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ज्ञानेश कुमार ने इस्तीफा नहीं दिया तो CJP का आंदोलन गांधी जयंती से, इस शहर से होगा शुरू

कॉकरोच जनता पार्टी ने गुरुवार को ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के लिए 48 घंटे की समय सीमा तय की थी. आज सीजेपी प्रमुख अभिजीत दीपके ने ऐसा न होने पर आंदोलन शुरू करने की तारीख भी बता दी है.

ज्ञानेश कुमार ने इस्तीफा नहीं दिया तो CJP का आंदोलन गांधी जयंती से, इस शहर से होगा शुरू
नई दिल्ली:

कॉकरोच जनता पार्टी ने इस्तीफा देने के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को 48 घंटे का समय दिया है.सीजेपी के प्रमुख अभिजीत दीपके ने कहा है कि अगर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने इस दौरान इस्तीफा नहीं दिया तो उनकी पार्टी दो अक्तूबर से मुंबई में राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू करेगी. उनका कहना है कि इस आंदोलन को देश के दूसरे शहरों में भी ले जाया जाएगा. उन्होंने कहा है कि आइए इस गांधी जयंती पर लोकतंत्र को बचाने की शपथ लें. 

अभिजीत दीपके ने कहा क्या है

गांधी जयंती पर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ आंदोलन शुरू करने की घोषणा सीजेपी प्रमुख अभिजीत दीपके ने शुक्रवार को को किए एक ट्विट के जरिए की. इससे पहले गुरुवार को सीजेपी नेताओं ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर 'जंतर-मंतर 2.0' नाम से बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा. सीजेपी ने आरोप लगाया था कि ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में चुनाव आयोग की गरिमा घटी है और मतदाताओं के अधिकार कमजोर किए गए हैं. \

सीजेपी नेताओं ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपनी तीन मांगें रखी थीं. उनकी मांग है कि ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें और उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाया जाए और इस बात की जांच की जाए कि उन्हें आदेश कौन दे रहा था. विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को रोका जाए, एसआईआर की पूरी प्रक्रिया की जांच के लिए आयोग का गठन किया जाए और सुप्रीम कोर्ट एसआईआर से जुड़ी सभी फाइलों को अपने कब्जे में ले और जनवरी 2025 की वोटर लिस्ट को ही बहाल किया जाए. चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर 2023 में बने कानून को निरस्त किया जाए. सीजेपी ने चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी से भी अपनी दर्ज आपत्तियों पर सार्वजनिक रूप से सफाई देने और आपत्तियों से जुड़े नोट्स और उन पर दिए गए जवाब सार्वजनिक करने की अपील की थी. 

चुनाव आयोग पर क्या आरोप लग रहे हैं

दरअसल यह पूरा मामला अंग्रेजी अखबार 'इंडियन एक्सप्रेस' की एक खबर के सामने आने के बाद शुरू हुआ. अखबार ने 23 अक्टूबर को खबर दी कि चुनाव आयोग में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है.अखबार ने अपनी जांच-पड़ताल के बाद कहा कि तीन चुनाव आयुक्तों में एक राय नहीं है.खबर के मुताबिक चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीने में कम से कम 14 बार रिकॉर्ड पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थीं. लेकिन उनकी आपत्तियों को दरकिनार कर फैसले लिए गए. अखबार की खबर के मुताबिक ये आपत्तियां एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर थीं. अखबार का दावा है कि गोवा के 97 मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट में दोबारा जुड़वाने के लिए वहां के चुनाव अधिकारी ने सात दिन में आठ ईमेल किए, लेकिन उन मतदाताओं के नाम अब तक दर्ज नहीं किए गए हैं. चुनाव आयोग ने अखबार की ओर से उठाई गई आपत्तियों को अभी तक खारिज नहीं किया है. 

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