- बक्सर से भागलपुर तक लगभग 350 किलोमीटर लंबे छह लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का निर्माण निर्णय लिया है.
- यह एक्सप्रेसवे पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जुड़कर दिल्ली और लखनऊ के लिए बेहतर सड़क संपर्क प्रदान करेगा.
- योजना के तहत NH के कुछ हिस्सों का चौड़ीकरण कर छह लेन किया जाएगा और सीमित एंट्री-एग्जिट पॉइंट होंगे.
बिहार में बुनियादी ढांचे को और मजबूती देने के लिए सरकार ने बड़ा फैसला किया है. बक्सर से भागलपुर के बीच करीब 350 किलोमीटर लंबे 6 लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे बनने जा रहा है. इस एक्सप्रेसवे के बनने के बाद बक्सर से भागलपुर की दूरी तय करने में करीब 4-5 घंटे का समय लगेगा. बक्सर में यह एक्सप्रेसवे पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा, जिससे दिल्ली और लखनऊ जाना भी आसान हो जाएगा. यह एक्सप्रेसवे बिहार के और कौन-कौन से जिलों को कवर करेगा? कौन-कौन से शहर से कौन-कौन से जिले से भागलपुर, बक्सर इन जगहों पर पहुंचना आसान हो जाएगा.
बिहार स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड ने योजना की रिपोर्ट तैयार करने के लिए कंसल्टेंसी एजेंसी के चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी है. अब एजेंसी के चयन के बाद सर्वेक्षण, भूमि अधिग्रहण और तकनीकी अध्ययन का काम तेज किया जाएगा. परियोजना पूरी होने के बाद बक्सर से भागलपुर की यात्रा, जो वर्तमान में लगभग 8 से 9 घंटे में पूरी होती है, घटकर करीब 4 घंटे रह जाने की उम्मीद है.
आधुनिक कनेक्टिविटी की दिशा में बड़ा कदम—बक्सर–भागलपुर 6-लेन एक्सप्रेसवे #BiharRoads #RoadInfrastructure #GreenfieldExpressway #BuxarBhagalpur #6LaneExpressway #FullyAccessControlled #ViksitBihar #NewBihar #Connectivity #InfrastructureDevelopment #BiharDevelopment… pic.twitter.com/C6JrZHLZw9
— RoadConst Dept Bihar (@RCD_Bihar) August 25, 2026
यह एक एक्सेस कंट्रोल एक्सप्रेसवे होगा
जानकारी यह भी है कि इस योजना के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग-922, एनएच-31 और एनएच-33 के कुछ हिस्सों का चौड़ीकरण भी किया जाएगा. कई खंडों को चार लेन से बढ़ाकर 6 लेन बनाया जाएगा. साथ ही यह एक एक्सेस कंट्रोल एक्सप्रेसवे होगा, जिसका मतलब यह होता है कि सीमित स्थानों से ही प्रवेश और निकास की सुविधा होगी. एक्सप्रेसवे के शुरू होने से परिवहन लागत में कमी आएगी, ईंधन की बचत होगी और बिहार के व्यापार, उद्योग व कृषि क्षेत्र को नई गति मिलेगी. बेहतर सड़क संपर्क से निवेश बढ़ने, नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे.
पूरे एक्सप्रेसवे पर केवल 10 निर्धारित एंट्री और एग्जिट पॉइंट
यह पूरी तरह एक्सेस कंट्रोल हाई-स्पीड कॉरिडोर होगा, जहां बीच रास्ते में न तो कोई कट होगा और न ही यू-टर्न की सुविधा मिलेगी. पूरे मार्ग पर केवल 10 निर्धारित एंट्री और एग्जिट पॉइंट बनाए जाएंगे. मोकामा-मिर्जाचौकी ग्रीनफील्ड फोरलेन, सुल्तानगंज-अगुवानी फोरलेन मार्ग, मुंगेर-खगड़िया गंगा पथ और एनएच-80 से जोड़ने की तैयारी है. साथ ही बेहतर कनेक्टिविटी के लिए विभिन्न स्थानों पर इंटरचेंज, फ्लाईओवर और अंडरपास बनाए जाएंगे.
एलिवेटेड स्ट्रक्चर भी बनाए जाने की योजना
सरकार के प्रस्ताव के मुताबिक यहां वाहन 120 किलोमीटर प्रति घंटा तक की गति से चल सकेंगे. सोन, पुनपुन, फल्गु और किऊल जैसी प्रमुख नदियों पर बड़े पुल और एलिवेटेड स्ट्रक्चर भी बनाए जाने की योजना है. यह कॉरिडोर दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और गाजीपुर-बक्सर लिंक रोड से जुड़कर देश के प्रमुख सड़क नेटवर्क का हिस्सा बनेगा.
CM सम्राट चौधरी और नीतीश कुमार के जिले से गुजरेगा एक्सप्रेसवे
3,700 करोड़ का 336 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे करीब 13 जिलों से गुजरने वाला यह एक्सप्रेसवे बिहार के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों के बीच आवागमन को आसान बनाएगा. इस मार्ग में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के गृह जिले भी शामिल हैं. राजनीतिक नजरिए से भी इस परियोजना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसके प्रभाव क्षेत्र में बड़ी संख्या में एनडीए समर्थित विधानसभा सीटें आती हैं. गया से भागलपुर की दूरी, जिसे तय करने में अभी 5 से 6 घंटे लगते हैं, घटकर लगभग ढाई से तीन घंटे रह सकती है. वहीं बक्सर से गया का सफर भी करीब चार घंटे से घटकर दो घंटे के आसपास रह जाएगा. इससे यात्रियों का समय बचेगा.
फिलहाल DPR तैयार करने की प्रक्रिया जारी है. रिपोर्ट पूरी होने के बाद एक्सप्रेसवे के सटीक रूट, प्रभावित गांवों, भूमि अधिग्रहण और निर्माण लागत जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आएंगी. इस परियोजना को बिहार के सबसे महत्वपूर्ण परिवहन कॉरिडोर में से एक माना जा रहा है, जो राज्य की कनेक्टिविटी को नया आयाम दे सकता है.
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