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दिल्ली BMW कांड: वित्त मंत्रालय के अधिकारी की मौत का क्या है सच? चार्जशीट में चौंकाने वाले खुलासे

BMW कार की स्पीड रिपोर्ट कंपनी से ली गई है. साथ ही FSL से तकनीकी जांच भी कराई जा रही है ताकि हादसे के वक्त की वास्तविक रफ्तार पता चल सके. चार्जशीट में यह भी आरोप है कि  आरोपी महिला ने मामूली चोटों के बावजूद खुद को ICU में भर्ती कराया.

दिल्ली BMW कांड: वित्त मंत्रालय के अधिकारी की मौत का क्या है सच? चार्जशीट में चौंकाने वाले खुलासे
वित्त मंत्रालय के उप-सचिव नवजोत सिंह
  • पुलिस ने वित्त मंत्रालय के उप सचिव नवजोत की मौत मामले में चार्जशीट में लापरवाही और साजिश के संकेत दिए हैं.
  • चार्जशीट में 400 पन्ने और 34 गवाह शामिल किए गए हैं, जिसमें और गवाह जोड़े जाने की संभावना है.
  • नवजोत सिंह को अस्पताल पहुंचाने में देरी हुई, जिससे ट्रॉमा के गोल्डन आवर का फायदा नहीं मिल सका.
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नई दिल्ली:

दिल्ली में हुए चर्चित BMW एक्सीडेंट मामले में अब दिल्ली पुलिस की चार्जशीट सामने आ गई है. चार्जशीट में ऐसे कई गंभीर खुलासे हुए हैं, जो पूरे मामले को सिर्फ हादसा नहीं, बल्कि लापरवाही और साजिश की दिशा में ले जाते हैं. इस मामले में मृतक नवजोत सिंह, जो कि वित्त मंत्रालय में डिप्टी सेक्रेटरी के पद पर तैनात थे, उनकी मौत को लेकर पुलिस ने BNS की धारा 281, 125(b), 105 और 238(a) के तहत चार्जशीट दाखिल की है.
 

400 पन्नों की चार्जशीट, 34 गवाह

दिल्ली पुलिस ने करीब 400 से ज़्यादा पन्नों की चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की है. इसमें 34 गवाह शामिल किए गए हैं, जबकि पुलिस का कहना है कि सप्लीमेंट्री चार्जशीट में और गवाह जोड़े जा सकते हैं. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक हादसे के बाद नवजोत सिंह कम से कम 15 मिनट तक जीवित थे.  पुलिस के मुताबिक, अगर समय पर इलाज मिलता तो जान बच सकती थी. सवाल है क्या जानबूझकर इलाज में देरी की गई? गोल्डन आवर' क्यों गंवाया गया?

चार्जशीट में बताया गया है कि दिल्ली कैंट अस्पताल और AIIMS ट्रॉमा सेंटर घटनास्थल से सिर्फ 10–15 मिनट की दूरी पर थे. लेकिन घायल को ले जाया गया न्यूलाइफ अस्पताल, GTB नगर, जो करीब 20 किलोमीटर दूर है. अस्पताल पहुंचने में 23 मिनट लगे. पुलिस का कहना है कि इसी देरी के चलते ट्रॉमा के गोल्डन आवर का फायदा नहीं मिल पाया और पीड़ित की जान चली गई.

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न्यूलाइफ अस्पताल पर भी सवाल

चार्जशीट में न्यूलाइफ अस्पताल को लेकर भी गंभीर बातें कही गई हैं. अस्पताल को छोटा, दो मंज़िला नर्सिंग होम बताया गया. है. सीमित मेडिकल सुविधाएं होने का जिक्र है. आरोप है कि अस्पताल से आरोपी पक्ष के दूर के पारिवारिक संबंध हैं. पुलिस के मुताबिक एम्बुलेंस कुछ ही मिनटों में मौके पर पहुंच गई थी. एम्बुलेंस में पैरामेडिक मौजूद था. लेकिन आरोपी पक्ष ने एम्बुलेंस सेवा लेने से इनकार कर दिया. एम्बुलेंस चालक और उसके सहायक के बयान BNSS की धारा 180 के तहत दर्ज किए गए हैं. मौके पर मौजूद DTC बस चालक का बयान भी चार्जशीट का हिस्सा है, जिससे पुलिस को घटनाक्रम की कड़ी जोड़ने में मदद मिली.

स्पीड को लेकर तकनीकी जांच

BMW कार की स्पीड रिपोर्ट कंपनी से ली गई है. साथ ही FSL से तकनीकी जांच भी कराई जा रही है ताकि हादसे के वक्त की वास्तविक रफ्तार पता चल सके. चार्जशीट में यह भी आरोप है कि  आरोपी महिला ने मामूली चोटों के बावजूद खुद को ICU में भर्ती कराया. इससे जांच को गुमराह करने की कोशिश की गई. मेडिकल रिकॉर्ड में हेरफेर की आशंका भी जताई गई है. हालांकि, इसकी जांच अभी जारी है.

दिल्ली पुलिस का कहना है कि यह सिर्फ सड़क हादसा नहीं, बल्कि जानबूझकर इलाज में देरी,गलत अस्पताल ले जाना और सबूत प्रभावित करने की कोशिश का मामला है. अब यह देखना अहम होगा कि कोर्ट इस चार्जशीट पर क्या रुख अपनाती है.

कहां और कब हुआ था हादसा?

दिल्ली के धौला कुआं में सितंबर में हुए बीएमडब्लू हादसे को कौन भूल सकता है. इस हादसे में बाइक सवार वित्त मंत्रालय के उप-सचिव नवजोत सिंह की दर्दनाक मौत हो गई थी, जबकि उनकी पत्नी गंभीर रूप से घायल हुई थीं. कोर्ट में आरोपी गगनप्रीत कौर ने दावा किया था कि उसकी लग्जरी कार ने बाइक को पीछे से टक्कर नहीं मारी थी. हादसा अचानक सामने आए अवरोध की वजह से हुआ था. उसकी कार पहले फुटपाथ से टकराकर पलटी और बाद में बाइक से जा भिड़ी.

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