- भारत-बेल्जियम सैन्य ट्रेनिंग, डिफेंस, जोरावर टैंक, सेमीकंडक्टर समेत अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाएंगे.
- क्रिटिकल मिनरल्स, रिन्यूएबल एनर्जी, सप्लाई चेन में सहयोग बढ़ेगा.
- ईयू-इंडिया एफटीए भारत-बेल्जियम रिश्तों को और मजबूत कर सकता है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर की नई दिल्ली में हुई मुलाकात ने दोनों देशों के रिश्तों को एक नए और ज्यादा रणनीतिक दौर में पहुंचाने का संकेत दिया है. बातचीत में रक्षा, व्यापार, क्रिटिकल मिनरल्स, सेमीकंडक्टर, स्वच्छ ऊर्जा, समुद्री क्षेत्र, तकनीक और आतंकवाद जैसे मुद्दे प्रमुख रहे. सबसे अहम बात यह है कि यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब दुनिया युद्ध, सप्लाई चेन के संकट, ऊर्जा असुरक्षा और बढ़ते आर्थिक तनाव से घिरी है. ऐसे में भारत और यूरोप के बीच भरोसेमंद साझेदारियां पहले से अधिक अहम हो गई हैं.
आइए समझते हैं कि मोदी और डी वेवर की बातचीत के मायने क्या हैं.
भारत और बेल्जियम के रिश्ते तीन सदियों से ज्यादा पुराने माने जाते हैं. स्वतंत्र भारत के साथ बेल्जियम ने सितंबर 1947 में ही राजनयिक संबंध स्थापित कर लिए थे. लेकिन अब रिश्ते पारंपरिक व्यापार से आगे बढ़ रहे हैं. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि लोकतांत्रिक मूल्य, बाजार आधारित अर्थव्यवस्था और मजबूत पीपल-टू-पीपल संपर्क दोनों देशों को स्वाभाविक साझेदार बनाते हैं. पहले विश्व युद्ध में बेल्जियम की धरती पर भारतीय सैनिकों की मौजूदगी और उनके बलिदान का भी इस रिश्ते से भावनात्मक जुड़ाव है.
चमकते हीरों से आगे बढ़ा आर्थिक रिश्ता
बेल्जियम और भारत के बीच सबसे चर्चित आर्थिक संबंध लंबे समय से हीरा कारोबार रहा है. बेल्जियम का एंटवर्प दुनिया के बड़े डायमंड ट्रेडिंग सेंटरों में शामिल है और भारतीय कारोबारी समुदाय की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका है. लेकिन दोनों देश अब इस रिश्ते को सिर्फ डायमंड ट्रेड तक सीमित नहीं रखना चाहते.
2025-26 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार करीब 13.01 अरब डॉलर रहा. बेल्जियम से भारत में अप्रैल 2000 से दिसंबर 2025 तक करीब 4.2 अरब डॉलर का विदेशी निवेश आया.
दोनों देश भविष्य का आर्थिक रिश्ता व्यापार, निवेश, टेक्नोलॉजी और इंडस्ट्री के ज्यादा व्यापक आधार पर खड़ा कर रहे हैं.

जोरावर टैंक
'जोरावर' टैंक पर डील
मोदी और डी वेवर की बातचीत में रक्षा सहयोग को रिश्तों का एक अहम स्तंभ बताया गया. प्रधानमंत्री मोदी ने सैन्य आदान-प्रदान और ट्रेनिंग बढ़ाने की बात की. तो दोनों सरकारों और रक्षा उद्योगों के बीच हुए समझौते भविष्य में रक्षा क्षेत्र में संयुक्त उत्पादन और संयुक्त निर्माण के रास्ते खोल सकते हैं.
इसी संदर्भ में जोरावर टैंक परियोजना का जिक्र खास महत्व रखता है. भारत अपनी रक्षा जरूरतों के लिए विदेशी तकनीक लेने के साथ-साथ घरेलू निर्माण और डिजाइन क्षमता बढ़ाना चाहता है.
बेल्जियम के साथ रक्षा सहयोग इसलिए भी अहम है क्योंकि भारत केवल उपकरणों को खरीदना ही नहीं बल्कि रिसर्च, टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और संयुक्त उत्पादन जैसे क्षेत्रों में साझेदारी का अवसर भी चाहता है.
सेमीकंडक्टर
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सेमीकंडक्टर में बेल्जियम और भारत एक-दूसरे के पूरक
सेमीकंडक्टर आज की अर्थव्यवस्था का नया रणनीतिक हथियार है. मोबाइल फोन से लेकर कार, रक्षा उपकरण, AI और इलेक्ट्रॉनिक्स तक लगभग हर आधुनिक तकनीक चिप पर निर्भर है.
बेल्जियम की सबसे बड़ी ताकत यहां उसकी रिसर्च और सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी की विशेषज्ञता है. भारत के पास बड़ा बाजार, इंजीनियरिंग टैलेंट और तेजी से बढ़ता इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग बेस है.
यही वजह है कि दोनों देश बेल्जियम में मौजूद दुनिया की शीर्ष नैनो इलेक्ट्रॉनिक्स रिसर्च हब में से एक IMEC को भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम से जोड़ने पर काम करेंगे.
अगर यह सहयोग बढ़ता है तो भारत केवल चिप ही नहीं बनाएगा बल्कि डिजाइन, रिसर्च, नई टेक्नोलॉजी, ट्रेनिंग और हाई-एंड सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित करने के अवसर भी खुल सकते हैं.

