महाराष्ट्र के सतारा जिले में फलटण उप-जिला अस्पताल के एक संविदा चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेंद्र रूपनवर की आत्महत्या ने राज्य के चिकित्सा जगत में बड़ी हलचल पैदा की है. इस घटना के बाद स्वास्थ्य प्रणाली में प्रशासनिक और राजनीतिक दबाव का मुद्दा फिर से गरमा गया है. आरोप है कि एक राजनीतिक दल से जुड़े कुछ लोग 'गन लाइसेंस' हथियार का लाइसेंस बनवाने के लिए आवश्यक मेडिकल सर्टिफिकेट जारी करने को लेकर डॉ. रूपनवर पर लगातार दबाव बना रहे थे. आरोप है कि उन्हें नौकरी से निकालने की धमकियां भी दी जा रही थीं. इस मानसिक प्रताड़ना से तंग आकर डॉ. रूपनवर ने 27 अगस्त को मुंबई में आत्महत्या का प्रयास किया. उन्हें गंभीर हालत में सायन अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान 31 अगस्त को दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया.
डॉ. राजेंद्र रूपनवर का आत्महत्या से पहले का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें उन्होंने कहा, "केवल दो ही भगवान जैसे इंसान मेरी जान बचा सकते हैं, एक हैं डॉ. भगवान पवार और दूसरे हैं डॉ. लीला मदन मैडम."
हथेली पर लिखा था सुसाइड नोट!
डॉ. रूपनवर ने 29 जुलाई को ही अपने बाएं हाथ की हथेली पर एक सुसाइड नोट लिखकर उसे अपने व्हॉट्सएप स्टेटस पर लगाया था. वे लगातार अपने व्हॉट्सएप स्टेटस, इंस्टाग्राम रील्स और सोशल मीडिया के जरिए अपने ऊपर पड़ रहे राजनीतिक दबाव और धमकियों के खिलाफ आवाज उठा रहे थे. स्टेटस देखने के बाद 'ऑल इंडिया मेडिकल स्टूडेंट्स एसोसिएशन' के राष्ट्रीय समन्वयक डॉ. अपूर्व दलवी ने इसकी सूचना 'इंडियन मेडिकल एसोसिएशन' IMA को दी थी.
दोस्तों ने क्या बताया?
आईएमए के महाराष्ट्र अध्यक्ष डॉ. संतोष कुलकर्णी ने तुरंत फलटण अस्पताल की मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. लीला मदाने से संपर्क किया था. हालांकि, उस वक्त डॉ. मदाने ने जवाब दिया था कि रूपनवर सुरक्षित हैं और अपने भाई के घर पर हैं. दोस्तों के मुताबिक, डॉ. रूपनवर अपनी परेशानी बताने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों से मिलने मुंबई भी गए थे, लेकिन उनकी मुलाकात नहीं हो सकी. डॉ. रूपनवर सोलापुर जिले के मांडवे नामक एक छोटे से गांव के बेहद गरीब परिवार से ताल्लुक रखते थे. विपरीत परिस्थितियों का सामना करते हुए उन्होंने मुंबई के प्रतिष्ठित ग्रांट मेडिकल कॉलेज Grant Medical College से अपनी मेडिकल की पढ़ाई पूरी की थी और पिछले डेढ़ साल से फलटण अस्पताल में संविदा पर कार्यरत थे.
महाराष्ट्र सरकार ने की कार्रवाई
इस घटना के बाद महाराष्ट्र सरकार ने कड़ी कार्रवाई करते हुए फलटण उप-जिला अस्पताल की मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. लीला मदाने को निलंबित कर दिया है. उन पर जूनियर डॉक्टरों के साथ असंवेदनशील व्यवहार, कठोर भाषा का प्रयोग और प्रशासनिक लापरवाही का आरोप है. चिंताजनक बात यह है कि इसी अस्पताल में साल 2025 में भी एक महिला डॉक्टर ने काम के तनाव के चलते आत्महत्या कर ली थी.
पुलिस ने दर्ज की जीरो एफआईआर
डॉ. रूपनवर के परिवार की शिकायत पर दादर रेलवे पुलिस GRP ने आत्महत्या के लिए उकसाने का 'जीरो एफआईआर' दर्ज किया है. सतारा के पुलिस अधीक्षक SP निखिल पिंगले ने बताया कि दादर जीआरपी से यह मामला अब आगे की जांच के लिए सतारा पुलिस को ट्रांसफर कर दिया गया है और पुलिस ने गहनता से जांच शुरू कर दी है. वहीं, रेजिडेंट डॉक्टरों के संगठन MARD के अध्यक्ष डॉ. अथर्व शिंदे ने इस मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की है. उन्होंने डॉक्टरों के मानसिक उत्पीड़न को रोकने के लिए सख्त कानून बनाने और एक मजबूत शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया है.
डॉक्टरों ने प्रधान सचिव को लिखा शिकायती पत्र
डॉ. राजेंद्र रुपनवर का शव जैसे ही पुणे के फलटण लाया गया, एंबुलेंस रोके जाने की अफवाह के चलते उनके परिजन काफी आक्रोशित हो गए, जिसके बाद भारी हंगामे के बीच शव को तुरंत अस्पताल के अंदर ले जाया गया.
इस घटना के बीच यह बात पूरी तरह से स्पष्ट हो गई है कि फलटण उप-जिला अस्पताल के स्वास्थ्य अधिकारियों और कर्मचारियों पर भारी राजनीतिक दबाव है. डॉ. राजेंद्र रुपनवर और डॉ. संपत मुंडे की आत्महत्या की घटनाओं के बाद अब अस्पताल के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों ने एकजुट होकर सीधे प्रधान सचिव को एक पत्र लिखा है. सभी कर्मचारियों के हस्ताक्षर वाले इस पत्र में अस्पताल के स्टाफ पर पड़ रहे राजनीतिक दबाव की निष्पक्ष जांच करने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की गई है.
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