दिल्ली पुलिस ने महिलाओं के खिलाफ अपराध के एक गंभीर मामले में विदेश भाग चुके एक आरोपी को भारत वापस लाने में सफलता हासिल की है. सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट पुलिस की टीम ने इंटरपोल, सीबीआई, गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के सहयोग से रेप के आरोपी को संयुक्त अरब अमीरात के अबू धाबी से प्रत्यर्पित कर भारत लाया है. आरोपी की पहचान 38 वर्षीय सजीर पल्ली मूप्पन उर्फ सजीर पीएम के रूप में हुई है. वह केरल के कन्नूर का रहने वाला है और जॉयअलुक्कास कंपनी में सीनियर मैनेजर के पद पर कार्यरत था. दिल्ली पुलिस के मुताबिक, आरोपी पर 20 वर्षीय युवती को नशीला पदार्थ और शराब पिलाकर उसके साथ जबरन यौन संबंध बनाने का आरोप है.
आरोप है कि वारदात के बाद अपनी पहचान छिपाने के लिए आरोपी ने होटल में चेक-इन करते समय किसी तीसरे व्यक्ति के पहचान पत्र का इस्तेमाल किया था. इस मामले में 18 फरवरी 2026 को एफआईआर दर्ज की गई थी. हालांकि, आरोपी इससे पहले 5 जनवरी 2026 को भारत छोड़कर UAE भाग चुका था. उसके खिलाफ 7 जुलाई 2026 को इंटरपोल के माध्यम से रेड कॉर्नर नोटिस जारी कराया गया. लगातार कानूनी कार्रवाई और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय के बाद 4 नवंबर 2026 को UAE अधिकारियों ने आरोपी को दिल्ली पुलिस के हवाले कर दिया.
1 अक्टूबर 2025 को दिल्ली के होटल में किया था रेप
दिल्ली पुलिस के अनुसार, इस मामले की शुरुआत 1 अक्टूबर 2025 की रात हुई थी. पंजाबी बाग स्थित एक लाउंज में कंपनी कर्मचारियों की ओर से जन्मदिन की पार्टी आयोजित की गई थी, जिसमें 20 वर्षीय शिकायतकर्ता युवती भी शामिल हुई थी. आरोप है कि इसी पार्टी में कंपनी में मैनेजर पद पर कार्यरत सजीर पल्ली मूप्पन ने युवती को शराब और नशीले पदार्थों का सेवन कराया. इसके बाद आरोपी युवती को करोल बाग क्षेत्र के एक होटल में ले गया. शिकायत के अनुसार, 2 अक्टूबर 2025 की सुबह आरोपी ने युवती के साथ रेप किया. पुलिस के मुताबिक, होटल में कमरा बुक कराते समय आरोपी ने युवती की वास्तविक पहचान छिपाने के लिए किसी अन्य व्यक्ति के पहचान संबंधी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया था. जांच के दौरान पुलिस ने होटल रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेज भी जुटाए. वारदात के बाद पीड़िता ने सबसे पहले कंपनी प्रबंधन के समक्ष अपनी शिकायत रखी. 4 अक्टूबर 2025 को कंपनी ने आरोपी को कारण बताओ नोटिस जारी किया और POSH (कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम) कानून के तहत अपनी आंतरिक समिति के माध्यम से जांच शुरू की. हालांकि आरोपी इस जांच में शामिल नहीं हुआ.
केस दर्ज होने के बाद दुबई भाग गया था आरोपी
पुलिस के अनुसार, आरोपी को आशंका हो गई थी कि उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है. इसके बाद उसने 4 अक्टूबर 2025 से कंपनी आना बंद कर दिया और कथित तौर पर देश छोड़कर भागने की तैयारी शुरू कर दी. 18 दिसंबर 2025 को पीड़िता ने कंपनी अधिकारियों को ईमेल के जरिए दोबारा औपचारिक शिकायत भेजी. इस बीच आरोपी ने अपने यात्रा संबंधी दस्तावेज तैयार किए और 5 जनवरी 2026 को भारत छोड़कर UAE चला गया. वहां उसने दुबई में प्लंबिंग से जुड़े सामान की एक दुकान पर काम करना शुरू कर दिया. बाद में करोल बाग थाने में उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64(1), 123, 319 और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया गया.
एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की. पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया गया और कानूनी प्रक्रिया के तहत उसका बयान दर्ज किया गया. पुलिस ने पंजाबी बाग के लाउंज और करोल बाग के होटल से भी अहम सबूत जुटाए. जांच के दौरान होटल रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, पहचान संबंधी दस्तावेज और अन्य तकनीकी साक्ष्य एकत्र किए गए, ताकि घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ा जा सके.
