- 3.30 लाख गांवों में ड्रोन सर्वे, 3.24 करोड़ प्रॉपर्टी कार्ड तैयार.
- IIM अहमदाबाद की स्टडी में बैंक लोन और पंचायतों की आय बढ़ने की पुष्टि.
- जमीन विवाद कम होने का राष्ट्रीय स्तर का डेटा सरकार के पास उपलब्ध नहीं.
गांवों में जमीन और संपत्ति को लेकर होने वाले विवादों को कम करने और लोगों को उनकी संपत्ति का आधिकारिक रिकॉर्ड देने के लिए शुरू की गई केंद्र सरकार की स्वामित्व योजना अब बड़े बदलाव की तस्वीर दिखा रही है. इसमें ड्रोन तकनीक से गांवों का सर्वे किया जा रहा है और फिर तैयार किए जा रहे हैं डिजिटल रिकॉर्ड. इसका फायदा ग्रामीणों को मिल रहा है, उनकी आर्थिक स्थिति पर सकारात्मक असर पड़ रहा है और पंचायतों की आमदनी भी पहले से मजबूत होती दिखाई दे रही हैं.
केंद्रीय पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंहने लोकसभा में लिखित जवाब में बताया कि अब तक देश के 3.30 लाख गांवों में ड्रोन सर्वे पूरा किया जा चुका है, जबकि 1.97 लाख गांवों के लिए 3.24 करोड़ प्रॉपर्टी कार्ड तैयार किए जा चुके हैं. यह देश में ग्रामीण संपत्ति के डिजिटलीकरण की दिशा में अब तक की सबसे बड़ी पहल मानी जा रही है.
ड्रोन और हाई-टेक मैपिंग से तय हो रही संपत्ति की सही सीमा
स्वामित्व योजना के तहत गांवों की आबादी वाली जमीन का सर्वे ड्रोन के जरिए किया जाता है. इसमें कंटीन्यूअसली ऑपरेटिंग रेफरेंस स्टेशन तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे बेहद सटीक डिजिटल नक्शे तैयार होते हैं.
इन नक्शों के आधार पर हर संपत्ति की सीमा तय की जाती है. इसके बाद राज्य सरकारों के अधिकारी मौके पर जाकर सत्यापन करते हैं. यदि किसी को आपत्ति होती है या विवाद होता है तो उसका निपटारा किया जाता है. पूरी प्रक्रिया के बाद ही संपत्ति कार्ड जारी किया जाता है. इससे रिकॉर्ड पारदर्शी और भरोसेमंद बनते हैं.
IIM अहमदाबाद की स्टडी में सामने आया बड़ा असर
पंचायती राज मंत्रालय ने इस योजना के असर का आकलन करने के लिए आईआईएम अहमदाबाद से स्टडी कराया. इसमें ये बात सामने आई कि जिन लोगों के पास स्वामित्व योजना के तहत जारी प्रॉपर्टी कार्ड हैं, उनके लिए बैंक से लोन लेना पहले के मुकाबले आसान हुआ है. प्रॉपर्टी कार्ड के आधार पर मिलने वाले बैंक लोन की राशि में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
पंचायतों की आमदनी भी बढ़ी
स्टडी में यह भी पाया गया कि योजना लागू होने के बाद ग्राम पंचायतों की आय में भी सुधार हुआ है. संपत्ति का रिकॉर्ड स्पष्ट होने के कारण संपत्ति कर और अन्य सामान्य करों की वसूली बढ़ी है, जिससे पंचायतों को विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त संसाधन मिलने लगे हैं. इससे गांवों में स्थानीय स्तर पर विकास योजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है.
जमीन विवादों पर सरकार के पास नहीं है आंकड़ा
हालांकि सरकार का यह भी कहना है कि मंत्रालय के पास यह जानकारी उपलब्ध नहीं है कि योजना लागू होने से पहले और बाद में जमीन से जुड़े कितने विवाद सुलझे. योजना का एक प्रमुख उद्देश्य संपत्ति संबंधी विवादों को कम करना है, लेकिन फिलहाल इस संबंध में कोई आधिकारिक राष्ट्रीय डेटा मंत्रालय के पास उपलब्ध नहीं है.
क्या है स्वामित्व योजना?
स्वामित्व योजना का उद्देश्य ग्रामीण आबादी वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को उनकी संपत्ति का आधिकारिक अधिकार रिकॉर्ड उपलब्ध कराना है.
इसके तहत ड्रोन सर्वे, डिजिटल मैपिंग, सत्यापन और विवाद निपटारे की प्रक्रिया पूरी होने के बाद संपत्ति मालिकों को प्रॉपर्टी कार्ड दिया जाता है. इससे संपत्ति का कानूनी रिकॉर्ड तैयार होता है और भविष्य में बैंकिंग, कर निर्धारण तथा ग्रामीण विकास योजनाओं में भी सुविधा मिलती है.
लोकसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, योजना तेजी से आगे बढ़ रही है और करोड़ों ग्रामीण परिवारों तक इसका लाभ पहुंच चुका है. सरकार का मानना है कि डिजिटल संपत्ति रिकॉर्ड ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और स्थानीय प्रशासन को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में अहम भूमिका निभा सकते हैं.
ये भी पढ़ें
Explainer: 78 लाख टन कपड़ों का कचरा और 1 लाख ग्रीन जॉब्स, टेक्सटाइल रीसाइकलिंग बन रहा रोजगार की खान
Explainer: नवी मुंबई, पानीपत और मंगोलपुरी- तीन शहर कैसे बदल रहे लाखों टन कपड़े के कचरे की सूरत?
Explainer: हर साल कपड़े का 78 लाख टन कचरा तैयार होता है, पर पुराने कपड़ों से भारत कैसे बना रहा नई इकोनॉमी?
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं