- सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने संजय राउत और निखिल वागले के खिलाफ आपराधिक अवमानना याचिका दाखिल की है.
- पत्रकार निखिल वागले ने सोशल मीडिया पर मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की थी, जो विवाद का कारण बनी.
- संजय राउत ने न्यायाधीशों पर गलत आरोप लगाए और विपक्षी नेताओं से मुलाकात न होने की घटना पर टिप्पणी की थी.
शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट के राज्यसभा सांसद संजय राउत और पत्रकार निखिल वागले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की गई है. याचिका में पत्रकार निखिल वागले और राज्यसभा सांसद संजय राउत पर सुप्रीम कोर्ट की गंभीर आपराधिक अवमानना करने का आरोप लगाया गया है. दोनों पर सख्त कार्रवाई की मांग की गई है. सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने अटार्नी जनरल आर वेंकटरमनी की सहमति के बाद यह याचिका दाखिल की है.
पत्रकार निखिल वागले ने एक्स पर किया था पोस्ट
याचिकाकर्ता SCBA के अनुसार, निखिल वागले ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने अकाउंट @waglenikhil से मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी पोस्ट की. यह टिप्पणी उस खबर के संदर्भ में की गई थी, जिसमें CJI द्वारा राजनीतिक दलों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात करने से इनकार किए जाने का उल्लेख था.
याचिका में आरोप लगाया गया है कि विपक्षी दलों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात नहीं किए जाने के बाद संजय राउत ने जानबूझकर मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ अपमानजनक और भ्रामक आरोप लगाए.
विपक्षी नेताओं से सीजेआई ने नहीं की थी मुलाकात
ये टिप्पणियां 12 अक्टूबर 2026 को की गईं. याचिका के मुताबिक, राउत ने आरोप लगाया था कि न्यायाधीश सत्तारूढ़ दल के राजनीतिक कार्यक्रमों में शामिल होते हैं और मुख्यमंत्रियों की ओर से आयोजित रात्रिभोज में हिस्सा लेते हैं. उन्होंने लंदन में राजनीतिक हस्तियों के साथ न्यायाधीशों के बैडमिंटन खेलने की तस्वीरों का भी उल्लेख किया और CJI सहित अन्य न्यायाधीशों पर आरोप लगाए.
सुप्रीम कोर्ट की प्रतिष्ठा को कम करने वाले बयान
SCBA का दावा है कि ये बयान झूठे हैं और रिकॉर्ड के विपरीत हैं. आरोप है कि इन्हें जानबूझकर सुप्रीम कोर्ट की प्रतिष्ठा और प्राधिकार को कम करने के उद्देश्य से दिया गया. इस संबंध में याचिका में दिल्ली हाईकोर्ट के 19 जून 2026 के आदेश का हवाला दिया गया है. याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट की गरिमा और प्राधिकार न्याय प्रशासन में जनता के विश्वास तथा कानून के शासन को बनाए रखने के लिए आवश्यक हैं.
इसलिए अदालत को कथित तौर पर जानबूझकर की गई इन अपमानजनक टिप्पणियों के लिए दोनों प्रतिवादियों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई करनी चाहिए. अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने 15 अक्टूबर को इस कार्रवाई के लिए अपनी सहमति दी थी.
AG बोले- बेहद अपमानजनक थी टिप्पणी
अपने सहमति पत्र में, AG ने कहा कि वागले की पोस्ट "न केवल अपमानजनक थी, बल्कि निश्चित रूप से बहुत निचले स्तर की भी थी." उन्होंने यह भी कहा कि जजों के BJP कार्यक्रमों में शामिल होने के बारे में राउत के दावे "किसी भी तथ्य पर आधारित नहीं हैं. उन्होंने इन दोनों बातों को निंदनीय करार दिया, जिसका उद्देश्य "भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय और विशेष रूप से भारत के मुख्य न्यायाधीश की प्रतिष्ठा को कम करना था.
इसी घटनाक्रम के तहत, वागले ने अब वह पोस्ट हटा दी है और 15 अक्टूबर को AG को लिखे एक पत्र में, मुख्य न्यायाधीश (CJI) और सर्वोच्च न्यायालय से बिना शर्त माफी मांगी है.
सुप्रीम कोर्ट ने दो-टूक कहा, सफाई दीजिए वरना लिस्ट से हटा देंगे
दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और INDI ब्लॉक के 12 अन्य नेताओं की याचिका पर भारत निर्वाचन आयोग (ECI) और तीनों चुनाव आयुक्तों को नोटिस जारी किया हो लेकिन इनमें से एक नेता और याचिकाकर्ता पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की.
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने नोटिस जारी करते हुए कहा कि नोटिस जारी करने का अर्थ एक याचिकाकर्ता के आचरण को माफ करना नहीं है. अदालत ने कहा कि वह उनका पक्ष सुनने के बाद इस मुद्दे पर विचार करेगी.
संजय राउत की टिप्पणी से सर्वोच्च अदालत नाराज
अदालत ने स्पष्ट किया कि इस नेता की ओर से जारी नोटिस फिलहाल अंतरिम है और अगली सुनवाई में उनके स्पष्टीकरण के अधीन रहेगा. अगर उनकी सफाई से संतुष्ट नहीं हुए तो राहुल गांधी व विपक्षी नेताओं की याचिका से बतौर याचिकाकर्ता डिलीट कर देंगे. जानकारों के मुताबिक पीठ ने ये इशारा उद्धव ठाकरे गुट के राज्यसभा सांसद संजय राउत के लिए किया है.
संजय राउत ने क्या कहा था?
राउत ने पत्रकारों से कहा था कि संविधान की रक्षा करना मुख्य न्यायाधीश की जिम्मेदारी है, लेकिन वह विपक्षी नेताओं से मिलने को तैयार नहीं हैं. उन्होंने आरोप लगाया था कि वोटों की चोरी, चुनावी धोखाधड़ी और मतदाता सूचियों से लाखों नाम हटाए जाने की शिकायतों के बीच विपक्ष अपनी बात रखना चाहता था, लेकिन उसे मिलने का समय नहीं दिया गया
उन्होंने इस घटनाक्रम को देश के संविधान और लोकतंत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा था कि लोग मुख्य न्यायाधीश के इस फैसले को याद रखेंगे. यह याचिका उस घटनाक्रम के बाद दाखिल की गई, जब CJI ने संकेत दिया था कि विपक्षी नेताओं की चिंताओं को अदालत के प्रमुख से मुलाकात के बजाय उचित न्यायिक कार्यवाही के माध्यम से उठाया जा सकता है.
राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं की ओर से वकील एस. प्रसन्ना के माध्यम से दाखिल इस याचिका में निर्वाचन आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी को प्रतिवादी बनाया गया है.
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