसे लोगों को उनके बारे में पता चला. उन्होंने लोगों को बाध्य कर दिया कि वे श्रीनगर से बसों से उतरकर लाल चौक तक गए.दूसरी तरफ से रामबाग से हम लोग सड़क से गए. उसके बाद हम लोग वहां नहीं जा पाए. तब तक पता चला कि नरेंद्र मोदी, मुरली मनोहर जोशी समेत सारे बड़े लोगों ने लाल चौक पर झंडा फहरा दिया. मैंने उनकी उस समय उनकी वह रणनीति देखी.
नरेंद्र मोदी पहले कार्यकर्ताओं के दिलों के नेता बने
केंद्रीय मंत्री ने 2010 की पटना बीजेपी कार्यकारिणी और नीतीश कुमार के साथ तल्खी के दौर को याद करते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा पार्टी कार्यकर्ताओं की भावनाओं को प्राथमिकता दी. उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी पहले कार्यकर्ताओं के दिलों के नेता बने और बाद में जनता ने उन्हें देश का प्रधानमंत्री बनाया.
क्या पीएम मोदी नाराज होते हैं?
जब उनसे पूछा गया कि क्या प्रधानमंत्री कभी नाराज होते हैं, तो गिरिराज सिंह ने एक दिलचस्प किस्सा बताया. उन्होंने बताया कि एक बार अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के भारत दौरे से ठीक पहले उन्होंने राम मंदिर पर एक तीखा बयान दे दिया. इसके पांच मिनट के भीतर ही मोदी जी का फोन आया और उन्होंने सख्त लहजे में नाराजगी जाहिर की. जब भी कोई गलती होती है तो अभिभावक की तरह उनसे डांट भी पड़ती है और अच्छा काम करने पर उतना ही प्यार और सम्मान भी मिलता है.
गरीब कल्याण योजनाओं का जिक्र
गिरिराज सिंह ने गरीब कल्याण योजनाओं का जिक्र करते हुए उ कहा कि 10 करोड़ महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ना और 3 करोड़ लखपति दीदी बनाना पीएम मोदी की सोच का परिणाम है. विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि बिना एक भी दिन छुट्टी लिए लगातार देश सेवा करने वाले नेता पर जनता का अटूट भरोसा है. समान नागरिक संहिता (UCC) का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा कि एक देश में सभी नागरिकों के लिए एक ही कानून होना चाहिए.
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