कॉकरोच जनता पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे की मांग की है. सीजेपी ने उन्हें इस्तीफा देने के लिए 48 घंटे का समय दिया है. उसका कहना है कि अगर मुख्य चुनाव आयुक्त ने इस्तीफा नहीं दिया तो देशभर में आंदोलन शुरू किया जाएगा.सीजेपी ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर 'जंतर-मंतर 2.0' नाम से बड़ा प्रदर्शन करने की भी चेतावनी दी है. सीजेपी ने कहा है कि ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में चुनाव आयोग की गरिमा घटी है और मतदाताओं के अधिकार कमजोर किए गए हैं.
ज्ञानेश कुमार पर सीजेपी ने क्या कहा है
सीजेपी के राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दिपके,सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका ने गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इसमें उन्होंने कहा ,''अगर ज्ञानेश कुमार 48 घंटे में इस्तीफा नहीं देते हैं, तो हम दिल्ली में प्रदर्शन से पहले देशभर में आंदोलन करेंगे.'' उन्होंने कहा कि अगर ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं तो 'जंतर-मंतर 2.0' जरूर होगा.'' नीट पेपर लीक के खिलाफ सीजेपी के आंदोलन के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को 25 जुलाई को इस्तीफा देना पड़ा था. इससे सीजेपी के हौंसले बुलंद हैं.
सीजेपी नेताओं ने अपने प्रेस कॉन्फ्रेंस में तीन मांगें की हैं. ये हैं- ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें और उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाया जाए और इस बात की जांच की जाए कि उन्हें आदेश कौन दे रहा था. विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को रोका जाए, एसआईआर की पूरी प्रक्रिया की जांच के लिए आयोग का गठन किया जाए और सुप्रीम कोर्ट एसआईआर से जुड़ी सभी फाइलों को अपने कब्जे में ले और जनवरी 2025 की वोटर लिस्ट को ही बहाल किया जाए. चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर 2023 में बने कानून को निरस्त किया जाए.इसके साथ ही सीजेपी ने चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी से भी अपनी दर्ज आपत्तियों पर सार्वजनिक रूप से सफाई देने की अपील की है. पार्टी ने कहा कि चुनाव आयोग को दोनों आयुक्तों की आपत्तियों से जुड़े नोट्स और उन पर दिए गए जवाब सार्वजनिक करने चाहिए.
इसके साथ ही सीजेपी ने अपनी बेवसाइट पर एक ऑनलाइन हस्ताक्षर अभियान शुरू किया है. सीजेपी ने चुनाव आयोग ठीक करो नाम से एक अभियान शुरू करने की घोषणा की है.इस पार्टी का कहना है कि विशेष एसआईआर के दौरान 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की प्रारंभिक मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से ज्यादा नाम हटाए गए हैं. सीजेपी इसे अपने अभियान का मुख्य मुद्दा बनाएगी.

कौन तय करेगा वोटर लिस्ट के नाम
अभिजीत दिपके ने कहा है,''लोकतंत्र का मतलब है कि जनता अपनी सरकार चुनती है. यह लोकतंत्र नहीं, बल्कि तानाशाही है.'' उन्होंने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार एक ऐसी व्यवस्था लेकर आए हैं, जिसमें आयोग तय कर रहा है कि किसका नाम वोटर लिस्ट में रहेगा और किसका नहीं. उन्होंने कहा कि जब लाखों लोगों के नाम प्रारंभिक मतदाता सूची से हट सकते हैं, तो चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है कि वह बताए कि हर नाम हटाने का फैसला कानून के अनुसार, पारदर्शी तरीके से और उचित समीक्षा की व्यवस्था के साथ किया गया है.
दरअसल यह पूरा मामला अंग्रेजी अखबार 'इंडियन एक्सप्रेस' की एक खबर के सामने आने के बाद शुरू हुआ. अखबार ने 23 अक्टूबर को खबर दी कि चुनाव आयोग में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है.अखबार ने अपनी जांच-पड़ताल के बाद कहा कि तीन चुनाव आयुक्तों में एक राय नहीं है.खबर के मुताबिक चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीने में कम से कम 14 बार रिकॉर्ड पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थीं. लेकिन उनकी आपत्तियों को दरकिनार कर फैसले लिए गए. अखबार की खबर के मुताबिक ये आपत्तियां एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर थीं. अखबार का दावा है कि गोवा के 97 मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट में दोबारा जुड़वाने के लिए वहां के चुनाव अधिकारी ने सात दिन में आठ ईमेल किए, लेकिन उन मतदाताओं के नाम अब तक दर्ज नहीं किए गए हैं.
चुनाव आयोग ने इस खबर को खारिज तो नहीं किया. लेकिन चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों को प्रक्रिया का हिस्सा बताया. आयोग ने एक बयान में कहा कि किसी भी संस्था में अलग-अलग राय और टिप्पणियां होना सामान्य बात है. अंतिम फैसला लेने से पहले लिखित नोट्स, टिप्पणियां, तकनीकी सुझाव और आंतरिक जांच-पड़ताल निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं. आयोग का कहना था कि दोनों चुनाव आयुक्तों के सुझाव चुनाव प्रक्रिया को और बेहतर बनाने के लिए थे. लेकिन आयोग ने इस बात की जानकारी नहीं दी है कि दोनों आयुक्तों की ओर से दर्ज कराई गई आपत्तियों पर क्या कार्रवाई की गई.
कैसे बनी कॉकरोच जनता पार्टी
देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की एक मौखिक टिप्पणी के बाद अभीजीत दीपिके ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' के नाम से एक बेवसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर पेज बनाए थे. देखते ही देखते ही इन पेजों को करोड़ों लोगों ने फॉलो करना शुरू कर दिया. इसके बा कॉकरोच जनता पार्टी ने मेडिकल कॉलेज में दाखिले की प्रवेश परीक्षा नीट के पेपर लीक की घटनाओं के खिलाफ आंदोलन शुरू कर दिया.दिल्ली के जंतर-मंतर पर इसके नेताओं ने धरना दिया. इसे देश-विदेश से व्यापक समर्थन मिला. इस आंदोलन के आगे झुकते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा था.
प्रधान के इस्तीफे से कॉकरोच जनता पार्टी का हौसला बढ़ा. इसके नेताओं ने देश में स्कूलों और अस्पतालों की ऑडिट शुरू की. इसे भी व्यापक समर्थन मिल रहा है. हालांकि राजस्थान के जयपुर के पास एक स्कूल के निरीक्षण के दौरान लोगों ने कॉकरोच जनता पार्टी नेता आशुतोष रांका और उनके साथियों से मारपीट भी की. अब चुनाव आयोग पर लगे आरोपों ने कॉकरोच जनता पार्टी को अपने पैर जमाने का मौका दे दिया है. इसलिए उसके नेता चुनाव आयोग में सुधार की मांग कर रहे हैं.
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