शुरुआत में करोल बाग थाने की पुलिस टीम ने आरोपी की तलाश में दिल्ली और केरल में कई स्थानों पर छापेमारी की. पुलिस की एक टीम केरल भी पहुंची, लेकिन वहां पता चला कि वह पहले ही देश छोड़ चुका है. तकनीकी जांच में सामने आया कि आरोपी 5 जनवरी 2026 को UAE पहुंच गया था. आरोपी के विदेश भागने के बाद दिल्ली पुलिस ने उसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तलाश शुरू की. 30 अप्रैल 2026 को सीबीआई के माध्यम से BHARATPOL प्लेटफॉर्म पर इंटरपोल को संदर्भ भेजा गया. इसके बाद आरोपी की लोकेशन और विदेश में उसकी मौजूदगी का पता लगाने के लिए एक विशेष टीम बनाई गई, जिसमें SI संदीप और SI काजल त्यागी को शामिल किया गया. टीम ने आरोपी के खिलाफ आवश्यक दस्तावेज तैयार किए और सीबीआई समेत अन्य एजेंसियों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा.
दिल्ली पुलिस की लगातार कोशिशों के बाद आरोपी की लोकेशन UAE में पता चली. इसके बाद उसके खिलाफ कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया. प्रोक्लेम्ड ऑफेंडर की कार्रवाई पूरी होने के बाद 7 जुलाई 2026 को इंटरपोल के जरिए रेड कॉर्नर नोटिस जारी कराया गया. नोटिस जारी होने के बाद आरोपी की तलाश अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेज कर दी गई. इस पूरी कार्रवाई में दिल्ली पुलिस ने सीबीआई, इंटरपोल, गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन सहित कई एजेंसियों के साथ समन्वय किया.
इस मामले में दिल्ली पुलिस ने BHARATPOL प्लेटफॉर्म का भी इस्तेमाल किया. BHARATPOL, सीबीआई द्वारा विकसित एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसके माध्यम से भारत की विभिन्न जांच और कानून प्रवर्तन एजेंसियां इंटरपोल से संपर्क कर सकती हैं. यह प्लेटफॉर्म विदेशों में छिपे आरोपियों की जानकारी जुटाने, अंतरराष्ट्रीय पुलिस सहयोग प्राप्त करने और इंटरपोल नोटिस जारी कराने जैसी प्रक्रियाओं में मदद करता है.
दिल्ली पुलिस ने इसी प्लेटफॉर्म के जरिए अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ आवश्यक जानकारी और दस्तावेज साझा किए. आरोपी को भारत वापस लाने के लिए कानूनी प्रक्रिया लगातार आगे बढ़ाई गई. सीबीआई, इंटरपोल, गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और UAE की संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय किया गया. दिल्ली पुलिस के अनुसार, सभी जरूरी कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद 9 अक्टूबर 2026 को अबू धाबी की सक्षम प्राधिकरण ने भारत के प्रत्यर्पण अनुरोध को मंजूरी दे दी.
इसके बाद आरोपी को भारत लाने के लिए तीन पुलिस अधिकारियों की विशेष टीम गठित की गई. इस टीम में इंस्पेक्टर कपिल खोखर, सब-इंस्पेक्टर काजल त्यागी और सब-इंस्पेक्टर संदीप शामिल थे. यह टीम 31 अक्टूबर 2026 को UAE रवाना हुई. UAE पहुंचने के बाद पुलिस टीम ने प्रत्यर्पण से संबंधित शेष कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी कीं. इसके बाद 4 नवंबर 2026 को UAE अधिकारियों ने आरोपी सजीर पल्ली मूप्पन उर्फ सजीर पीएम को औपचारिक रूप से दिल्ली पुलिस के हवाले कर दिया. इसके बाद उसे भारत लाया गया. अब आरोपी के खिलाफ भारतीय कानून के तहत आगे की कार्रवाई की जा रही है और उसे अदालत में अपने खिलाफ लगे आरोपों का सामना करना होगा.
इस पूरे ऑपरेशन में दिल्ली पुलिस की सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट टीम की अहम भूमिका रही. प्रत्यर्पण की कार्रवाई में इंस्पेक्टर कपिल खोखर, SI संदीप, SI काजल त्यागी, ASI अरविंद, हेड कांस्टेबल रणवीर, कांस्टेबल अनमोल और कांस्टेबल पंकज शामिल रहे. पूरी कार्रवाई करोल बाग एसएचओ और एसीपी की निगरानी में हुई, जबकि सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट के डीसीपी रोहित राजबीर सिंह के मार्गदर्शन में टीम ने लगातार काम किया.
दिल्ली पुलिस के स्पेशल कमिश्नर देवेश चंद्र श्रीवास्तव के मुताबिक, महिलाओं के खिलाफ गंभीर अपराध करने वाले आरोपियों को कानून के दायरे में लाना पुलिस की प्राथमिकता है. पुलिस का कहना है कि कोई आरोपी देश में हो या विदेश भाग जाए, उसे वापस लाने के लिए सभी कानूनी रास्ते अपनाए जाएंगे. इस मामले में खास बात यह है कि वारदात के बाद आरोपी देश छोड़कर भाग गया था, लेकिन दिल्ली पुलिस ने केरल से UAE तक उसका पीछा किया. सीबीआई, इंटरपोल, गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के सहयोग से करीब 10 महीने चली कानूनी और अंतरराष्ट्रीय प्रक्रिया के बाद उसे भारत वापस लाया गया. अब उसे भारतीय अदालत में अपने खिलाफ लगे आरोपों का सामना करना होगा.
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