दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन का मौसम खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. अब तो खुद दिल्ली पुलिस ही दिल्ली पुलिस के खिलाफ प्रदर्शन पर उतर आई है. सोमवार को करीब 150 दिल्ली पुलिसकर्मी पुलिस मुख्यालय के बाहर इकट्ठा हो गए. इसमें महिला पुलिस अधिकारी भी शामिल थीं. विरोध करने वालों में ACP मनस्वी वशिष्ठ भी थे. ये सभी शाहदरा पुलिस स्टेशन में पुलिस और वकीलों के बीच हुई झड़प के बाद दो पुलिस अधिकारियों के तबादले के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे.
प्रदर्शन कर रहे पुलिसकर्मियों की मांग थी कि दोनों अधिकारियों को उनकी पुरानी तैनाती वाली जगह पर वापस भेजा जाए. पुलिसकर्मियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार से मुलाकात की और उन्हें पांच मांगें सौंपीं. इनमें शाहदरा की घटना में शामिल वकीलों के खिलाफ कार्रवाई करना और उन वकीलों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करना शामिल था, जो "गुंडागर्दी" करते हैं.
दिल्ली पुलिस ने एक बयान में कहा कि कमिश्नर ने प्रदर्शन कर रहे पुलिसकर्मियों को भरोसा दिया कि पुलिस बल का मनोबल बढ़ाने के लिए उनकी शिकायतों पर जल्द और उचित कार्रवाई की जाएगी.
7 साल पहले भी हुआ था ऐसा विरोध प्रदर्शन
इस प्रदर्शन ने 2019 में हुए ऐसे ही एक विरोध प्रदर्शन की याद दिला दी. उस समय 2,000 से ज्यादा पुलिसकर्मी और उनके परिवार के सदस्य पुलिस मुख्यालय के बाहर इकट्ठा हुए थे. यह प्रदर्शन वकीलों द्वारा पुलिसकर्मियों पर हमले किए जाने के बाद हुआ था. इसमें तीस हजारी कोर्ट में पार्किंग को लेकर हुए विवाद से जुड़ी एक घटना भी शामिल थी. वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से प्रभावित पुलिसकर्मियों को कानूनी और मेडिकल सहायता देने का भरोसा मिलने के बाद प्रदर्शन खत्म हुआ था.
कैसे शुरू हुआ विवाद?
यह पूरा विवाद 23 अक्टूबर को शाहदरा पुलिस थाने में हुई एक घटना से जुड़ा है. इस घटना में वकील ललित बंसल के सिर में कथित तौर पर गंभीर चोट लगी थी. इसके बाद पुलिस थाने में वकीलों और पुलिसकर्मियों के बीच टकराव हुआ. इस घटना के विरोध में जिला अदालतों के वकीलों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी थी, जिसे बाद में खत्म कर दिया गया.
दिल्ली पुलिस ने 28 अक्टूबर को मनस्वी वशिष्ठ का तबादला कर दिया था. वह गांधी नगर में सब-डिविजनल पुलिस ऑफिसर के पद पर तैनात थे. उन्हें स्पेशल पुलिस यूनिट फॉर विमेन एंड चिल्ड्रन (एसपीयूडब्ल्यूएसी) में भेज दिया गया. शाहदरा पुलिस थाने के तत्कालीन एसएचओ इंस्पेक्टर अरुण कुमार का भी तबादला कर दिया गया था. उन्हें सुरक्षा यूनिट में भेजा गया.
अब क्यों विरोध कर रहे पुलिसकर्मी
सोमवार को प्रदर्शन कर रहे पुलिसकर्मियों ने हाथों में तख्तियां और पोस्टर लेकर "वर्दी का अपमान नहीं सहेंगे" के नारे लगाए. उन्होंने सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) मनस्वी वशिष्ठ और शाहदरा थाने के स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) इंस्पेक्टर अरुण कुमार को उनकी पुरानी तैनाती वाली जगह पर वापस भेजने की मांग की.
