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This Article is From Oct 18, 2025

कोलकाता में ईडी ने फर्जी पासपोर्ट रैकेट के आरोपी को किया गिरफ्तार, पाकिस्तान के आज़ाद हुसैन से जुड़ा है मामला

ईडी की जांच में यह भी सामने आया कि आज़ाद हुसैन के जरिए कई बांग्लादेशी नागरिक इंदुभूषण हलदार तक पहुंचते थे, जो नदिया जिले के चकदह का रहने वाला है.

कोलकाता में ईडी ने फर्जी पासपोर्ट रैकेट के आरोपी को किया गिरफ्तार, पाकिस्तान के आज़ाद हुसैन से जुड़ा है मामला
नई दिल्ली:

प्रवर्तन निदेशालय  (ED) की कोलकाता ज़ोनल टीम ने फर्जी पासपोर्ट रैकेट के एक अहम सदस्य इंदुभूषण हलदार उर्फ दुल्लाल को 13 अक्टूबर को गिरफ्तार किया है. यह कार्रवाई पाकिस्तानी नागरिक आज़ाद हुसैन उर्फ अजाद मलिक उर्फ अहमद हुसैन आज़ाद से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई है. ईडी ने बताया कि आरोपी को कोलकाता की विशेष अदालत, बिचार भवन में पेश किया गया, जहां से उसे 5 दिन की ईडी कस्टडी में भेज दिया गया है ताकि मामले की और गहराई से जांच की जा सके.

मामले की शुरुआत पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर से हुई थी, जिसमें आज़ाद मलिक पर विदेशी नागरिक अधिनियम, 1946 की धारा 14 और 14A के तहत केस दर्ज किया गया था. जांच में खुलासा हुआ कि आज़ाद हुसैन, जो मूल रूप से पाकिस्तान का नागरिक है. वह भारत में “आज़ाद मलिक” नाम की फर्जी पहचान के साथ रह रहा था. वह न सिर्फ खुद भारत के दस्तावेज़ों का गलत इस्तेमाल कर रहा था, बल्कि बांग्लादेश से आए अवैध प्रवासियों के लिए भी भारतीय पहचान पत्र और पासपोर्ट बनवाने का काम करता था, जिसके बदले में मोटी रकम वसूलता था.

ईडी की जांच में यह भी सामने आया कि आज़ाद हुसैन के जरिए कई बांग्लादेशी नागरिक इंदुभूषण हलदार तक पहुंचते थे, जो नदिया जिले के चकदह का रहने वाला है. हलदार इन लोगों के लिए फर्जी दस्तावेज़ तैयार कर भारतीय पासपोर्ट जारी कराने में मदद करता था. अब तक की जांच में सामने आया है कि उसने करीब 250 मामलों में पासपोर्ट बनवाने में अवैध तरीके से मदद की, जिससे उसने काले धन का जाल खड़ा किया.

हलदार ने पहले कोर्ट से अग्रिम ज़मानत  लेने की कोशिश भी की थी, लेकिन उसकी याचिका स्पेशल कोर्ट, पीएमएलए (बिचार भवन) और कोलकाता हाईकोर्ट दोनों ने खारिज कर दी थी. इससे पहले ईडी ने 13 जून 2025 को आज़ाद हुसैन उर्फ अजाद मलिक उर्फ अहमद हुसैन आज़ाद के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक अधिनियम (PMLA) के तहत चार्जशीट दाखिल की थी, जिस पर अदालत ने 19 जून 2025 को संज्ञान लिया था. ईडी ने कहा है कि पूरे नेटवर्क की जांच जारी है, जिसमें यह पता लगाया जा रहा है कि इस रैकेट के तार और कहां तक फैले हैं और इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं. 

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