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Gen-Z के बाद जेन अल्फा को जोड़ने की तैयारी? अभिजीत दीपके ने छेड़ा स्कूल ठीक करो कैंपेन, उठाई एक बड़ी मांग

कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने महाराष्ट्र के हिंगोली जिले स्थित अपने पैतृक गांव से आज स्कूल ठीक करो अभियान की शुरुआत की. इस अभियान में देश भर के स्कूलों के लिए आवाज बुलंद की जाएगी.

Gen-Z के बाद जेन अल्फा को जोड़ने की तैयारी? अभिजीत दीपके ने छेड़ा स्कूल ठीक करो कैंपेन, उठाई एक बड़ी मांग
अपने गांव के स्कूल में बच्चों के साथ अभिजीत दीपके, टूटी खिड़की पर डिप्टी सीएम का बैनर दिखाते दीपके.
सोशल मीडिया
  • स्वतंत्रता दिवस के मौके पर अभिजीत दीपके ने महाराष्ट्र से देशव्यापी 'स्कूल ठीक करो' अभियान की शुरुआत की.
  • उन्होंने सरकारी स्कूलों की खराब स्थिति, पानी और बेंचों की कमी समेत बुनियादी सुविधाओं की समस्या उजागर की.
  • अभियान के तहत चेकलिस्ट फॉर्म के माध्यम से पूरे देश के स्कूलों की स्थिति का डेटा एकत्र किया जाएगा.
हिंगोली (महाराष्ट्र):

NEET पेपर लीक के खिलाफ Gen Z प्रदर्शन के दम पर पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा लेने वाले अभिजीत दीपके अब जेन अल्फा को जोड़ने की तैयारी में जुट गए हैं. शनिवार को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने जेन अल्फा की समस्याओं को एंड्रेस करते हुए एक बड़ा देशव्यापी अभियान लॉन्च किया है. इस अभियान का नाम है- स्कूल ठीक करो. इस अभियान के जरिए देश भर के स्कूलों की व्यवस्था में व्यापत खामियों पर आवाज बुलंद की जाने की तैयारी है. 

अपने पैतृक गांव से स्कूल ठीक करो अभियान की शुरुआत

दरअसल शनिवार को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने महाराष्ट्र के हिंगोली जिले स्थित अपने पैतृक गांव से ‘स्कूल ठीक करो' अभियान की शुरुआत की. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की उपेक्षा के कारण गरीब छात्रों को नुकसान उठाना पड़ रहा है. उन्होंने प्राइवेट स्कूलों की फीस पर सीमा निर्धारित करने की मांग की. उन्होंने यह भी कहा कि सार्वजनिक अस्पतालों की बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी जल्द एक आंदोलन चलाया जाएगा.

'आजादी के 80 साल बाद भी स्कूल में पानी नहीं, कैसे विकसित होगा देश'

दरअसल स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दीपके अपने पैतृक गांव संतुक पिंपरी पहुंचे और ध्वजारोहण समारोह में हिस्सा लिया. इसके बाद उन्होंने एक जिला परिषद स्कूल का दौरा किया, जहां उन्हें शौचालयों में पानी की व्यवस्था नहीं मिली. उन्होंने कहा, “आजादी के 80 साल बाद भी अगर सरकारी स्कूलों में पानी जैसी बुनियादी सुविधा नहीं है, तो देश कैसे विकसित होगा?”

चेकलिस्ट फॉर्म से देश भर के स्कूलों से लिया जाएगा डेटा

दीपके ने स्कूल की जर्जर स्थिति पर भी सवाल उठाए. उन्होंने दावा किया कि स्कूल की खिड़कियां टूटी हुई हैं और छात्रों के लिए पर्याप्त बेंच नहीं हैं. उन्होंने कहा कि CJP ने एक चेकलिस्ट फॉर्म तैयार किया है, जिसके माध्यम से महाराष्ट्र और देशभर के स्कूलों में उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं का डेटा एकत्र किया जाएगा और बाद में उसका संकलन किया जाएगा.

  • मालूम हो कि Gen-Z उन लोगों का कहा जाता है, जिनका जन्म 1997 से 2012 के बीच हुआ है, जो इंटरनेट और सोशल मीडिया के शुरुआती दौर में बड़े हुए हैं.
  • वहीं जेन अल्फा (Gen Alpha) का जन्म वर्ष 2013 से 2025 के बीच हुआ है, जो पूरी तरह से स्मार्टफोन, टैबलेट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में पैदा हुए और पल रहे हैं.
  • जाहिर है अभी स्कूलों में पढ़ रहे बच्चे इसी कैटगरी के हैं.

10 साल में 94000 से अधिक स्कूल बंद किए गए

उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने शिक्षा बजट में कटौती की है और सरकारी स्कूलों को बंद कर निजी स्कूलों को फायदा पहुंचाया जा रहा है. दीपके के अनुसार, पिछले 10 सालों में देशभर में 94,000 से अधिक सरकारी स्कूल बंद किए गए हैं. उन्होंने सवाल किया, “जब और अधिक स्कूल खोले जाने चाहिए, तब स्कूल बंद करके देश को कैसे मजबूत बनाया जा सकता है?”

दीपके बोले- छात्र वीडियो बनाकर बता रहे व्यवस्था में कमी

दीपके ने कहा कि यदि सरकारी स्कूलों में पढ़कर बच्चे सफल होंगे तो निजी स्कूलों में कौन जाएगा. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों को समान अवसर उपलब्ध कराने में विफल रही है. उनका कहना था कि कई छात्र वीडियो बनाकर बता रहे हैं कि स्कूल तक पहुंचने के लिए ठीक सड़कें भी उपलब्ध नहीं हैं, जो सरकारी व्यवस्था की विफलता को दर्शाता है.

स्कूल की टूटी खिड़की को डिप्टी सीएम शिंदे के बैनर से ढका

निरीक्षण के दौरान दीपके ने यह भी दावा किया कि उनके गांव के स्कूल का शौचालय उनके पहुंचने से ठीक पहले साफ किया गया था. उन्होंने कहा कि स्कूल की टूटी खिड़कियों को उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बैनरों से ढका गया है, जिसे उन्होंने “व्यवस्था पर व्यंग्य” बताया. उन्होंने कहा कि स्कूल में केवल चार बेंच हैं, जबकि छात्रों की संख्या उससे कहीं अधिक है.

अस्पताल की खराब स्थिति को लेकर होगा आंदोलन

दीपके ने घोषणा की कि सीजेपी जल्द ही सरकारी अस्पतालों की खराब स्थिति को लेकर भी आंदोलन शुरू करेगी. उन्होंने आरोप लगाया कि सार्वजनिक अस्पतालों में मरीजों को फर्श पर सोना पड़ता है, सर्जरी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है और सीटी स्कैन के लिए एक सप्ताह तक प्रतीक्षा करनी पड़ती है.

प्राइवेट स्कूल की भारी-भरकम फीस पर भी दीपके का वार

दीपके ने निजी स्कूलों की फीस पर नियंत्रण लगाने की मांग दोहराते हुए कहा कि लोग अपने बच्चों की शिक्षा के लिए 1 से 1.5 लाख रुपये तक फीस दे रहे हैं. “ऐसे में गरीब बच्चों को शिक्षा कैसे मिलेगी? इसलिए निजी स्कूलों की फीस पर सीमा तय की जानी चाहिए.” 

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