पुलिस मुख्यालय के गेट नंबर 1 के बाहर तनावपूर्ण स्थिति बन गई. नई दिल्ली के पुलिस उपायुक्त (DCP) सचिन शर्मा समेत कई सीनियर अधिकारी मौके पर पहुंचे. उन्होंने प्रदर्शन कर रहे पुलिसकर्मियों को प्रदर्शन खत्म करने के लिए समझाने की कोशिश की. सचिन शर्मा को मनस्वी वशिष्ठ से बात करते हुए देखा गया. उन्होंने कुछ पुलिसकर्मियों से अपने साथ पुलिस मुख्यालय के अंदर चलने को कहा, लेकिन पुलिसकर्मियों ने मना कर दिया. वे पुलिस कमिश्नर के साथ "संपर्क सभा" की मांग कर रहे थे.
प्रदर्शन का आह्वान दिल्ली पुलिस के व्हाट्सऐप ग्रुपों के जरिए किया गया था. इसमें तबादला किए गए अधिकारियों के समर्थन में पुलिस मुख्यालय के बाहर इकट्ठा होने की अपील की गई थी. बताया गया कि जिला डीसीपी और यूनिट प्रमुखों से यह सुनिश्चित करने को कहा गया था कि उनके कर्मचारी इस प्रदर्शन में शामिल न हों.
पत्रकारों से बात करते हुए मनस्वी वशिष्ठ ने कहा कि यह प्रदर्शन पुलिसकर्मियों की ओर से अपने आप शुरू किया गया था और वह भी इसमें शामिल हो रहे हैं. उन्होंने कहा, "हमने सीनियर अधिकारियों से अनुरोध किया है कि हमें अपनी बात रखने के लिए एक मंच दिया जाए. इस संबंध में हमने एक औपचारिक आवेदन भी दिया है. हमें भरोसा है कि सीनियर अधिकारी हमें अपनी बात रखने का मौका देंगे. हम खुलकर अपनी बात कहेंगे और इस मामले का कोई न कोई समाधान जरूर निकलेगा."
उन्होंने कहा, "हमने यह कदम इसलिए उठाया है क्योंकि पुलिस के साथ हो रही गुंडागर्दी और पुलिस थानों के अंदर पैदा हो रही सुरक्षा संबंधी समस्याओं के खिलाफ आवाज उठाना जरूरी है. कुछ लोग गुंडागर्दी कर रहे हैं. वे सिर्फ हमारे दुश्मन नहीं, बल्कि पूरे समाज के दुश्मन हैं."
उन्होंने कहा कि अगर पुलिस थाने ही सुरक्षित नहीं हैं, तो कोई भी जगह सुरक्षित नहीं हो सकती.
क्या मांगे रखी गईं?
प्रदर्शन के बाद दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने पुलिस मुख्यालय में "संपर्क सभा" की. इस दौरान उन्होंने विशेष आयुक्तों और अन्य सीनियर अधिकारियों के साथ पुलिसकर्मियों से बातचीत की और उनकी शिकायतें सुनीं. बातचीत के बाद मनस्वी वशिष्ठ के नेतृत्व में करीब सात पुलिसकर्मियों का एक छोटा प्रतिनिधिमंडल भी कमिश्नर से मिला और अपनी मांगें रखीं.
बैठक के बाद मनस्वी वशिष्ठ ने कहा, "हमने पुलिस कमिश्नर के सामने अपनी मांगें रखी हैं. उन्होंने हमें वह बैठक दी, जिसकी हमने मांग की थी. हालांकि, जैसा कि हमने उम्मीद की थी, ज्यादा लोगों को खुलकर अपनी बात रखने का मौका नहीं मिला. फिर भी हमने अपनी मांगें उन्हें बता दी हैं और उन पर चर्चा हो रही है. कुछ मामलों का आज ही समाधान होना जरूरी है. हमारी कुल पांच मांगें थीं."
पुलिसकर्मियों ने कई मांगें रखीं.
- इनमें अदालत परिसरों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और अफरा-तफरी रोकने के लिए एक ऐसी पुलिस टीम तैनात करना शामिल था, जो किसी भी विरोध या हमले का सामना कर सके.
