महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ी हलचल के संकेत मिल रहे हैं. सूबे के वरिष्ठ और कद्दावर नेता शरद पवार और डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के बीच मुलाकात ने महाराष्ट्र के सियासी गलियारों में अटकलों के बाजार को बेहद गर्म कर दिया है. इस एक मुलाकात ने महाविकास आघाड़ी के भीतर असहजता और दरार पैदा कर दी है, जिसके बाद करीबियों और सहयोगियों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं. इस पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने NDTV से बातचीत में एक बेहद चौंकाने वाला बयान दिया है.
चव्हाण ने दावा किया है कि सरकार के कुछ बड़े नेताओं ने उन्हें खुद यह जानकारी दी है कि शरद पवार की पार्टी को तोड़ने सांसदों को तोड़ने की अंदरखाने एक बड़ी तैयारी चल रही है.पृथ्वीराज चव्हाण ने NDTV से बात करते हुए साफ किया कि पवार और एकनाथ शिंदे की यह मुलाकात पहले से प्रस्तावित थी, यह कोई अचानक मुलाकात नहीं हुई. उन्होंने कहा कि जिस तरह से शॉल और गुलदस्ते से स्वागत किया गया, उससे पता चलता है कि मुलाकात पहले से तय थी. इसके बावजूद मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए इस मुलाकात के समय पर सवाल उठ रहे हैं.
उद्धव ठाकरे की शिवसेना के नेता संजय राउत और कांग्रेस समेत महाविकास आघाड़ी के कई नेताओं ने इस मुलाकात को 'गलत' बताते हुए इस पर कड़ी आपत्ति जताई है. NDTV से बात करते हुए चव्हाण ने अंदरूनी सूत्रों के हवाले से कहा को मुझे सरकार के बेहद शीर्ष स्तर से यह संकेत मिले हैं कि विपक्ष के खासकर शरद पवार की पार्टी और कांग्रेस के कुछ सांसदों से संपर्क साधा जा रहा है. उन्हें तोड़ने की कोशिशें की जा रही हैं.
अघाड़ी की अंदरूनी खींचतान आई सामने
इस मुलाकात के बाद से ही एमवीए के भीतर अविश्वास की दरारें साफ दिखने लगी हैं. एक तरफ जहां गठबंधन के नेता इसे राजनीतिक रूप से गलत संदेश देने वाली मुलाकात बता रहे हैं. वहीं दूसरी तरफ शरद पवार के करीबियों और पार्टी प्रवक्ताओं की ओर से इसे महज एक औपचारिक या प्रशासनिक शिष्टाचार भेंट बताया जा रहा है. हालांकि विपक्ष के इस कड़े विरोध और बयानों पर पलटवार करते हुए उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी तंज कसा है. शिंदे ने विरोधियों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि इस सामान्य मुलाकात से जिन लोगों के पेट में दर्द हो रहा है, उन्हें इलाज की जरूरत है. चव्हाण ने यह भी कहा की 2014 से पहले का देश का माहौल अलग था. तब भी पक्ष विपक्ष के लोग मिलते थे. उन्होंने कहा की बाजपेय सरकार के दौरान भी मुलाकातें होती थीं, लेकिन मौजूदा वक्त में अब हमारे देश में राजनीति पूरी तरह से बदल गई है.
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