मिजोरम के पूर्व मुख्यमंत्री और मिजो नेशनल फ्रंट (MNF) के अध्यक्ष जोरमथांगा गुरुवार को गुवाहाटी यूनिवर्सिटी से अपना डिग्री सर्टिफिकेट लेने वाले हैं. जोरमथांगा ने 1966 में मणिपुर के धनमंजूरी कॉलेज से अंडरग्रेजुएट की फाइनल परीक्षा दी थी. उस समय यह कॉलेज गुवाहाटी यूनिवर्सिटी से जुड़ा हुआ था और उनका मुख्य विषय अंग्रेजी था. उन्होंने सेकंड-क्लास रिजल्ट के साथ परीक्षा पास की थी.
क्यों नहीं ले पाए थे डिग्री?
परीक्षा पूरी करने के बाद, वे MNF के सदस्य के तौर पर अंडरग्राउंड हो गए. MNF ने लालडेंगा के नेतृत्व में हथियारबंद संघर्ष शुरू किया था. हथियारबंद संघर्ष के कारण वे उस समय अपना अंडरग्रेजुएट डिग्री सर्टिफिकेट नहीं ले पाए थे.
20 अगस्त को फणीधर दत्ता सेमिनार हॉल में होने वाले एक समारोह में, यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर 82 साल जोरमथांगा को औपचारिक रूप से सर्टिफिकेट सौंपेंगे.
जोरमथांगा 1965 में MNF में शामिल हुए और अगले ही साल अंडरग्राउंड हो गए. 1986 में मिजोरम शांति समझौते पर हस्ताक्षर होने तक वे लालडेंगा के साथ करीबी तौर पर जुड़े रहे और संगठन की राजनीतिक, सैन्य और कूटनीतिक गतिविधियों में अहम भूमिका निभाई.
आत्मकथा पर भी चर्चा की उम्मीद
वे 'फ्रॉम गुरिल्ला फाइटर टू चीफ मिनिस्टर' किताब के लेखक भी हैं, जो उनकी आत्मकथा है. लेक्चर के दौरान, उनके अंडरग्राउंड MNF नेता के तौर पर बिताए सालों से लेकर मुख्यमंत्री के तौर पर उनके कार्यकाल तक, उनके राजनीतिक सफर के अलग-अलग पहलुओं पर चर्चा होने की उम्मीद है.
X पर एक पोस्ट में गुवाहाटी यूनिवर्सिटी ने लिखा, 'गुवाहाटी यूनिवर्सिटी आपको मिजो नेशनल फ्रंट (MNF) के अध्यक्ष और मिजोरम के पूर्व मुख्यमंत्री जोरमथांगा के एक खास लेक्चर में आमंत्रित करती है, जिसका विषय है 'गुरिल्ला फाइटर से शांतिदूत तक का सफर.'
यह कार्यक्रम OKDISCD और GUINEIS द्वारा गुवाहाटी यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर साउथ ईस्ट एशियन स्टडीज (CSEAS) के सहयोग से आयोजित किया जाएगा.
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