- तसलीमा नसरीन ने कहा कि बांग्लादेश में पिछली दो सरकारों के दौरान वे बंगाल नहीं आ सकीं, अब तीसरी सरकार आई है
- उन्होंने मदरसा शिक्षा को गैर-जरूरी बताते हुए कहा कि इससे केवल जिहादी पैदा होते हैं.
- नसरीन ने बांग्लादेश में हिंदू महिलाओं के अधिकारों की कमी और 1956 के हिंदू एक्ट को लागू करने की जरूरत है
तसलीमा नसरीन ने कोलकाता में रविवार को मीडिया से बात की. उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में दो सरकारें ऐसी रहीं, जिनके दौर में मैं बंगाल नहीं आ सकी. अब यहां तीसरी सरकार है और बदलाव आया है तो मुझे भी एंट्री मिली है. इसके अलावा तसलीमा नसरीन ने बांग्लादेश के हालात पर भी खुलकर बात की. एक तरफ उन्होंने मदरसा शिक्षा को गैर-जरूरी बताया और कहा कि यहां से सिर्फ जिहादी ही पैदा होते हैं. वहीं दूसरी तरफ बांग्लादेश में हिंदुओं की हालत खराब होने की भी बात कही. बांग्लादेशी मूल की लेखिका ने कहा कि वहां हिंदू महिलाओं के पास कोई अधिकार नहीं हैं. उनके पास उत्तराधिकार को लेकर भी अधिकार नहीं हैं.
उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में 1956 के हिंदू एक्ट को लागू किए जाने की जरूरत है. इसके अलावा उन्होंने यूनिफॉर्म सिविल कोड की भी बात कही. तसलीमा ने कहा कि हम एक देश, एक कानून की बात करते हैं. महिलाओं के लिए भी एक कानून होना चाहिए और उन्हें अहमियत मिलनी चाहिए.उन्होंने कहा कि बांग्लादेश और पाकिस्तान में भी ऐसे नियम होने चाहिए. उन्होंने कहा कि यदि बांग्लादेश में यूसीसी जैसा कानून हुआ तो महिलाओं को ज्यादा अधिकार मिलेंगे. इस दौरान उन्होंने बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार की बात भी की. उन्होंने कहा कि बेगम खालिदा जिया और मोहम्मद युनूस के दौर में ऐसा ही हुआ है.
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इस दौरान उनसे किसी पत्रकार ने मदरसा शिक्षा को लेकर सवाल किया तो उन्होंने कहा कि मुझे इसकी जरूरत ही नहीं है. तसलीमा ने कहा कि यहां से सिर्फ जिहादी ही पैदा होते हैं. सभी मदरसों को सेकुलर स्कूलों में तब्दील कर देना चाहिए. तसलीमा नसरीन ने बांग्लादेश के मौजूदा हालात को लेकर भी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि वहां से अब भी खुले विचारों वाले लोग पलायन कर रहे हैं.
कोलकाता आने पर बोलीं- बदलाव हुआ तो मुझे भी मौका मिला
तसलीमा नसरीन ने 19 साल बाद खुद के कोलकाता पहुंचने पर भी बात की और भाजपा सरकार को इसका क्रेडिट दिया. उन्होंने कहा कि पहली सरकार ऐसी थी, जिसके दौर में मुझे बंगाल निकाला दिया गया. सरकार फिर से बदली, लेकिन मुझे बंगाल में एंट्री नहीं मिली. अब तीसरी सरकार आई है और बदलाव हुआ है. इसी बदलाव के दौर में मुझे भी कोलकाता आने का मौका मिला है.
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