देश में पैकेज्ड फूड पर 'फ्रंट ऑफ पैक' चेतावनी लेबल लागू करने की तैयारी जारी है. FSSAI ने गुरुवार 24 सितंबर को 'फ्रंट-ऑफ-पैक न्यूट्रिशन लेबलिंग' (FoPL) को लागू करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा पेश किया. जिसमें बताया गया कि वह पहले प्रस्तावित 2 चरणों के बजाय अब एक ही चरण में FoPL लागू करने का प्रस्ताव कर रहा है. ड्राफ्ट संशोधन नियम तैयार करने और उन्हें अंतिम रूप देने में करीब 4 महीने का समय लगेगा.
कैसे लिखी जाएगी चेतावनी?
FSSAI ने FoPL के प्रस्तावित लेबल के प्रारूप को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट में जानकारी दी. बताया गया कि पैकेट के सामने सफेद चौकोर पृष्ठभूमि पर एक लाल षट्भुज (Hexagon) होगा. इसमें संबंधित पोषक तत्व जैसे नमक, चीनी या वसा का नाम की जानकारी दी जाएगी. अगर, एक से अधिक पोषक तत्व निर्धारित सीमा से अधिक होंगे, तो एक ही षट्भुज में दो या तीन पोषक तत्वों के नाम दिए जाएंगे. FSSAI का कहना है कि इस लेबल को पैकेट के ऊपरी बाएं हिस्से में प्रमुखता से लगाया जाएगा. इसकी लिखावट पोषण संबंधी जानकारी वाली पिछली तालिका के फॉन्ट से एक पॉइंट बड़ी होगी. प्रस्तावित आकार कनाडा में इस्तेमाल किए जा रहे चेतावनी लेबल के अनुरूप होगा.
लागू होने में लगेगा कितना समय?
चीनी-वसा के लिए कैसा होगा चेतावनी लेबल?
FSSAI ने कहा है कि प्रस्तावित सीमा ICMR-NIN के 'Dietary Guidelines for Indians, 2024' पर आधारित होगी. लेबलिंग के लिए जो पोषक तत्व सीमा प्रस्तावित है, उसमें प्रसंस्करण के स्तर के बजाय पोषक तत्वों की मात्रा को मुख्य नियामक आधार बनाया जाएगा. हलफनामे के अनुसार, उदाहरण के तौर पर 100 मिलीलीटर में 2 ग्राम से अधिक चीनी या 175 मिलीग्राम से अधिक नमक होने पर पेय पदार्थ संबंधित चेतावनी के दायरे में आएगा. इसी तरह पैकेज्ड खाद्य पदार्थ में 4.2 ग्राम से अधिक अतिरिक्त वसा या 625 मिलीग्राम से अधिक नमक प्रति 100 ग्राम होने पर चेतावनी लेबल लगेगा.
FSSAI ने क्यों पेश किया हलफनामा?
FSSAI ने यह भी जानकारी दी कि गैर-कैलोरी स्वीटनर वाले खाद्य पदार्थों और पेय पदार्थों के पैकेट के सामने 'CONTAIN NON CALORIC SWEETENER' की चेतावनी दी जाएगी. अभी यह जानकारी पैकेट के पीछे दी जाती है. बता दें कि एक याचिका पर सुनवाई करते समय सुप्रीम कोर्ट ने 10 सितंबर 2026 के आदेश में FSSAI से FoPL लागू करने की समय-सीमा, पोषक तत्वों की सीमा, मीठे पेय पदार्थों की पहचान, चीनी-वसा की गणना, चेतावनी चिह्न के रंग-आकार, कृत्रिम पदार्थों के इस्तेमाल और पोषण संबंधी जागरूकता समेत अन्य मुद्दों पर जवाब मांगा था. जिसे लेकर FSSAI ने कोर्ट में हलफनामा पेश किया है.
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