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5 सेकंड में 100 की रफ्तार, छत पर चमकते हैं तारे; जानिए Rolls Royce की सबसे 'सस्ती' कार में क्या है खास?

रोल्स रॉयस का सबसे सस्ता मॉडल 'Rolls Royce Ghost' है. इसमें इतना ताकतवर इंजन है कि 5 सेकंड के भीतर ही 100 की रफ्तार पकड़ सकती है.

5 सेकंड में 100 की रफ्तार, छत पर चमकते हैं तारे; जानिए Rolls Royce की सबसे 'सस्ती' कार में क्या है खास?
Rolls Royce Ghost सबसे सस्ता मॉडल है.
AFP
नई दिल्ली:

दुनिया में सबसे लग्जरी कार कौनसी है? आपके मन में सबसे पहला नाम शायद 'रोल्स रॉयस' का ही आएगा. रोल्स रॉयस की कारों की गिनती दुनिया की सबसे महंगी कारों में होती है. रोल्स रॉयस के बारे में कहा जाता है कि इसे खरीदने के लिए पैसे से ज्यादा रुतबा होना जरूरी है. अगर पैसा है लेकिन रुतबा नहीं तो कंपनी कार नहीं बेचती. 

वैसे तो रोल्स रॉयस की कारें खरीद पाना हर किसी के बस की बात नहीं है और इसकी सबसे सस्ती कार भी इतनी महंगी आती है कि जितने में एक कार खरीदेंगे, उतने में तो एक आलीशान बंगला बनाया जा सकता है. 

फिर भी अगर आप कारों के शौकीन हैं तो आपको जानना चाहिए कि रोल्स रॉयस की सबसे सस्ती कार कौनसी है और कितने की आती है?

रोल्स रॉयस की सबसे सस्ती कार

रोल्स रॉयस की सबसे सस्ती कार जो आती है, वह है 'Rolls Royce Ghost'. इसकी कीमत 6.95 करोड़ से 7.95 करोड़ रुपये के बीच है. टैक्स, इंश्योरेंस और बेसिक कस्टमाइजेशन मिलाकर इसकी कीमत 9 से 10 करोड़ तक पहुंच जाती है.

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Photo Credit: Rolls Royce

यह एक लग्जरी सेडान क्लास कार है. इसमें V12 इंजन है. सिर्फ 4.8 सेकंड में ही यह कार 0 से 100 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार पकड़ सकती है.

V12 इंजन अपनी शांत आवाज और जबरदस्त पावर के लिए जाना जाता है. इससे यह गाड़ी स्मूद तरीके से चलती है. यह कार 4 से 6 किलोमीटर प्रति लीटर का माइलेज देती है.

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रोल्स रॉयस की खास बात यह है कि यह अपनी कारों में हेडलाइनर को सामान्य कारों की तरह नहीं रखता है. रात में आसमान जैसा नजर आता है, उसी तरह से इसकी छत को डिजाइन किया जाता है. हालांकि, कस्टमर चाहें तो अपनी पसंद का पैटर्न भी बनवा सकते हैं.

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इतनी महंगी क्यों होती हैं इसकी कारें?

रोल्स रॉयस की कारों की इतनी कीमत होने की कई सारी वजहें हैं. सबसे बड़ा कारण तो यही है कि रोल्स रॉयस की कारें इंग्लैंड के गुडवुड प्लांट में कारीगरों के हाथों से असेंबल की जाती है. इस कार पर एक पतली सी लाइन होती है, जिसे एक कारीगर अपने हाथ से ही पेंट करता है.

इसकी दूसरी वजह यह है कि कार में बैठे व्यक्ति को बाहर का शोर परेशान न करे, इसका भी खास ध्यान रखा जाता है. इसके लिए इसमें 100 से 130 किलो का साउंड इंसुलेशन, 6 mm मोटे कांच और टायरों के भीतर खास फोम भरा जाता है, जिससे तेज रफ्तार में भी कार के केबिन में घड़ी की टिक-टिक भी सुनाई दे.

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Photo Credit: AFP

कंपनी कार के इंटीरियर में भी छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखती है. इंटीरियर के लिए खास नस्ल के सांड की चमड़ी का इस्तेमाल होता है. एक ही पेड़ की लकड़ी उपयोग में लाई जाती है ताकि पूरा इंटीरियर एक समान दिखे.

भारत में इसकी कारें और भी महंगी हो जाती हैं. वह इसलिए क्योंकि इसकी कारें सीधे इंग्लैंड से बनकर भारत आती हैं. कार पर 100% से ज्यादा कस्टम ड्यूटी और कई तरह के टैक्स लगते हैं. इस कारण विदेशी बाजारों की तुलना में भारत में इसकी कीमत काफी बढ़ जाती है.

इस कंपनी का मालिक कौन है?

इस कंपनी की नींव 1904 में चार्ल्स रोल्स और हेनरी रॉयस ने इंग्लैंड के मैनचेस्टर में रखी थी. 1998 में जर्मन कंपनी BMW ने इसे खरीद लिया था. इसका मालिकाना हक BMW के पास ही है. 

रोल्स रॉयस हर साल 5 से 6 हजार कारें बेचती है. इसका प्लांट इंग्लैंड के गुडवुड में है. स्टैटिस्टा के मुताबिक, 2025 में इसकी 5,664 कारें बिकी थीं. कंपनी का सालाना रेवेन्यू 1 अरब डॉलर से ज्यादा होता है.

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