- धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि PM मोदी का सार्वजनिक जीवन 50 वर्षों से अधिक समय से सामाजिक सेवा में बीता
- प्रधानमंत्री मोदी का ओडिशा और भगवान जगन्नाथ के प्रति गहरा लगाव है, इसलिए वे बार-बार दर्शन के लिए आते हैं
- PM मोदी भारतीय भाषाओं के समर्थक हैं और वे अलग-अलग राज्यों की भाषाओं के शब्दों का प्रयोग करते हैं
छात्रों के आंदोलन के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने वाले धर्मेंद्र प्रधान ने पहली बार एनडीटीवी से खास बातचीत की. इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उनकी कार्यशैली और ओडिशा से उनके जुड़ाव पर विस्तार से बात की.
'पीएम मोदी ने लोगों के बीच काम किया'
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि लोग अक्सर प्रधानमंत्री मोदी के 25 साल के सार्वजनिक जीवन की बात करते हैं, लेकिन यह सिर्फ वह समय है जब वे सरकार के मुखिया रहे हैं. पहले 13 साल गुजरात के मुख्यमंत्री और पिछले 12 साल देश के प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने काम किया है. जबकि उनका सामाजिक और सार्वजनिक जीवन 50 साल से भी ज्यादा पुराना है. उन्होंने देश के अलग-अलग हिस्सों में रहकर लोगों के बीच काम किया, उन्हें समझा और उनकी सेवा की.
प्रधान ने कहा कि पीएम मोदी ने भारत, उसकी संस्कृति और लोगों की भावनाओं को बहुत करीब से समझा है. यही बात उन्हें एक अलग नेता बनाती है. उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री का ओडिशा और भगवान जगन्नाथ के प्रति विशेष लगाव रहा है और मौका मिलने पर वह हमेशा प्रभु जगन्नाथ के दर्शन के लिए आते रहे हैं.
'प्रधानमंत्री भारतीय भाषाओं के बड़े समर्थक हैं'
उड़िया भाषा में पीएम मोदी के भाषण देने पर धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि प्रधानमंत्री भारतीय भाषाओं के बड़े समर्थक हैं. उनका मानना है कि देश की सभी भाषाएं एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं. यही वजह है कि वे अलग-अलग राज्यों में वहां की भाषा के शब्दों का उपयोग करते हैं, जिससे लोगों से उनका जुड़ाव और मजबूत होता है.
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में केंद्र सरकार ने जितने बड़े और व्यापक सुधार किए हैं, उतने शायद पहले कभी नहीं हुए. उन्होंने कहा कि योजनाएं सिर्फ घोषणा बनकर न रह जाएं, बल्कि लोगों तक पहुंचें, इस पर प्रधानमंत्री विशेष ध्यान देते हैं.
'PM हर महीने करते हैं प्रगति बैठक'
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री हर महीने 'प्रगति' बैठक करते हैं, जिसमें देशभर की बड़ी परियोजनाओं की समीक्षा होती है. किसी भी योजना या प्रोजेक्ट में दिक्कत न आए, इसके लिए प्रधानमंत्री खुद अधिकारियों के साथ बैठकर निगरानी करते हैं. यही वजह है कि आज देश में विकास की रफ्तार बढ़ी है.
उज्ज्वला योजना का जिक्र करते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि जब वह इस योजना का प्रस्ताव लेकर प्रधानमंत्री के पास गए थे, तब उन्होंने पूरी तैयारी की थी. इसी दौरान 'गिव इट अप' अभियान की भी शुरुआत हुई, जिसमें संपन्न लोगों से एलपीजी सब्सिडी छोड़ने की अपील की गई.
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से भावनात्मक अपील करते हुए कहा था कि जिन्हें सब्सिडी की जरूरत नहीं है, वे इसे छोड़ दें ताकि इसका लाभ गरीब परिवारों तक पहुंचाया जा सके. प्रधानमंत्री की इस अपील का असर हुआ और करोड़ों लोगों ने अपनी गैस सब्सिडी छोड़ दी.
धर्मेंद्र प्रधान के मुताबिक, उज्ज्वला योजना और 'गिव इट अप' अभियान की सफलता इस बात का उदाहरण है कि प्रधानमंत्री मोदी योजनाओं को सिर्फ शुरू ही नहीं करते, बल्कि उन्हें जमीन पर उतारने और लोगों तक पहुंचाने पर भी पूरा जोर देते हैं.
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