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This Article is From Jan 09, 2026

CBI History: जांच के लिए सीबीआई पर ही क्यों इतना भरोसा? जानें कैसे काम करती है ये एजेंसी

CBI History: सीबीआई भारत की बड़ी जांच एजेंसी है, जो पेचीदा और गंभीर मामलों को सुलझाने के लिए जानी जाती है. इसका अहम उद्देश्य ईमानदारी बनाए रखना और न्याय दिलाना है.

CBI History: जांच के लिए सीबीआई पर ही क्यों इतना भरोसा? जानें कैसे काम करती है ये एजेंसी
  • सीबीआई की स्थापना द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भ्रष्टाचार रोकने के लिए विशेष पुलिस स्थापना के रूप में हुई थी
  • सीबीआई गृह मंत्रालय के बजाय कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के अधीन कार्य करती है
  • सीबीआई जांच केवल केंद्र सरकार के आदेश, राज्य सरकार की मांग या कोर्ट के निर्देश पर शुरू होती है

CBI History: भारत में जब भी कोई बड़ा घोटाला होता है या किसी केस की गुत्थी उलझती है, तो एक ही मांग उठती है, CBI जांच होनी चाहिए. लेकिन क्या आप जानते हैं कि CBI असल में काम कैसे करती है और इसके पास कितनी पावर है? आइए इस खबर में समझते हैं सीबीआई का पूरा इतिहास और क्या है इसके काम करने का तरीका.

कैसे हुई शुरुआत?

CBI की जड़ें दूसरे विश्व युद्ध से जुड़ी हैं.तब इसे विशेष पुलिस स्थापना (SPE) कहा जाता था, जिसका काम युद्ध के दौरान होने वाली सप्लाई में भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी को रोकना था. 1 अप्रैल 1963 को गृह मंत्रालय के एक प्रस्ताव के जरिए इसे सीबीआई नाम दिया गया. साथ ही इस कमेटी की सिफारिश पर करप्शन रोकने के लिए इसे ज्यादा से ज्यादा पावर दी गईं.

सीबीआई कैसे काम करती है?

सीबीआई सीधे गृह मंत्रालय के अधीन नहीं आती, बल्कि कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के अधीन है. इसके पास  तीन विंग हैं, जिसमें भ्रष्टाचार विरोधी विंग (Anti-Corruption Division), आर्थिक अपराध विंग (Economic Offences Wing) और स्पेशल क्राइम विंग (Special Crimes Division) शामिल हैं. भ्रष्टाचार विरोधी विंग सरकारी अफसरों और नेताओं के भ्रष्टाचार की जांच करती है. आर्थिक अपराध विंग बैंक धोखाधड़ी, शेयर घोटाला और तस्करी जैसे मामले देखती है. वहीं, स्पेशल क्राइम विंग मर्डर, किडनैपिंग के साथ आतंकी घटनाओं से जुड़े केस संभालती है.

जांच की शुरुआत

अगला सवाल आता है कि कैसे सीबीआई किसी केस की जांच शुरू करती है. तो आपको बता दें कि सीबीआई हर मामले में खुद दखल नहीं दे सकती. इसके जांच शुरू करने के तीन रास्ते हैं. पहला केंद्र सरकार आदेश दे, दूसरा राज्य सरकार मांग करे और तीसरा कोर्ट आदेश दे. मान लीजिए किसी केस की राज्य को सीबीआई जांच करानी है तो वो पहले केंद्र सरकार को बताएगी. इसके बाद केंद्र सरकार सीबीआई से बात करेंगी. फिर इसके बाद फैसला लिया जाएगा कि जांच करनी है या नहीं.  

