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सिर्फ सदस्य नहीं, एजेंडा सेट कर रहा भारत; BRICS में क्यों और कैसे बढ़ रहा दिल्ली का कद?

आर्थिक अनिश्चितता, जलवायु संकट और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के दौर में BRICS की अहमियत लगातार बढ़ रही है. ऐसे समय में भारत खुद को Global South की आवाज के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है.

सिर्फ सदस्य नहीं, एजेंडा सेट कर रहा भारत; BRICS में क्यों और कैसे बढ़ रहा दिल्ली का कद?
भारत कैसे BRICS का एजेंडा सेट कर रहा है? जानें.
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नई दिल्ली:

BRICS की स्थापना 2009 में हुई थी. इसका पहला शिखर सम्मेलन भी रूस में हुआ था. जब ब्राजील, रूस, भारत, चीन इसके सदस्य देश थे. इन चार देशों के नाम के पहले लेटर पर इसका नाम BRIC था. दो साल बाद 2011 में दक्षिण अफ्रीका भी इस गुट में शामिल हुआ और अब इस संगठन का नाम BRICS हो गया है. 2009 से लेकर अब तक ब्रिक्स का संगठन और बढ़ा है और खास बात यह है कि इसमें भारत का कद भी बढ़ा है. BRICS में भारत एक तरह से नीतियां गढ़ने वाला खिलाड़ी बन चुका है. अब जब चौथी बार भारत ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है तो आईए जानते हैं कि ब्रिक्स में भारत का कद क्यों और कैसे बढ़ रहा है?  

2012 के दिल्ली समिट में आया ब्रिक्स डेवलपमेंट बैंक बनाने का आइडिया

BRICS में भारत की भूमिका अब केवल एक सदस्य देश की नहीं रह गई है. पिछले एक दशक में भारत ने इस मंच को नई संस्थाएं, नई पहलें और नए एजेंडे दिए हैं. 2012 में नई दिल्ली शिखर सम्मेलन के दौरान BRICS Development Bank का विचार सामने आया, जो बाद में New Development Bank के रूप में अस्तित्व में आया. 

2016 के गोवा सम्मेलन में आतंकवाद, ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय सहयोग पर जोर दिया गया, जबकि 2021 में भारत की अध्यक्षता के दौरान BRICS Counter-Terrorism Action Plan और Vaccine Research Centre जैसी अहम पहलें शुरू हुईं.

2026 में भारत की अध्यक्षता क्यों खास?

भारत इस वर्ष चौथी बार BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और उसने समूह का फोकस सिर्फ राजनीतिक घोषणाओं से आगे बढ़ाकर व्यावहारिक सहयोग पर केंद्रित किया है. देशभर के 25 शहरों में 350 से अधिक बैठकों के जरिए डिजिटल कृषि, मानसिक स्वास्थ्य, MSME सहयोग, स्टार्टअप फंड, स्मार्ट ग्रिड, सप्लाई चेन और शहरी बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में नई पहलें शुरू की गई हैं. भारत की कोशिश है कि BRICS विकासशील देशों के लिए ठोस नतीजे देने वाला मंच बने.

दुनिया बदल रही है, BRICS में भारत का महत्व भी

आर्थिक अनिश्चितता, जलवायु संकट और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के दौर में BRICS की अहमियत लगातार बढ़ रही है. अब यह समूह दुनिया की लगभग आधी आबादी और 40 प्रतिशत वैश्विक GDP का प्रतिनिधित्व करता है. ऐसे समय में भारत खुद को Global South की आवाज के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है. नई दिल्ली का लक्ष्य केवल BRICS का विस्तार नहीं, बल्कि अलग-अलग हितों वाले सदस्य देशों के बीच सहमति बनाकर उसे एक प्रभावी वैश्विक मंच में बदलना है.

पीएम मोदी बोले- विश्व कल्याण पर होगी सार्थक चर्चा

प्रधानंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स समिट से पहले एक एक्स पोस्ट में भरोसा जताया कि इस महत्वपूर्ण बैठक में दुनिया के हित और कल्याण को ध्यान में रखते हुए कई मुद्दों पर सकारात्मक और सार्थक चर्चा होगी. प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा, "दुनिया भर के नेता ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए एकत्र होंगे. मुझे विश्वास है कि इस सम्मेलन में विश्व कल्याण को ध्यान में रखते हुए विभिन्न मुद्दों पर सकारात्मक और सार्थक चर्चा होगी."

वैश्विक और क्षेत्रीय महत्व के मुद्दों पर होगी चर्चा

मालूम हो कि ब्रिक्स 2026 की अध्यक्षता भारत के पास है. इसी के तहत भारत 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है. इस सम्मेलन में ब्रिक्स सदस्य देशों, साझेदार देशों और अन्य आमंत्रित देशों के नेता हिस्सा लेंगे. विदेश मंत्रालय (एमईए) के अनुसार, सम्मेलन के दौरान नेता ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा करेंगे. इसके साथ ही वे वैश्विक और क्षेत्रीय महत्व के मुद्दों पर भी अपने विचार साझा करेंगे.



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