दिल्ली में मुख्य सचिव के सेवा विस्तार पर केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में पक्ष रखा है. सुप्रीम कोर्ट को बताया कि पिछले 10 सालों में विभिन्न राज्यों में 57 मुख्य सचिवों का कार्यकाल विस्तार दिया गया है. ये केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में है. इससे पहले दिल्ली सरकार की ओर से अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा था कि पिछले 30 सालों में किसी भी मुख्य सचिव को सेवा विस्तार नहीं दिया गया है. दिल्ली के मुख्य सचिव की नियुक्ति से संबंधित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है. मंगलवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि अगर दिल्ली सरकार नरेश कुमार चीफ सेक्रेटरी के पद पर नहीं रखना चाहती तो आप उनके नाम पर ही क्यों अड़े हैं? आप चाहें तो नए मुख्य सचिव की नियुक्ति खुद कर सकते हैं, पर आप सेवा विस्तार का फैसला ले रहे हैं तो आप ये साफ करें कि किस अधिकार से आप ऐसा फैसला ले रहे हैं. इसका क्या आधार है?
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यह देश की राजधानी है. केंद्र सरकार का मानना है कि मुख्य सचिव नरेश कुमार को 6 महीने तक पद पर बने रहना चाहिए. नियम 6 माह से अधिक सेवा विस्तार की अनुमति नहीं देते. दिल्ली सरकार की तरफ से पेश हुए वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि जब से दिल्ली में सरकार का गठन शुरू हुआ, तकरीबन 30 सालों में अभी तक किसी भी मुख्य सचिव को सेवा विस्तार नहीं दिया गया है. अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा 2018 और 2023 के फैसले से स्पष्ट हैं कि गृह मंत्रालय या एलजी के द्वारा नियुक्तियां एनसीटी दिल्ली सरकार की सहायता, सलाह और एनसीटी सरकार की भागीदारी के साथ होती हैं.
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दिल्ली सरकार की दलील पर जवाब देते हुए कहा कि 2015 में दिल्ली के मुख्य सचिव दीपक मोहन को सेवा विस्तार दिया गया था. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि पिछले 12 महीने में राजस्थान, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, और उत्तर प्रदेश ने अपने मुख्य सचिवों को सेवा विस्तार दिया है. सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे के हिस्से को पढ़ते हुए सॉलिसिटर जनरल ने कहा देश भर के अलग अलग राज्यों में बीते 10 सालों में कुल 57 मुख्य सचिवों को सेवा विस्तार दिया गया है. दिल्ली सरकार की तरफ से वकील अभिषेक मनु सिंधवी ने कहा राज्य सरकारों द्वारा वहां पर मुख्य सचिव के कार्यकाल को बढ़ाया गया था. एसजी तुषार मेहता ने कहा कि यह देश की राजधानी है केंद्र सरकार का मानना है कि दिल्ली के इस मुख्य सचिव को 6 महीने तक पद पर बने रहना चाहिए,नियम 6 माह से अधिक की अनुमति नहीं देते.
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