दिल्ली में पिछले कई दिनों से जारी राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों से प्रतिदिन 400 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार प्रभावित होने का अंदेशा है, और अगर व्यापारिक सप्लाई चैन में व्यवधान दस दिन तक जारी रहे, तो संभावित नुक्सान 4,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है. देश में व्यापारियों की सबसे बड़ी संस्था कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने रविवार को ये आंकड़े जारी किये.
इस त्यौहारी सीजन के दौरान लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शनों से व्यापारी डरे हुए हैं. कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने रविवार को कहा, "दिल्ली में प्रतिदिन लगभग 2,200 करोड़ रुपये के औसत व्यापारिक कारोबार का अनुमान है, जिसके कारण राजधानी का व्यापक व्यापारिक तंत्र किसी भी व्यवधान से बुरी तरह प्रभावित हो सकता है. व्यापारिक गतिविधियों में यदि 10 प्रतिशत की गिरावट आती है, तो प्रतिदिन 220 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हो सकता है. यह आंकड़ा 15 प्रतिशत व्यवधान की स्थिति में 330 करोड़ रुपये और 20 प्रतिशत व्यवधान होने पर लगभग 440 करोड़ रुपये प्रतिदिन तक पहुंच सकता है. यदि व्यवधान इसी स्तर पर बने रहते हैं, तो दस दिनों में संभावित प्रभावित कारोबार लगभग 4,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है".
'व्यापारियों को भी व्यापार करने का अधिकार'
व्यापारी संगठनों का कहना है, यदि राजनीतिक प्रदर्शनकारियों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और प्रदर्शन का अधिकार है, तो व्यापारियों को भी व्यापार करने और आजीविका कमाने का समान अधिकार है.
खंडेलवाल के मुताबिक, "भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा अनुच्छेद 19(1)(b) के तहत शांतिपूर्वक और बिना हथियार एकत्र होने का अधिकार प्राप्त है. लेकिन, अनुच्छेद 19(1)(g) प्रत्येक नागरिक को कोई भी पेशा अपनाने अथवा व्यवसाय, व्यापार या आजीविका से जुड़ी गतिविधि संचालित करने का अधिकार प्रदान करता है, जो संविधान के तहत अनुमत उचित प्रतिबंधों के अधीन है".
छोटे व्यापारियों पर सबसे ज्यादा असर
पिछले करीब दो हफ़्तों से जारी विरोध प्रदर्शनों की वजह से दिल्ली के बड़े बाज़ारों में ट्रैफिक रेस्ट्रिक्शन और अनिश्चितता की वजह से ग्राहकों की आवाजाही में कमी आयी है, और व्यापारियों के ट्रेड की लॉजिस्टिक्स बाधित हुई है. बाजारों तक माल की सप्लाई बाधित होने की वजह से दिल्ली का व्यापारिक तंत्र प्रभावित हो रहा है.
त्योहारी और विवाह सीजन के दौरान लंबे समय तक व्यापारिक गतिविधियों में बाधा व्यापारियों के लिए काफी नुकसानदेह है. सबसे ज़्यादा असर छोटे व्यापारियों के कारोबार पर पड़ा है जो बिक्री कम होने की वजह से दुकान का किराया, कर्मचारियों का वेतन, बिजली बिल, ऋण की किस्तें और अन्य परिचालन खर्च नियमित रूप से चुकाने पड़ते हैं.
प्रदर्शनों का असर ट्रेड के साथ साथ कई तरह की सर्विसेज़ पर भी पड़ा रहा है. CAIT को मिले इनपुट के मुताबिक, परिवहन, लॉजिस्टिक्स कंपनियाँ, गोदाम, रेस्तरां, होटल, रेहड़ी-पटरी वाले और डिलीवरी सेवाएँ प्रभावित हुई हैं. इस वजह से दिल्ली की व्यापारिक अर्थव्यवस्था पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से निर्भर लाखों लोगों की आजीविका के लिए गंभीर चुनौती बनने का अंदेशा है.
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