- जम्मू-कश्मीर के पुंछ में सनातन धर्म सभा ने स्कूल प्रिंसिपल के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है
- क्राइस्ट स्कूल के ब्रोशर में तिलक, बिंदी, मेहंदी और कलावा पहनने पर रोक लगाने वाले नियम पर विवाद हो गया
- सनातन धर्म सभा ने इस रोक को धार्मिक स्वतंत्रता और सनातन परंपराओं पर हमला बताया है
जम्मू-कश्मीर के पुंछ में सनातन धर्म सभा ने एक स्कूल के प्रिंसिपल के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है. मामला ड्रेस कोड से जुड़ा है. सनातन धर्म सभा समेत कई दक्षिणपंथी समूहों का आरोप है कि डेगवार स्थित क्राइस्ट स्कूल ने अपने ब्रोशर में ड्रेस कोड से जुड़े ऐसे नियम जारी किए हैं, जिनसे छात्रों पर तिलक, बिंदी, मेहंदी और कलावा जैसी धर्म से जुड़ी चीजें पहनने से कथित तौर पर रोक लगाई गई है.
क्रिश्चयन स्कूल के नियमों पर सनातन धर्म सभा को आपत्ति
सनातन धर्म सभा ने इसे सनातन परंपराओं और धार्मिक स्वतंत्रता पर सीधा हमला करार दिया. सभा ने गुरुवार को स्कूल प्रिंसिपल के खिलाफ FIR दर्ज करने और जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से मामले में तुरंत दखल देने की मांग की.सनातन धर्म सभा के सदस्यों ने गीता भवन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान स्कूल की हैंडबुक में जारी उन निर्देशों पर कड़ी आपत्ति जताई. दरअसल इसमें लड़के और लड़कियों को स्कूल परिसर में मेहंदी, बिंदी, टीका या तिलक या कलावा पहनने से रोका गया है.
तिलक, बिंदी और कलावा पर रोक से भड़के
सभा के एक सदस्य ने कहा कि ये मामला अनुशासन का नहीं, बल्कि हमारी पहचान और आस्था को दबाने की कोशिश का है. उन्होंने कहा कि हमारे लिए तिलक, बिंदी और कलावा फैशन एक्सेसरीज नहीं, बल्कि ये हमारी धार्मिक मान्यताओं और सांस्कृतिक मूल्यों का अहम हिस्सा हैं. इन पर रोक लगाने से पूरे हिंदू समुदाय की भावनाएं आहत होती हैं.
इस मामले को लेकर दक्षिणपंथी संगठन पुंछ में पुलिस स्टेशन के बाहर विरोध प्रदर्शन कर चुके हैं. उन्होंने पुंछ के डिप्टी कमिश्नर और शिक्षा विभाग से मामले का तुरंत संज्ञान लेने और जिम्मेदारों के खिलाफ एक्शन लिए जाने की मांग की.
स्कूल प्रिंसिपल ने मांगी माफी
पुंछ के मुख्य शिक्षा अधिकारी जावेद इकबाल गुलशन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्कूल प्रिंसिपल को जवाब के लिए तलब किया. जिसके बाद प्रिंसिपल फादर सुजीत मैथ्यू ने इसके लिए माफी मांगी और स्कूल के आदेश वाले ब्रोशर को तुरंत वापस लेने की बात कही. पूंछ के CEO के मुताबिक, फादर ने दावा किया कि आपत्तिजनक सामग्री अनजाने में स्कूल ब्रोशर में शामिल हो गई. इसे दूसरे राज्यों के स्कूलों के ब्रोशर से कॉपी-पेस्ट किया गया था, इसीलिए ये गलत से यहां भी छप गई.
इस मामले ने जिले में बड़ी बहस छेड़ दी है. बच्चों के माता-पिता और समुदाय के लोग एक जैसा अनुशासन बनाए रखने और धार्मिक स्वतंत्रता का सम्मान करने के बीच संतुलन पर सवाल उठा रहे हैं.
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