- केंद्र सरकार परिसीमन बिल को संसद में फिर से लाने की तैयारी में जुटी है. इसके लिए बातचीत शुरू हो गई है.
- सरकार की कोशिश 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले इसे पास कराने की है.
- इसके प्रस्ताव में अब सभी राज्यों की लोकसभा सीटों में 50 फीसदी की बढ़ोतरी की बात कही जा रही है.
Delimitation Bill: केंद्र सरकार परिसीमन बिल को संसद में फिर से लाने की तैयारी में जुटी है. सरकार का मकसद 2029 के आम चुनाव से पहले इसे लागू करना है. कुछ दिनों पहले महिला आरक्षण वाले नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत सरकार परिसीमन बिल संसद में लेकर आई थी. लेकिन तब यह प्रस्ताव गिर गया है. अब सरकार विधेयक में यह जोड़ने को तैयार है कि हर राज्य की लोकसभा सीटें पचास प्रतिशत बढ़ाई जाएगी. इससे दक्षिण भारतीय राज्यों का विरोध कम होगा और वहां के क्षेत्रीय दलों का समर्थन मिलने की संभावना बढ़ जाएगी. साथ ही TMC में बगावत और DMK-कांग्रेस के अलग होने के बाद परिस्थितियां बदल गई है. गृह मंत्री अमित शाह ने पिछले सत्र में यह पेशकश की थी लेकिन कांग्रेस इसके लिए तैयार नहीं हुई थी.
DMK, TMC से बातचीत की कोशिश
मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों के अनुसार, सरकार ने कई क्षेत्रीय राजनीतिक दलों के साथ बातचीत शुरू कर दी है और इस मुद्दे पर व्यापक राजनीतिक सहमति बनाने की कोशिशें जारी हैं. बातचीत में शामिल दलों में द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK), तृणमूल कांग्रेस (TMC) और अन्य क्षेत्रीय राजनीतिक दल भी शामिल हैं.
सभी दलों का समर्थन मिले, सरकार की ऐसी तैयारी
सरकारी सूत्रों ने संकेत दिया कि केंद्र इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए उत्सुक है, लेकिन वह इससे जुड़ी राजनीतिक संवेदनशीलता को भी ध्यान में रख रहा है और टकराव वाले रवैये से बचना चाहता है. इसलिए, ऐसे ढांचे को विकसित करने के प्रयास किए जा रहे हैं जिसे सभी दलों का समर्थन मिल सके.
अभी 1971 की जनसंख्या के आधार पर लोकसभा में 543 सीटें
लोकसभा सीटों का वर्तमान आवंटन 1971 की जनगणना के बाद स्थिर किए गए जनसंख्या आंकड़ों पर आधारित है. लोकसभा में वर्तमान में 543 निर्वाचित सदस्य हैं. अब तक कुल चार बार परिसीमन किया गया. पहली बार 1952, फिर 1962, फिर 1973 और आखिरी बार 2002 में हुई थी. 2002 में हुए परिसीमन के अब 24 साल बीत चुके हैं. ऐसे में अब नए जनसंख्या आंकड़ों के जरिए लोकसभा की सीटें बढ़ाई जाने की तैयारी है.
17 अप्रैल को 54 वोट के अंतर से गिर गया था प्रस्ताव
17 अप्रैल को महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन बिल पर सरकार को लोकसभा में हार झेलनी पड़ी थी. संविधान संशोधन होने के कारण इस बिल को पास कराने के लिए सरकार को दो-तिहाई बहुमत की जरूरत थी. बिल के पक्ष के 298 वोट पड़े, जबकि विपक्ष में 230 वोट पड़े. इस बिल के लिए कुल 528 सांसदों ने वोट डाले, जिसका दो-तिहाई 352 होता है. लेकिन इस बिल के पक्ष में 298 वोट ही पड़े, ऐसे में यह बिल 54 वोट से गिर गया.
TMC में बगावत, डीएमके-कांग्रेस गठबंधन खत्म
अप्रैल में जब महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन बिल संसद में गिरा था, तब टीएमसी, डीएमके ने बिल के विरोध में वोट किया था. लेकिन अब बंगाल चुनाव में मिली हार के बाद TMC टूट के कगार पर है. TMC के 58 विधायक बागी बन चुके हैं. अब सूत्रों का कहना है कि पार्टी के 20 से अधिक सांसद भी बागी तेवर अपना सकते हैं.
DMK सांसदों को साथ लाने की तैयारी
दूसरी ओर तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद कांग्रेस-DMK गठबंधन टूट चुका है. यहां कांग्रेस ने रिजल्ट के बाद टीवीके को समर्थन दिया. जिसे डीएमके ने पीठ में छूरा घोंपने की बात कही थी. अब केंद्र सरकार परिसीमन के मुद्दे पर डीएमके के सांसदों को साथ लाने की तैयारी में जुटी है.
परिसीमन बिल को लेकर बन रहे तीन समीकरण



362 सदस्यों का साथ चाहिए
ऐसे में टीएमसी के 25 और डीएमके के 22 सांसदों को साथ लाने के बाद सरकार के पास 345 का संख्या बल हो जाएगा. इस बिल को पास कराने के लिए कुल 362 सदस्यों का साथ चाहिए. TMC, DMK का साथ मिलने के बाद सरकार को और 17 सदस्यों का साथ चाहिए होगा. जिसके लिए सरकार YSRCP, JMM, VCK, RLP जैसे छोटे क्षेत्रीय दलों के साथ-साथ निर्दलीय और छोटे दलों को साथ लाने की तैयारी में जुटी है. यदि ये सभी एक साथ आ गए तो सरकार के पास 362 सदस्यों का साथ हो जाएगा.
सूत्रों के अनुसार, एक बार प्रमुख हितधारकों के साथ बातचीत पूरी हो जाने और व्यापक सहमति बन जाने के बाद, सरकार संसद में परिसीमन बिल को फिर से पेश कर सकती है. ऐसा कदम कब उठाया जाएगा, यह चल रही बातचीत की प्रगति और राजनीतिक दलों के बीच बनी सहमति पर निर्भर करेगा.
जनसंख्या के आंकड़ों के आधार पर होगा परिसीमन
परिसीमन में जनसंख्या के आंकड़ों में दिख रहे जनसांख्यिकीय बदलावों के आधार पर संसदीय और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं को फिर से तय करना शामिल है. हाल के सालों में यह मुद्दा फिर से चर्चा में आया, क्योंकि कई राज्यों ने चिंता जताई है कि नए सिरे से परिसीमन की प्रक्रिया से लोकसभा में उनके प्रतिनिधित्व पर क्या असर पड़ सकता है.
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