- उन्होंने यह भी मांग की कि अगर पांच से ज्यादा वकील किसी पुलिस थाने में घुसकर गुंडागर्दी करते हैं, तो उनके खिलाफ FIR दर्ज की जाए.
- इसके अलावा, पुलिस थानों के बाहर भी पुलिसकर्मियों के साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार करने या उन्हें धमकी देने वाले वकीलों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई.
- पुलिसकर्मियों ने यह भी मांग की कि पुलिस कमिश्नर ऐसे मामलों में शामिल पाए जाने वाले वकीलों के लाइसेंस रद्द करवाना सुनिश्चित करें.
- साथ ही, शाहदरा पुलिस थाने की घटना के संबंध में वकीलों के खिलाफ दर्ज FIR में आरोपपत्र (चार्जशीट) दाखिल किया जाए.
प्रदर्शन में शामिल एक महिला पुलिस अधिकारी ने वकीलों की ओर से पुलिसकर्मियों पर बनाए जा रहे कथित दबाव पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि पुलिस बल से अनुशासन बनाए रखने की उम्मीद की जाती है, लेकिन यही नियम दूसरों पर भी लागू होना चाहिए.
उन्होंने कहा, "हम हमेशा अनुशासन में रहेंगे, लेकिन सामने वाले व्यक्ति को भी अनुशासन में रहना चाहिए. क्या हम यहां सिर्फ वकीलों की मदद करने के लिए हैं? वे वीआईपी जैसी सुविधा चाहते हैं और जांच से बचना चाहते हैं. वे हड़ताल के जरिए हम पर दबाव बनाते हैं. जब हम नियमों के मुताबिक काम कर रहे हैं, तो हमें धमकियां क्यों मिल रही हैं?"
दिल्ली पुलिस की तरफ से क्या कहा गया?
संपर्क सभा के बाद जारी बयान में दिल्ली पुलिस ने कहा कि कमिश्नर और सीनियर अधिकारियों ने अलग-अलग रैंक के पुलिसकर्मियों की शिकायतों और चिंताओं को धैर्यपूर्वक सुना. बयान के मुताबिक, पुलिसकर्मियों ने पुलिस बल की गरिमा, वर्दी के सम्मान और अपनी शिकायतों को दूर करने के लिए एक व्यवस्थित व्यवस्था बनाने से जुड़े मुद्दे उठाए.
बयान में कहा गया, "पुलिस कमिश्नर ने पुलिस बल के पेशेवर रवैये, प्रतिबद्धता और अनुशासन की सराहना की. खास तौर पर कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारियों को शानदार तरीके से निभाने और ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए पुलिसकर्मियों की तारीफ की."
बयान में आगे कहा गया कि कमिश्नर ने पुलिसकर्मियों को भरोसा दिया कि उनकी जायज चिंताओं को दूर करने और पुलिस बल का मनोबल बढ़ाने के लिए जल्द और उचित कार्रवाई की जाएगी. यह कार्रवाई एक व्यवस्थित तरीके से की जाएगी.
दिल्ली पुलिस ने यह भी बताया कि अलग-अलग बार एसोसिएशन और बार काउंसिल ऑफ दिल्ली के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में एक संयुक्त समन्वय समिति बनाने का फैसला लिया गया है. यह समिति जिला स्तर और पुलिस मुख्यालय, दोनों जगह काम करेगी. इसका उद्देश्य पुलिसकर्मियों के सरकारी कामकाज के दौरान सामने आने वाली समस्याओं को दूर करना होगा.
बयान में कहा गया कि प्रमोशन, मॉडिफाइड एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (एमएसीपी), आवास और नौकरी से जुड़े दूसरे मुद्दों पर भी उचित ध्यान दिया जाएगा. इसके अलावा, सभी जिला और यूनिट प्रमुखों को नियमित रूप से संपर्क सभाएं करने, अलग-अलग रैंक के पुलिसकर्मियों से सीधे बातचीत करने और उनकी शिकायतों को दूर करने के लिए तय समय के भीतर जरूरी कदम उठाने का निर्देश दिया गया है.
(इनपुट- एएनआई)
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