Supreme Court on Rahul Gandhi: कांग्रेस नेता राहुल गांधी के सुप्रीम कोर्ट मार्च पर सुप्रीम कोर्ट में आज चर्चा हुई जिस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि न्यायपालिका को कोई डरा-धमका नहीं सकता. इस तरह के प्रयास बेहद कमजोर हैं और इन पर कोई ध्यान नहीं देता.उन्होंने कहा कि हम वास्तविक दुनिया से कटकर नहीं बैठे हैं. हमें हर चीज की जानकारी है.वरिष्ठ वकील गौरव भाटिया ने सुप्रीम कोर्ट परिसर में राजनीतिक जुलूस निकाले जाने पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि यह अस्वीकार्य है.उन्होंने इसे न्यायपालिका को डराने-धमकाने और उस पर दबाव बनाने की कोशिश करार दिया.इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि कोई भी न्यायपालिका को डरा-धमका नहीं सकता. विरोध प्रदर्शन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा आदेश भी दिया है कि सभी कानूनी एजेंसियों को सीसीटीवी और सारा डिजीटल रिकॉर्ड संरक्षित रखने का आदेश दिया है. सुप्रीम कोर्ट परिसर का भी रिकॉर्ड रखें. प्राइवेट पार्टी भी पुलिस को मेटेरियर दे.
SG तुषार मेहता बोले- हमने कोई माफी नहीं मांगी
बता दें कि आज सुप्रीम कोर्ट में CJP प्रदर्शन मामले की सुनवाई हुई. CJI सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच में ये सुनवाई हुई. SG तुषार मेहता कहा कि मैं मेरिट से अलग कुछ कहना चाहता हूं.इंटरनेट बंद करने को लेकर कोर्ट ने अवमानना का नोटिस जारी किया, हमने जवाब दिया. अवमानना में ऐसे ही बिना शर्त माफी मांगी जाती है. हमने भी लिखा है, जिस पर मीडिया और सोशल रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार ने माफी मांगी है. तुषार मेहता बोले- हमने कोई माफी नहीं मांगी, मीडिया और सोशल मीडिया में चल रही खबरों को स्पष्ट करना चाहता हूं.जब भी अदालत की अवमानना के नोटिस पर जवाब दाखिल किया जाता है तो आमतौर पर माफी मांगने के बाद उसके कारण बताए जाते हैं. मीडिया और सोशल मीडिया में यह सब चल रहा है. इन खबरों के मद्देनजर हम स्थिति स्पष्ट करना चाहते हैं.
जंतर-मंतर प्रोटेस्ट साइट को लेकर पहले सरकार का जवाब देखेंगे- SC
जंतर मंतर को लेकर एसजी तुषार मेहता ने कहा कि प्रोटेस्ट साइट के तौर पर जंतर मंतर को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर नहीं हटाया गया . एक कमेटी ने सुझाव दिया था. दरअसल, जंतर मंतर को प्रदर्शन स्थल से सूची से हटाने के दिल्ली पुलिस के आदेश के खिलाफ याचिका पर SC ने नोटिस जारी किया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम सरकार का पहले जवाब देखेंगे. अगर संतुष्ट नहीं हुए तो कानून अपना काम करेगा. जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि कोर्ट इस बात की जांच करेगा कि जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में हटाने का फैसला उचित विचार-विमर्श के बाद लिया गया था या नहीं. BNS 163 की वैधता और पुलिस के प्रिवेंटिव डिटेंशन पर भी नोटिस जारी किया गया है.
महिला पत्रकार के आरोप गंभीर- सुप्रीम कोर्ट
एसजी ने कहा कि जिस भी व्यक्ति के हाथ में मोबाइल है, वो पत्रकार ही समझा जाता है. इंदिरा जयसिंह, जिनके साथ घटना हुई वो इनडिपेंडेंट पत्रकार हैं.प्रोटेस्ट साइट पर पता नहीं लगता कि कौन पत्रकार है कौन रील मेकर. SC ने कहा कि महिला पत्रकार ने जो आरोप लगाए हैं वो गंभीर हैं.इस मामले की जांच जल्द पूरी की जाए. SG मेहता ने कहा कि यह पता लगाना मुश्किल है कि प्रदर्शन स्थल पर कौन रील मेकर है, कौन जर्नलिस्ट. इस बात पर कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए कि किसी भी महिला के साथ अभद्रता नहीं होनी चाहिए. इनमें महिला पुलिसकर्मी भी शामिल है.
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