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कर्नाटक में डीके शिवकुमार सरकार बनते ही आई मुसीबत, मंत्री रामालिंगा रेड्डी ने दिया इस्तीफा

डीके शिवकुमार सरकार में मंत्री रामालिंगा रेड्डी ने पद से इस्तीफा देते हुए इसके पीछे की बड़ी वजह बताई है. उन्होंने बताया कि डीके ने उनसे क्या वादा किया और क्या थमा दिया.

कर्नाटक में डीके शिवकुमार सरकार बनते ही आई मुसीबत, मंत्री रामालिंगा रेड्डी ने दिया इस्तीफा
  • कर्नाटक में डीके शिवकुमार सरकार शपथ ग्रहण के एक हफ्ते के भीतर ही मुसीबत में घिर गई है
  • डीके शिवकुमार सरकार मे मंत्री बनाए गए रामालिंगा रेड्डी ने इस्तीफा दे दिया है
  • बेंगलुरु का मंत्रालय देने का वादा किया गया था लेकिन सिंचाई मंत्रालय दे दिया, जिससे वह नाराज थे

कर्नाटक में डीके शिवकुमार सरकार शपथ ग्रहण के एक हफ्ते के भीतर ही मुसीबत में घिर गई है. सरकार में मंत्री बनाए गए रामालिंगा रेड्डी ने इस्तीफा दे दिया है. दरअसल उनको डीके सरकार में सिंचाई मंत्री बनाया गया था, जिससे वह खुश नहीं थे. जिस वजह से उन्होंने पद छोड़ने का फैसला लिया. रेड्डी के इस्तीफे पर सीएम डीके शिवकुमार का भी बयान आ गया है. उन्होंने मंत्री को अपना करीबी दोस्त बताया है. सीएम ने कहा कि चिंता की कोई बात नहीं है. हम सभी समस्या का समाधान कर लेंगे. 

रामलिंगा रेड्डी के इस्तीफे की वजह 

रामलिंगा रेड्डी ने अपने इस्तीफे लिखा, " मुझे कोई और मंत्रालय देने का वादा किया गया था. सिद्धारमैया के नेतृत्व में बायराथी सुरेश ने फोन कर मुझसे  बेंगलुरु का मंत्रालय देने की बात कही थी. उन्होंने अपनी मर्जी से यह मंत्रालय देने की बात कही थी. लेकिन जब मंत्रालय का ऐलान हुआ तो मुझे परिवहन मंत्रालय दे दिया. इसलिए मैंने उनसे दोबारा बात की. वहीं डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री बनने से पहले मेरे घर आए और मुझसे बात की. उन्होंने मुझे बताया कि वे मुझे बेंगलुरु का मंत्रालय देंगे. मैंने हां कह दिया. लेकिन मैंने उनसे ये नहीं मांगा था. डीके ने खुद अपनी मर्जी से मुझे ये मंत्रालय सौंपने की बात कही थी. शिवकुमार ने मुझसे दो बार बेंगलुरु विकास मंत्रालय देने की बात कही. लेकिन दे दिया सिंचाई मंत्रालय. इसलिए मैं मंत्री पद से इस्तीफा दे रहा हूं."

रामलिंगा रेड्डी के शपथ ग्रहण की तस्वीर

रामलिंगा रेड्डी के शपथ ग्रहण की तस्वीर

अब बेंगलुरु का मंत्रालय मिला तो भी नहीं लूंगा

रामलिंगा रेड्डी का कहना है कि वह खुद जाकर इस्तीफा नहीं देना चाहते. इसीलिए वे एसीएस तुषार गिरिनाथ या किसी और के जरिए इसे भिजवा रहे है. रेड्डी ने ये भी साफ किया कि उनको सिद्धारमैया, डीके शिवकुमार, खर्गे या हाई कमांड से कोई शिकायत नहीं है. अगर अब उनको अब बेंगलुरु का प्रभार मिलता है तो भी वे इसे स्वीकार नहीं करेंगे.

डीके शिवकुमार और उनके मंत्रियों ने 3 जून को ली थी शपथ

कर्नाटक की सियासत में लंबे इंतजार के बाद 3 जून को कांग्रेस के दिग्गज नेता डीके शिवकुमार ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी. बेंगलुरु के लोक भवन में हुए समारोह में उनके साथ ही 12 से ज्यादा मंत्रियों ने पद की शपथ ली थी. लेकिन तीन दिन के भीतर ही एक मंत्री ने इस्तीफा भी दे दिया है. ये पहले ही कहा जा रहा था कि तीन साल के इंतजार के बाद डीके को कर्नाटक की कुर्सी भले ही मिल गई हो लेकिन उनकी राहत आसान नहीं होगी. पहली मुसीबत इतनी जल्दी आएगी ये तो डीके ने भी नहीं सोचा होगा. 

ये भी पढ़ें- डीके शिवकुमार को सीएम की कुर्सी भले ही मिल गई हो लेकिन 'पतंग' की डोर तो कहीं और है

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