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सीबीआई भारत की प्रमुख जांच एजेंसी है. इसे 1 अप्रैल, 1963 को गृह मंत्रालय के एक प्रस्ताव के जरिए बनाया गया था. यह कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के कंट्रोल में काम करती है.
केंद्र सरकार के अधिकारियों से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले. बैंक धोखाधड़ी, वित्तीय घोटाले, साइबर अपराध. आतंकवाद, हत्या, अपहरण के मामसे सीबीआई जांच कर सकती है.
नहीं. किसी राज्य में जांच करने के लिए उस राज्य सरकार की मंजूरी जरूरी है.
सीबीआई डायरेक्टर की नियुक्ति एक हाई लेवल कमेटी की सिफारिश पर होती है, जिसमें भारत के प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता, भारत के मुख्य न्यायाधीश शामिल हैं.
CBI केवल केंद्र शासित प्रदेशों में खुद जांच शुरू कर सकती है. राज्यों में जांच शुरू करने के लिए उसे या तो राज्य सरकार की मंजूरी चाहिए होती है या अदालतों का आदेश.
जब मामले की जांच करना हो, तो सीबीआई प्रारंभिक जांच शुरू करती है. अगर इस जांच के दौरान पुख्ता सबूत मिलते हैं, तो उसे रेगुलर केस यानी FIR में बदल दिया जाता है. वहीं, अगर सबूत नहीं मिलते, तो प्रारंभिक जांच बंद कर दी जाती है.
हां, कोई भी नागरिक करप्शन या बड़े अपराधों के बारे में सीबीआई को ईमेल या आधिकारिक वेबसाइट के जरिए शिकायत भेज सकता है.
राज्य पुलिस का काम कानून-व्यवस्था बनाए रखना और सामान्य अपराधों की जांच करना है, जबकि CBI केवल उन बड़े मामलों की जांच करती है जिनका असर पूरे देश पर हो.
सीबीआई को आरटीआई अधिनियम की धारा 24 में कुछ छूट मिली हुईं हैं. भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़ी जानकारी को छोड़कर, सीबीआई दूसरी सूचनाएं दे सकती है.
सीबीआई भारत में इंटरपोल के लिए नेशनल सेंट्रल ब्यूरो (NCB) के रूप में काम करती है. यह दुनिया भर की पुलिस एजेंसियों के साथ तालमेल बिठाकर अंतरराष्ट्रीय अपराधियों को पकड़ने और जानकारी साझा करने का काम करती है.

क्या हैं स्पेशल पावर?

CBI किसी भी मामले में सीधे एफआईआर दर्ज नहीं करती, बल्कि पहले प्रारंभिक जांच (PI) करती है. अगर पुख्ता सबूत मिलते हैं, तो रेगुलर केस (RC) दर्ज किया जाता है. स्पेशल पावर की बात करें तो सीबीआई के पास पूरे भारत में तलाशी लेने, संपत्ति कुर्क करने और इंटरपोल के साथ मिलकर इंटरनेशनल लेवल पर अपराधियों को पकड़ने की पावर होती है. एक बात ध्यान रखें कि सीबीआई केवल अपराध की जांच करती है, यह सजा नहीं सुनाती. सजा सुनाने का काम सीबीआई स्पेशल कोर्ट का होता है.

क्या है कन्वेक्शन रेट?

कन्वेक्शन रेट की बात करें तो सीबीआई का रेट 65% है. यानी अगर सीबीआई के पास 100 मामले आए हैं तो उनमें से 65 मामलों में एजेंसी ने दोषियों को सजा दिलाई है.

सॉल्व किए कई बड़े मामले

  • हर्षद मेहता कांड

1992 का वो दौर जब हर्षद मेहता ने पूरे बैंकिंग सिस्टम को हिला कर रख दिया था. 4,000 करोड़ रुपये का यह घोटाला आज के हिसाब से 50,000 करोड़ से भी ज्यादा का बैठता है. मेहता ने बैंकिंग कमियों का फायदा उठाकर फर्जी लोन लिए और पैसा शेयर मार्केट में झोंक दिया. सीबीआई ने न केवल इस मकड़जाल को तोड़ा, बल्कि मेहता को इस मामले में दोषी भी साबित किया.

  • एलएन मिश्रा मर्डर

1975 का वो बम ब्लास्ट जिसने देश को झकझोर दिया था. तब के रेल मंत्री एलएन मिश्रा की हत्या के बाद पुलिस के हाथ खाली थे. मामला सीबीआई के पास आया, गहन जांच हुई और आखिरकार आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजकर कोर्ट से उन्हें सजा दिलवाई गई.

  • लोंगोवाल हत्याकांड

शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष संत हरचंद सिंह लोंगोवाल ने जब 1985 में राजीव गांधी के साथ शांति समझौता किया, तो वो उग्रवादियों के निशाने पर आ गए. एक जनसभा के दौरान उनकी गोली मारकर हत्या कर दी. सीबीआई ने परत-दर-परत साजिश का खुलासा किया और बताया कि कैसे उग्रवादी संगठनों ने हत्या की साजिश रची थी.

  • जनरल अरुण कुमार वैद्य मर्डर

ऑपरेशन ब्लू स्टार को लीड करने वाले जनरल की हत्या के आरोपियों को सीबीआई ने पकड़ा.

  • पुरुलिया आर्म्स ड्रॉप

आसमान से गिरे हथियारों के जखीरे के पीछे की अंतरराष्ट्रीय साजिश का पर्दाफाश सीबीआई ने बड़ी कुशलता के साथ किया.

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