- पश्चिम बंगाल, असम, केरल, पुडुचेरी और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव की मतगणना सुबह आठ बजे शुरू होगी
- स्ट्रांग रूम में ईवीएम और पोस्टल बैलेट को तीन स्तरों की सुरक्षा के साथ रखा जाता है और सील खोली जाती है
- मतगणना प्रक्रिया में पोस्टल बैलेट की गिनती के बाद ईवीएम के वोटों की राउंडवार गिनती की जाती है
Assembly Election Result Day Vote Counting LIVE: पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के बाद आज सुबह 8 बजे मतगणना शुरू होगी. बंगाल की 293 विधानसभा सीटें, असम की 126 सीटें, केरल की 140 सीटें, पुडुचेरी की 30 और तमिलनाडु की 234 सीटों के रिजल्ट सोमवार को आएंगे. पश्चिम बंगाल में दो चरणों में चुनाव 23 और 29 अप्रैल को हुआ था और सभी जगहों पर वोटों की गणना 4 मई को होगी. आइए जानते हैं कि वोटों की गिनती कैसे की जाती है.
स्ट्रांग रूम कैसे खोला जाता है
विधानसभा चुनाव के बाद ईवीएम मशीनों और पोस्टल बैलेट को स्ट्रांग रूम में बंद रखा जाता है. स्ट्रांग रूम की सुरक्षा के लिए तीन स्तरीय सुरक्षा होती है.स्ट्रॉंग रूम वो जगह है, जहां मतदान के बाद EVM को भारी सुरक्षा में रखा जाता है. 8 बजे स्ट्रांग रूम खोले जाने के वक्त ताले और सील की जांच होती है. मतगणना के दिन हर विधानसभा के उम्मीदवारों की मौजूदगी में स्ट्रांग रूम की सील खोली जाती है. उस दौरान चुनाव आयोग के विशेष पर्यवेक्षक और रिटर्निंग अफसर भी मौके पर मौजूद रहते हैं. इस कार्यवाही को कैमरे में पूरी तरह रिकॉर्ड भी किया जाता है. पोस्टल बैलेट और ईवीएम को हर विधानसभा के लिए तय काउंटिंग हॉल तक लाकर मतगणना प्रारंभ की जाती है.
विधानसभा चुनाव परिणाम की मतगणना प्रक्रिया
विधानसभा चुनाव के लिए मतगणना सुबह 8 बजे शुरू होती है. सबसे पहले पोस्टल बैलेट की गिनती की जाती है. प्रत्येक राजनीतिक दल के पोलिंग एजेंट काउंटिंग हॉल में मौजूद रहते हैं और मतगणना की पूरी प्रोसेस देखते हैं. हर राउंड वार हर पार्टी को मिले वोटों का अनाउंसमेंट किया जाता है. मतगणना पूरी होने तक किसी भी चुनाव एजेंट को बाहर जाने की अनुमति नहीं मिलती है. विधानसभा चुनाव में हर काउंटिंग सेंटर पर लगभग 7-8 टेबल लगाई जाती हैं और हर टेबल पर अलग-अलग विधानसभा वार टीमें बैठती हैं.
पोस्टल बैलेट के बाद ईवीएम मतगणना
काउंटिंग में सबसे पहले पोस्टल बैलेट डाक मतपत्रों की गणना होती है. रिटर्निंग अफसर की देखरेख में ईवीएम की कंट्रोल यूनिट टेबल लाई जाती है. सीसीटीवी और वीडियोग्राफी भी पूरी मतगणना प्रक्रिया की होती है. काउंटिंग टेबल पर कंट्रोल यूनिट की खास आईडी और ईवीएम पर लगाई गई सील का मिलान किया जाता है. हर प्रत्याशी के पोलिंग एजेंट को ये बताया जाता है. फिर कंट्रोल यूनिट का बटन दबाते ही हर प्रत्याशी को मिला वोट उसके नाम के साथ दिखता है.
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ईवीएम की हर चरणवार गिनती
हर विधानसभा में काउंटिंग राउंडवार होती है. प्रत्येक राउंड में सभी मतगणना केंद्रों की टेबल पर एक-एक कर ईवीएम खोली जाती है और वोटों की गिनती होती है. राउंड के आंकड़ों की घोषणा के साथ स्क्रीन पर भी दिखाया जाता है. विधानसभा में वोटों के हिसाब से 7 से 14 तक राउंड होते हैं. हर राउंड के बाद सभी पार्टियों को मिले वोट पिछले राउंड के साथ जोड़े जाते हैं. चुनाव आयोग की वेबसाइट पर भी यह दिखता है.
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वीवीपैट पर्ची से ईवीएम वोटों का मिलान
ईवीएम में मतगणना के साथ ही वीवीपैट पर्चियों से भी मिलान होता है. वीवीपैट मशीनों से निकली पर्चियों को अलग टेबल पर रखकर उन्हें गिना जाता है और फिर ईवीएम में पड़े कुल वोटों से इसे वेरिफाई किया जाता है. वीवीपैट पर्चियों की गिनती के लिए काउंटिंग सेंटर में वीवीपैट बूथ होता है. वीवीपैट वो पर्ची होती है, जो किसी भी पार्टी को ईवीएम में पड़े वोटों के साथ 7 सेकेंड के लिए दिखाई देती है.
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