- मुंबई में एक बुजुर्ग को 2 हफ्ते तक डिजिटल अरेस्ट करने का मामला सामने आया है.
- IITian और बैंक मैनेजर ने मिलकर बुजुर्ग से 1.12 करोड़ रुपए की ठगी की है.
- बुजुर्ग को 2 हफ्ते तक घर में कैद रखा और हर 2 घंटे में उससे वीडियो कॉल करवाते थे.
मुंबई से डिजिटल अरेस्ट का एक बड़ा मामला सामने आया है. मुंबई साइबर पुलिस ने इस घटना का खुलासा करते हुए बताया कि एक बुजुर्ग को डिजिटल अरेस्ट करके उससे 1.12 करोड़ रुपए की ठगी की गई थी. लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि इस घटना में पुलिस ने जिन 6 लोगों को गिरफ्तार किया है, वह कोई साधारण अपराधी नहीं, बल्कि देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIT दिल्ली से पास आउट एक वेब डेवलपर और एक निजी बैंक के ऑपरेशंस मैनेजर हैं. इन सभी ने मिलकर बुजुर्ग के साथ ठगी की इस पूरी घटना को अंजाम दिया था. जिसमें दिल्ली IIT से पासआउट 33 साल का गौरव महेश गोयल मुख्य आरोपी है.
दो हफ्ते तक डिजिटल अरेस्ट किया
मुंबई पुलिस ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान तारिक मोमिन, राकेश जैन, चिंतन देसाई, शंकर त्यागी, गौरव महेश गोयल और अजय शर्मा के रूप में हुई है. अधिकारी ने बताया कि गोयल 'वेब डेवलपर' है और उसके पास आईआईटी दिल्ली से बीई की डिग्री है. उन्होंने कहा कि गोयल के खिलाफ 2021 में भी धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया था. वहीं शंकर त्यागी एक निजी बैंक में संचालन प्रबंधक के रूप में काम करता है. अधिकारी ने बताया पीड़ित दहिसर का सेवानिवृत्त कारोबारी है. उसे जुलाई और अगस्त के बीच करीब दो सप्ताह तक उसके घर पर ही डिजिटल अरेस्ट रखा गया. जालसाजों ने शुरुआत में दूरसंचार विभाग के अधिकारी बनकर उससे संपर्क किया और आरोप लगाया कि दिल्ली में दर्ज धन शोधन के एक मामले में उसके आधार विवरण का गलत इस्तेमाल किया गया है.'
कैसे ठगी को दिया अंजाम
पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने 30 जुलाई से 12 अगस्त के बीच डिजिटल अरेस्ट के इस मामले को अंजाम दिया था. सबसे पहले ठगों ने पीड़ित बुजुर्ग को फोन कर खुद को दूरसंचार विभाग का अधिकारी बताया. दावा किया कि बुजुर्ग के आधार कार्ड का इस्तेमाल कर दिल्ली में 238 करोड़ रुपये का मनी लॉन्ड्रिंग घोटाला किया गया है और उनके नाम पर कई अवैध सिम कार्ड जारी हुए हैं. इस पर बुजुर्ग बुरी तरह से घबरा गया. आरोपियों ने पुलिस की वर्दी पहनकर व्हाट्सऐप पर वीडियो कॉल करके बुजुर्ग को पूरी तरह से झांसे में ले लिया. सुप्रीम कोर्ट का एक फर्जी गिरफ्तारी वारंट दिखाकर बुजुर्ग को उनके ही घर में डिजिटल अरेस्ट कर दिया गया. उन्हें सख्त हिदायत दी गई कि वे किसी को इस बारे में न बताएं और हर दो घंटे में वीडियो कॉल पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराएं. बदनामी और परिवार की सुरक्षा के डर से बुजुर्ग ने अपनी जिंदगी भर की कमाई फिक्स्ड डिपॉजिट तोड़कर कुल 1 करोड़ 12 लाख 26 हजार रुपये ठगों के बताए खातों में ट्रांसफर कर दिए.
मुंबई पुलिस तक कैसे पहुंचा मामला
बुजुर्ग 2 हफ्ते तक डिजिटल अरेस्ट रहा, जिससे उसके व्यवहार में बदलाव आ गया था. वह परिवार से भी ठीक से बात नहीं कर रहा था. जब बेटी को यह सब अजीब लगा तो उसने जानकारी जुटाई. जिससे उसे पता चला कि पिता के खाते से भारी-भरकम राशि ट्रांसफर हुई है. ऐसे में उसने तुरंत मामले की जानकारी मुंबई साइबर पुलिस को बताई. पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस और बैंक खातों की जानकारी निकाली और पूरा मामला पकड़ लिया.
पुलिस ने एक साथ छापेमारी कर बैंक मैनेजर शिखर त्यागी, आईआईटी ग्रेजुएट गौरव गोयल के साथ अन्य बदमाशों को गिरफ्तार कर लिया. जांच में पता चला कि पीड़ित से ठगी गई रकम को एक गोल्ड ट्रेडिंग फर्म के खाते में रूट किया गया था. पुलिस अब इस गिरोह की तरफ से ठगे गए अन्य पीड़ितों और उनके अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की जांच कर रही है.
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