प्रतीकात्मक तस्वीर
क्रिटिकल मिनरल्स यानी भविष्य की इंडस्ट्री का कच्चा माल
जिस तरह अब तक क्रूड ऑयल की सबसे अधिक अहमियत रही है, ठीक उसी तरह अब लिथियम, कोबाल्ट, निकेल, और अन्य महत्वपूर्ण खनिज आज की इंडस्ट्री के लिए जरूरी होते जा रहे हैं. ईवी, बैटरी, रिन्यूएबल एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स और डिफेंस टेक्नोलॉजी सभी के लिए इन खनिजों की जरूरत होती हैं.
भारत और बेल्जियम ने क्रिटिकल मिनरल्स की प्रोसेसिंग और रीसाइक्लिंग में सहयोग बढ़ाने का फैसला किया है. रणनीतिक रूप से यह महत्वपूर्ण है क्योंकि केवल उपलब्धता ही पर्याप्त नहीं है. प्रोसेसिंग, रिफाइनिंग और रीसाइक्लिंग की क्षमता भी रणनीतिक तौर पर बेहद अहम हैं. यह भारत के लिए सप्लाई चेन को सुरक्षित और विविध बनाने की दिशा में अहम हो सकता है.
स्वच्छ ऊर्जा में नया औद्योगिक कनेक्शन
दोनों देशों ने अक्षय ऊर्जा पर भी समझौता किया है. भारत तेजी से सौर ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन और दूसरी स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों की दिशा में आगे बढ़ रहा है. बेल्जियम के पास क्लीन टेक्नोलॉजी और इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग में बहुत क्षमता है.
बेल्जियम की कंपनी जॉन कॉकरिल आंध्र प्रदेश के काकीनाड़ा में इलेक्ट्रोलाइजर मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी विकसित कर रही हैं, जिसकी प्रस्तावित क्षमता 2 गीगावाट है.
इस तरह भारत-बेल्जियम साझेदारी सिर्फ जलवायु लक्ष्यों तक सीमित नहीं है. इसका संबंध भविष्य के क्लीन एनर्जी मैन्युफैक्चरिंग टेक्नोलॉजी से भी है.
यूरोपीय यूनियन-भारत मुक्त व्यापार समझौता का कनेक्शन
बेल्जियम के प्रधानमंत्री ने ईयू-इंडिया फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को एक बड़ी उपलब्धि बताया. करीब दो दशक की बातचीत के बाद भारत और यूरोप ने अपनी अर्थव्यवस्था को और करीब लाने की दिशा में कदम बढ़ाया है.
इस डील का असर भारत और बेल्जियम के रिश्तों पर भी पड़ेगा. बेहतर मार्केट तक पहुंच बनाने, निवेश के लिए अधिक स्पष्ट नियम और विभिन्न व्यापारिक बाधाओं को कम करने से कंपनियों को फायदा मिल सकता है.
डी वेवर ने कहा कि वह चाहते हैं कि इस समझौते को ठोस आर्थिक नतीजों में बदला जाए. उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को दिसंबर में ब्रसेल्स आने का निमंत्रण भी दिया. उस मुलाकात के दौरान ईयू-इंडिया एफटीए को और आगे बढ़ाने की उम्मीद है.
समुद्र और सप्लाई चेन नया फ्रंट
बेल्जियम के पोर्ट यूरोप और दुनिया के बीच व्यापारिक कनेक्टिविटी में अहम किरदार निभाते हैं. बेल्जियम की सीमाएं फ्रांस, जर्मनी, लक्जमबर्ग और नीदरलैंड्स जैसे विकसित देशों के बाजारों से लगती है. बेल्जियम के दो शहरों एंटवर्प और ब्रुग्स से जुड़ा बंदरगाह यूरोप का दूसरा सबसे बड़ा समुद्री बंदरगाह है. दुनियाभर से आने वाले माल इसी बंदरगाह से यूरोप के विभिन्न औद्योगिक केंद्रों तक पहुंचाए जाते हैं.
भारत के लिए समुद्री व्यापार और सप्लाई चेन की सुरक्षा लगातार अहम होती जा रही है. दोनों देशों ने समुद्री क्षमता निर्माण, बंदरगाहों, शिपिंग और सप्लाई चेन में सहयोग की संभावनाओं पर जोर दिया है.
वैश्विक संघर्षों के बीच समुद्री रास्तों में किसी भी तरह का व्यवधान महंगाई और व्यापार दोनों को प्रभावित करता है. इसलिए यह सहयोग भविष्य में रणनीतिक महत्व हासिल कर सकता है.

यूरोप का सबसे बड़ा और दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बंदरगाह- पोर्ट ऑफ एंटवर्प-ब्रुग्स
Photo Credit: Ports of Antwerp and Zeebrugge
यूक्रेन, पश्चिम एशिया और आतंकवाद पर साझा संदेश
दुनिया में चल रहे संघर्षों पर भारत और बेल्जियम की बातचीत भी महत्वपूर्ण रही.
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दोनों देश रूल ऑफ लॉ, बातचीत और कूटनीति में विश्वास रखते हैं. भारत यूक्रेन और पश्चिम एशिया में संघर्षों को जल्द खत्म करने और शांति स्थापित करने के प्रयासों का समर्थन करता है. इसके साथ ही आतंकवाद के खिलाफ दोनों देशों ने अपनी साझा प्रतिबद्धता को दोहराया.
सबसे बड़ा संदेश
बार्ट डी वेवर के बयान का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यही था. उन्होंने भारत को दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक ताकत, तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था, तकनीकी और आर्थिक शक्ति और एक प्रभावशाली जियोपॉलिटिकल प्लेयर बताया.
मोदी और डी वेवर की मुलाकात को सिर्फ एक द्विपक्षीय बैठक के रूप में देखना तस्वीर को छोटा कर देगा. असल कहानी यह है कि भारत और बेल्जियम अपने पुराने रिश्ते को नए दौर की जरूरतों के हिसाब से फिर से डिजाइन कर रहे हैं.
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