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This Article is From Aug 17, 2020

पुलिस ने एड्स पीड़ित बच्चियों को आश्रम से निकाला, महिला वकील की पिटाई की; देखें VIDEO

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में एड्स पीड़ित बच्चियों के आश्रम 'अपना घर' खाली कराया गया, कथित रूप से रिश्वत न देने की सजा मिली आश्रम संचालक को

पुलिस ने एड्स पीड़ित बच्चियों को आश्रम से निकाला, महिला वकील की पिटाई की; देखें VIDEO
बिलासपुर में एड्स पीड़ित लड़कियों को आश्रम से निकाल दिया गया.
रायपुर:

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर (Bilaspur) में अमेरी स्थित एड्स पीड़ित (HIV positive) बच्चियों के आश्रम 'अपना घर' को सोमवार को दोपहर में खाली करवा लिया गया. संचालकों का आरोप है कि इस कार्रवाई के दौरान बच्चियों को बल प्रयोग करके निकाला गया और पुलिस की गाड़ी में भरकर अलग जगह पर पहुंचा दिया गया. इनकी पैरवी करने वाली हाईकोर्ट की वकील प्रियंका शुक्ला के साथ भी कथित तौर पर मारपीट की गई और उनके कपड़े खींचे गए. हालांकि पुलिस का आरोप है कि महिला वकील ने ही उनके साथ मारपीट की कोशिश की.
       
सोमवार को सुबह करीब 11 बजे पुलिस की टीम के साथ महिला बाल विकास विभाग के बिलासपुर और अन्य जिलों से 15-16 अधिकारी पुलिस बल से साथ आश्रम पहुंचे. वहां मौजूद लोगों और स्टाफ का कहना है कि वे सीधे आश्रम के भीतर घुसे. फरमान दिया कि आदेश के मुताबिक सभी बच्चों को कलेक्टर के आदेश पर बाहर निकालकर ले जाना है. स्टाफ ने ऑर्डर दिखाने के लिए कहा. 'अपना घर' आश्रम की अधीक्षिका दीपिका सिंह के मुताबिक एक कागज उन्हें लहराकर दिखाया गया पर उन्हें आदेश की कॉपी नहीं दी गई. सभी बच्चों से कहा गया कि बाहर निकलें. बच्चे निकलने के लिए तैयार नहीं हुए तो बल प्रयोग शुरू हो गया.
     
हालांकि बिलासपुर के पुलिस अधीक्षक प्रशांत अग्रवाल ने कहा कि आश्रम के लोगों ने न सिर्फ सरकारी काम में बाधा पहुंचाने की कोशिश की बल्कि खुद महिला वकील प्रियंका शुक्ला ने पुलिस वालों के साथ मारपीट की कोशिश की. इसकी वजह से उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है.

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दरअसल अपना घर में 14 बच्चियां रहती हैं जो एड्स पीड़ित हैं. इन बच्चियों को अलग-अलग जिलों से बाल संरक्षण समितियों ने भी यहां भेजा है. बच्चियों का कहना है कि कहीं उनकी देखभाल ठीक से नहीं होती थी तो कहीं भेदभाव होता था. सालों से इन बच्चियों के लिए यही घर अपना है. खाना-पीना, रहना-खेलना, पढ़ना सब यहीं होता है. संस्था के संचालकों का कहना है कि दिक्कत तब से शुरू हुई जब अनुदान के लिए महिला बाल विकास विभाग में उन्होंने आवेदन लगाया, जहां उनसे अनुदान के एवज में 30 प्रतिशत रिश्वत मांगी गई.

     
संस्था के संचालक संजीव ठक्कर ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा कि हमने सरकार से अनुदान मांगा जिसके ऐवज में रिश्वत मांगी गई. हमसे कहा गया कि 30 परसेंट रिश्वत देना होगी. हमने शिकायत की ... गुहार लगाई कि एड्स पीड़ित बच्चों के लिए राज्य की एकमात्र संस्था है जिसे मदद के बजाए आप बंद कर देना चाहते हैं. यह मामला हाईकोर्ट तक गया, जहां कोर्ट ने कलेक्टर को मामला सुलझाने के लिए कहा. 

संस्था की पैरवी करने वाली वकील प्रियंका शुक्ला ने कहा कि अचानक जुलाई में नोटिस आया है. हर जिले से लोग आने लगे... कोविड के वक्त में आना क्या सही है. बच्चों ने कहा नहीं जाना चाहते, पुराने अनुभव बुरे हैं. हमने इस बारे में कलेक्टर से मुलाकात का समय मांगा, लेकिन नहीं मिला. क्या आदेश है वो बताया नहीं जाता है. सरकारी अधिकारियों से हमने भी जवाब मांगने की कोशिश की लेकिन कैमरे पर जवाब नहीं मिला. कहा गया कि संस्था में किसी नियम का पालन नहीं हो रहा है. अगर बच्चियों को कुछ हुआ तो कौन जिम्मेदार होगा. इस पर भी संस्था के अपने सवाल हैं. 
     
प्रियंका शुक्ला ने बताया कि उनसे कहा गया कि संस्था में ओवन नहीं है, फ्रिज नहीं है. जबकि यहां बच्चों की लाइब्रेरी है, 14 शौचालय हैं... लेकिन अधिकारी कहते हैं व्यक्तिगत नहीं है. संस्था का दावा है कि फिलहाल 14 बच्चों को रखने में करीब 75 हजार रुपये खर्च आता है, जिसे कुछ समाजसेवी मिलकर उठाते हैं.

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