राजनीतिक विज्ञान सोसाइटी 12–13 मार्च 2026 को नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में “राजनीतिक विज्ञान सम्मेलन 2026” का आयोजन कर रही है. एक राष्ट्रीय अकादमिक मंच के रूप में परिकल्पित यह सम्मेलन समकालीन भारत और विश्व के राजनीतिक चिंतन एवं व्यवहार के समक्ष उपस्थित महत्वपूर्ण प्रश्नों पर गंभीर संवाद के लिए विद्वानों, नीति-निर्माताओं, सार्वजनिक बुद्धिजीवियों, मीडिया प्रतिनिधियों और विद्यार्थियों को एक साथ लाने का प्रयास है. दो दिवसीय इस आयोजन में पूर्ण सत्र, विषयगत चर्चाएं और सहभागितापूर्ण संवाद आयोजित किए जाएंगे, जिनका उद्देश्य कठोर शैक्षणिक विमर्श को सार्वजनिक प्रासंगिकता से जोड़ना है.
सम्मेलन की वैचारिक रूपरेखा अनुशासनगत आत्ममंथन और उभरती वास्तविकताओं दोनों के साथ सक्रिय संवाद को प्रतिबिंबित करती है. विभिन्न सत्रों में भारत में राजनीतिक विज्ञान के उपनिवेश-मुक्तिकरण (डिकॉलोनाइजेशन) की आवश्यकता तथा विरासत में प्राप्त ज्ञान-परंपराओं की पुनर्समीक्षा पर विचार होगा; राज्य, नागरिकता और लोकतांत्रिक सहभागिता के बदलते संबंधों की पड़ताल की जाएगी; तथा यह समझने का प्रयास किया जाएगा कि अनुप्रयुक्त राजनीतिक विज्ञान किस प्रकार शोध, नीति और सार्वजनिक जीवन के बीच सेतु का कार्य कर सकता है. कार्यक्रम में डिजिटल युग पर विशेष ध्यान दिया गया है, जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सोशल मीडिया और बिग डेटा जैसे विषयों पर चर्चा के साथ-साथ वैश्विक दक्षिण और वैश्विक उत्तर के तुलनात्मक संवाद भी शामिल होंगे. मीडिया, बाजार और लोकतंत्र पर केंद्रित एक विशेष सत्र राजनीतिक प्रक्रियाओं को व्यापक सामाजिक-आर्थिक परिवर्तनों के संदर्भ में रखेगा.
सम्मेलन में अकादमिक जगत, शासन-प्रशासन और सार्वजनिक जीवन से जुड़े विशिष्ट वक्ताओं की भागीदारी होगी, जिनमें शिक्षा एवं उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार; इंडिया फाउंडेशन के अध्यक्ष श्री राम माधव; भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के पूर्व अध्यक्ष डॉ. विनय सहस्रबुद्धे; पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त श्री उदय माहुरकर; हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय, उत्तराखंड के कुलपति प्रो. श्री प्रकाश सिंह; टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान, मुंबई के कुलपति प्रो. बद्री नारायण; तथा भारतीय राजनीतिक विज्ञान संघ के महासचिव एवं पूर्व कुलपति प्रो. संजीव शर्मा शामिल हैं. उनकी उपस्थिति इस सम्मेलन की उस प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है, जो शैक्षणिक चिंतन, शासन-व्यवस्था और सार्वजनिक विमर्श के संगम पर सार्थक संवाद को आगे बढ़ाने के लिए समर्पित है.
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