- राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में ट्रस्ट के दो सदस्यों ने इस्तीफा दिया और चंपत राय विवाद में घिरे हैं
- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यूपी चुनाव से पहले हिंदुत्व को मुख्य मुद्दा बनाकर राजनीतिक रणनीति तैयार की है
- योगी आदित्यनाथ ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एसआईटी जांच कराने और दोषियों को सजा देने का आदेश दिया है
राम मंदिर के चढ़ावे की चोरी का मामला इन दिनों गरमाया हुआ है. इस मामले में ट्रस्ट के दो लोगों का इस्तीफा हुआ है और चंपत राय जैसी शख्सियत निशाने पर है. इस मामले ने संघ परिवार से लेकर भाजपा तक को परेशान किया है, लेकिन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इससे इतर यूपी चुनाव की टोन सेट करने में जुटे हैं. उन्होंने गुरुवार को सपा राज में बांदा में कब्रिस्तान की चारदीवारी वाला मुद्दा उठा दिया तो वहीं शुक्रवार को अयोध्या में हनुमानगढ़ी में नमाज वाला 23 साल पुराना प्रकरण याद दिला दिया. इस तरह उत्तर प्रदेश के चुनाव से पहले वह अपने ही अंदाज में हिंदुत्व को फ्रंटलाइन का मुद्दा बनाने में जुटे हैं.
सीएम योगी आदित्यनाथ राम मंदिर में चढ़ावा चोरी विवाद में भी बैकफुट पर कभी नहीं दिखे. एसआईटी की जांच कराने का ऐलान करते हुए उन्होंने दोषियों को सजा दिए जाने की बात कही तो वहीं विपक्ष पर भी हमला बोला और कहा कि राम मंदिर के ही खिलाफ रहे लोग आज आस्था की बात करने लगे हैं. इस तरह योगी आदित्यनाथ राम मंदिर मसले पर भी आक्रामक जवाब ही दे रहे हैं. अब अपने अंदाज वाले उग्र हिंदुत्व को वह फिर से आगे बढ़ा रहे हैं. संघ परिवार और भाजपा हिंदुत्व की बात करते रहे हैं और राम मंदिर आंदोलन के बाद से ही वैचारिक और राजनीतिक फायदा मिला है. लेकिन योगी आदित्यनाथ की अपनी एक अलग छवि इनसे इतर है.
हिंदुत्व का चेहरा और सुरक्षा वाला नैरेटिव, कैसे अपनी छवि योगी ने गढ़ी
भगवा वेश में रहने वाले और गोरक्षपीठ के महंत के तौर पर योगी आदित्यनाथ खुद हिंदुत्व का चेहरा हैं. इसके अलावा बुलडोजर पॉलिटिक्स तो पूरे देश में ही एक मॉडल के तौर पर उभरी है. इससे इतर सुरक्षा को लेकर उन्होंने काफी मेहनत की है. पश्चिम उत्तर प्रदेश के कैराना से लेकर पूर्वी उत्तर प्रदेश के गोरखपुर, गाजीपुर और मऊ तक उन्होंने यह छवि स्थापित करने का प्रयास किया है कि यदि कोई अपराध करता है तो बचना मुश्किल होगा. एनकाउंटर, हाफ एनकाउंटर और बुलडोजर ऐक्शन जैसी चीजों ने कानून-व्यवस्था को लेकर उनकी छवि स्थापित की है. इसके अलावा हिंदुत्व तो उनकी मूल पहचान ही है.
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राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद में बैकफुट पर नहीं दिखे सीएम योगी
अब योगी आदित्यनाथ ने जो तेवर अपनाया है, उसके पीछे माना जा रहा है कि वह बैकफुट पर नहीं दिखना चाहते. इसके अलावा राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद की आंच भी उनसे दूर ही रही है. ऐसे में योगी आदित्यनाथ यदि अपने ही तेवरों में आ गए हैं. यही नहीं ये मुद्दे 2017 और 2022 के चुनाव में भी विनिंग फॉर्मूला थे. यहां तक कि पीएम नरेंद्र मोदी ने भी कब्रिस्तानों वाली बात की थी. अब यदि योगी आदित्यनाथ फिर से उन मुद्दों को उठा रहे हैं तो साफ है कि वह अपने विनिंग फॉर्मूले से पीछे हटने के मूड में नहीं हैं.
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