
यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लेकर सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने हलफनामा दायर किया है. जिसके साथ ही UCC को लेकर फिर से बहस शुरू हो गई है. इसमें कहा है कि विभिन्न धर्मों और संप्रदायों से संबंधित नागरिकों का विभिन्न संपत्ति और वैवाहिक कानूनों का पालन करना राष्ट्र की एकता का अपमान है. UCC में सारे पर्सनल लॉ समा जाएंगे. 21वें लॉ पैनल का कार्यकाल समाप्त होते ही UCC की व्यवहार्यता की खोज को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा. इस मुद्दे को चेयरमैन और सदस्यों की नियुक्ति के बाद 22वें लॉ पैनल के समक्ष रखा जाएगा. लॉ पैनल की रिपोर्ट मिलने के बाद, हम हितधारकों से परामर्श करेंगे.
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अदालत UCC का मसौदा तैयार करने का निर्देश नहीं दे सकती. यह एक नीतिगत मामला है. दरअसल अश्विनी उपाध्याय द्वारा तलाक, गोद लेने और संरक्षकता, रखरखाव और गुजारा भत्ता, उत्तराधिकार और विरासत के समान नियमों की मांग करने वाली अलग-अलग जनहित याचिकाओं पर केंद्र का ये हलफनामा दाखिल किया गया है. ये सभी मामले UCC का ही हिस्सा हैं.
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