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ब्रिटिश नौसेना के सर्विलांस ड्रोन में मिले चीनी पार्ट्स! ड्रैगन को गुप्त रूप से भेजा जा रहा था डेटा

अगर कुछ दिन और खुलासा नहीं होता तो ब्रिटेन के इन सर्विलांस ड्रोन के जरिए चीन होर्मुज में भी जासूसी कर सकता था. यहां जानिए कैसे.

ब्रिटिश नौसेना के सर्विलांस ड्रोन में मिले चीनी पार्ट्स! ड्रैगन को गुप्त रूप से भेजा जा रहा था डेटा
ब्रिटिश नौसेना के ड्रोनों में मिले चीनी पार्ट्स (फोटो- अलटर्ड बाई एनडीटीवी)
  • ब्रिटेन की रॉयल नेवी के स्पेशल फोर्स के K3 स्काउट ड्रोन के कैमरे चीन के IP एड्रेस पर डेटा भेज रहे थे- रिपोर्ट
  • ड्रोन के कैमरों में लगे चीन में बने पार्ट्स से ऑनलाइन एक्टिविटी की जानकारी चीन तक पहुंचती रही थी
  • K3 ड्रोन होर्मुज में जहाजों की सुरक्षा के लिए ब्रिटेन की योजना का हिस्सा थे, संवेदनशील डेटा रिकॉर्ड कर रहे थे

ब्रिटेन ने जिस हथियार को जासूसी के काम पर लगाया था, चीन ने उसी में सेंध लगा दी है. सोचिए, ब्रिटेन की सबसे खुफिया सैन्य ताकत के हाथ में मौजूद जासूसी ड्रोन ही चीन को डेटा भेजने लगें. द टेलीग्राफ की एक रिपोर्ट के अनुसार खुलासा हुआ है कि ब्रिटेन की रॉयल नेवी के स्पेशल फोर्सेज के लिए इस्तेमाल हो रहे K3 Scout ड्रोन में लगे कैमरों ने कथित तौर पर चीन के एक IP एड्रेस पर लगातार ‘हार्टबीट कम्युनिकेशन' भेजे. यानी कैमरे अपनी ऑनलाइन मौजूदगी और काम करने की जानकारी चीन तक पहुंचा रहे थे. मामला सामने आते ही ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने कैमरों की इंटरनेट कनेक्टिविटी काट दी. 

रिपोर्ट के क्या पता चला है?

'द टेलीग्राफ' की रिपोर्ट के अनुसार ब्रिटेन की स्पेशल फोर्सेज द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले रॉयल नेवी के जासूसी ड्रोन ने चुपके से चीन को डेटा भेजा है. K3 स्काउट सर्विलांस ड्रोन के कैमरों में चीन में बने पार्ट्स लगे थे, जो चुपके से चीन में मौजूद एक डिवाइस को जानकारी भेज रहे थे. रॉयल मरीन मार्च से ही 12 मिलियन पाउंड की कीमत वाले इस ड्रोन बेड़े का इस्तेमाल कर रहे थे. भारतीय करेंसी में यह रकम लगभग 155 करोड़ रुपए बैठती है. सुरक्षा में सेंध का पता चलने के बाद यूके के रक्षा मंत्रालय (MoD) को कैमरों से सभी इंटरनेट कनेक्शन हटाने पड़े हैं.

इस खुलासे से यह डर पैदा हो गया है कि चीन से जुड़े सुरक्षा खतरों की कई सालों की चेतावनियों के बावजूद, बीजिंग ब्रिटेन की सेना की जासूसी करने की कोशिश कर रहा था. ये ड्रोन ब्रिटेन की एक बड़ी डिफेंस कॉन्ट्रैक्टर कंपनी 'क्रैकेन टेक्नोलॉजी ग्रुप' ने सप्लाई किए थे. कंपनी ने ये कैमरे एक थर्ड पार्टी से लिए थे, जिसने इनकी सुरक्षा को लेकर भरोसा दिलाया था.

अब ड्रोन की जांच में पता चला कि कैमरे चीन के एक IP एड्रेस पर हार्टबीट कम्युनिकेशन भेज रहे थे. यानी ऐसा डेटा जिससे यह पता चलता है कि वे ऑनलाइन हैं और ठीक से काम कर रहे हैं. रक्षा मंत्रालय ने कहा कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि कोई संवेदनशील डेटा या सिस्टम विदेश भेजा गया हो.

...तो होर्मुज पर रहती चीन की नजर

'द टेलीग्राफ' की इस रिपोर्ट के अनुसार मामले की जानकारी रखने वाले रक्षा विभाग के एक सूत्र ने बताया कि K3 ड्रोन उस डिफेंस पैकेज का हिस्सा थे, जिसे यूके ने होर्मुज में जहाजों की आजाद आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए ऑफर किया था. सूत्र ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में ब्रिटेन की योजनाओं से जुड़ी तैयारियां इन डिवाइस में रिकॉर्ड हो गई थीं. इस बात की भी चिंता है कि ये सर्विलांस ड्रोन स्पेशल फोर्स के सीनियर अधिकारियों के बीच हुई बेहद संवेदनशील बैठकों के आस-पास मौजूद थे, और इनके कैमरे तब भी रिकॉर्डिंग करने में सक्षम थे जब ड्रोन बंद थे.

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