विज्ञापन

कर्नाटक को लेकर कांग्रेस आलाकमान जल्द बुला सकता है बैठक,  कैसे सुलझेगा कुर्सी का पेंच? 

कांग्रेस के कुल चार मुख्यमंत्रियों में से सिद्धारमैया को छोड़ बाक़ी तीन अगड़ी जाति से हैं. राहुल गांधी जिस तरह सामाजिक न्याय की सियासत पर बल दे रहे हैं ऐसे में संभावना कम है कि पिछड़ी जाति से आने वाले सिद्धारमैया को उसकी मर्जी के बिना सीएम पद से हटा दिया जाए.

कर्नाटक को लेकर कांग्रेस आलाकमान जल्द बुला सकता है बैठक,  कैसे सुलझेगा कुर्सी का पेंच? 
कर्नाटक में कांग्रेस के अंदर फिर शुरू हुई सियासत
NDTV
  • कांग्रेस आलाकमान मई के अंत तक कर्नाटक से जुड़े सभी मामलों को सुलझाने के लिए बड़ी बैठक बुला सकता है
  • मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को दिल्ली तलब कर आगामी रणनीति पर चर्चा की जाएगी
  • कैबिनेट फेरबदल के लिए सिद्धारमैया लगभग छह महीने से पार्टी नेतृत्व की अनुमति का इंतजार कर रहे हैं
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।

कर्नाटक को लेकर कांग्रेस आलाकमान मई के आखिरी हफ्ते में बड़ी बैठक बुला सकता है. बुधवार को सिद्धारमैया सरकार के तीन साल पूरे हो चुके हैं. कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक कर्नाटक से जुड़े सारे मामलों को मई ख़त्म होने से पहले सुलझा लिया जाएगा. इसको लेकर जल्द सीएम सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार को दिल्ली तलब किया जा सकता है.सीएम सिद्धारमैया करीब छह महीने से कैबिनेट में फेरबदल के लिए पार्टी नेतृत्व की हरी झंडी मिलने का इंतजार कर रहे हैं. वहीं, उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की नज़र मुख्यमंत्री की कुर्सी पर है. गृह मंत्री जी परमेश्वर को भी सीएम पद की रेस में माना जा रहा है. 

क्या है ढाई-ढाई का फार्मूला

पिछले साल नवंबर में जब सिद्धरामैया सरकार को ढाई साल पूरे हुए तब कथित ढाई-ढाई साल के फार्मूले के आधार पर डीके शिवकुमार ने सीएम पद को लेकर दबाव बनाना शुरू किया. हालांकि तब कांग्रेस नेतृत्व ने दखल देकर गुटबाजी पर लगाम लगाई. सीएम पद नहीं मिला तो डीके ने कैबिनेट में फेरबदल भी नहीं होने दिया. तब सूत्रों ने दावा किया कि कर्नाटक का फैसला केरल, तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद होगा. 

जाहिर है मंथन का समय आ चुका है. एक तरफ सरकार को तीन साल पूरे हो चुके हैं. दूसरी तरफ जून में कर्नाटक से राज्यसभा की तीन सीटें खाली हो रही हैं जिनमें एक कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की सीट भी है. इसके अलावा अगले दो महीने में कर्नाटक विधान परिषद की करीब नौ सीटें भी कांग्रेस के खाते में आने वाली हैं. सारे फैसले दिल्ली से ही होने हैं. 

लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या कांग्रेस कर्नाटक में सीएम बदलने को लेकर चर्चा करेगी? सूत्रों के मुताबिक इसकी संभावना कम है. सूत्रों का कहना है कि बढ़ती उम्र की वजह से सिद्धारमैया की अगुवाई में कांग्रेस अगला विधानसभा चुनाव नहीं लड़ना चाहती जो 79 साल के हो चुके हैं. लेकिन पिछड़ी, दलित जाति और जनजातियों के बीच लोकप्रिय सिद्धारमैया को बड़ी संख्या में विधायकों का समर्थन भी हासिल है. 

जाति का भी समीकरण समझ लीजिए

कांग्रेस के कुल चार मुख्यमंत्रियों में से सिद्धारमैया को छोड़ बाक़ी तीन अगड़ी जाति से हैं. राहुल गांधी जिस तरह सामाजिक न्याय की सियासत पर बल दे रहे हैं ऐसे में संभावना कम है कि पिछड़ी जाति से आने वाले सिद्धारमैया को उसकी मर्जी के बिना सीएम पद से हटा दिया जाए. ऐसे में देखना होगा कि अगड़ी जाति से आने वाले डीके शिवकुमार को कैसे मनाया जाता है जिनका कैम्प दावा करता है कि मई 2023 में सरकार गठन के समय उन्हें ढाई-ढाई साल के रोटेशन यानी आधे कार्यकाल के लिए सीएम पद का भरोसा दिया गया था. 

दलित समाज से आने वाले गृहमंत्री जी परमेश्वर के समर्थक सीएम बनाने की मांग करते रहते हैं. कर्नाटक में आज तक कोई दलित सीएम नहीं बना है.सीएम पद के पेंच की वजह से ही कैबिनेट में फेरबदल का मामला छह महीने से अटका हुआ है. सूत्र दावा कर रहे हैं कि सिद्धारमैया सरकार में आधे से ज़्यादा मंत्री बदले जाएंगे. कैबिनेट में फेरबदल की माँग को लेकर कुछ हफ़्ते पहले कर्नाटक से क़रीब एक दर्जन विधायकों ने दिल्ली में डेरा डाला था. सूत्रों के मुताबिक पहले कांग्रेस अध्यक्ष खरगे, संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और प्रभारी रणदीप सुरजेवाला सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार से मुलाकात करेंगे. आख़िरी फ़ैसला राहुल गांधी को करना है. केरल के बाद उनके सामने एक और सियासी पेंच सुलझाने की ज़िम्मेदारी है. इस बार वो इसे आगे नहीं टाल सकते.

यह भी पढ़ें: केरलम की 'कलह' सुलझी, कर्नाटक में क्या होगा? कांग्रेस हाईकमान के माथे पर टेंशन!

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com