- नीतीश के इस्तीफे के बाद सम्राट चौधरी को विधायक दल का नेता चुनने पर उनके सीएम बनने का रास्ता साफ
- सम्राट चौधरी ने आरजेडी से राजनीति शुरू की और बाद में भाजपा में शामिल होकर बड़ा कद बनाया है
- पिछले वर्षों में बीजेपी ने कई नेताओं को मुख्यमंत्री बनाया जो पहले कांग्रेस या अन्य पार्टियों से आए थे
बीजेपी आम तौर पर संगठन में वर्षों तक मेहनत करने वाले अपने कैडर को ही मुख्यमंत्री जैसी बड़ी जिम्मेदारी सौंपने के लिए जानी जाती है. लेकिन समय‑समय पर पार्टी ने ऐसे नेताओं पर भी भरोसा जताया है, जो दूसरी पार्टियों से आकर बीजेपी में शामिल हुए और बाद में सत्ता की कमान तक पहुंचे. बिहार में नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे के बाद अब सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया है, जिन्हें विधायक दल का नेता चुन लिया गया है.
इस फैसले के साथ ही बीजेपी ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि वह परिस्थितियों और राजनीतिक जरूरतों के मुताबिक बाहर से आए चेहरों को भी शीर्ष नेतृत्व सौंपने से भी नहीं हिचकती. पिछले कुछ वर्षों में बीजेपी ने ऐसे कई नेताओं को मुख्यमंत्री बनाया है, जो कभी उसके राजनीतिक विरोधी खेमे में थे. सम्राट चौधरी अब इसी सूची में जुड़ने जा रहे ताज़ा नाम हैं, जो पहले बीजेपी के विरोधी पाले में रहे.

सम्राट चौधरी (बिहार)
सम्राट चौधरी ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत लालू की पार्टी आरजेडी से की थी. इसके बाद वो बीजेपी में शामिल हुए. बीजेपी में आने के बाद उनका कद पार्टी संगठन और सरकार में लगातार बढ़ा. साल 2026 में नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद सम्राट चौधरी बिहार के नए सीएम बनने जा रहे हैं, उन्हें विधायक दल का नेता चुन लिया गया है. इसी के साथ उनके सीएम बनने का रास्ता साफ हो गया है.

हिमंता बिस्वा सरमा (असम)
हिमंता बिस्वा सरमा लंबे समय तक कांग्रेस के प्रमुख नेता और मंत्री रहे. साल 2015 में कांग्रेस छोड़कर उन्होंने भारतीय जनता पार्टी का दामन थामा तब से वो बीजेपी के फायर ब्रांड नेता बने हुए हैं. 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद बीजेपी ने उन्हें असम का मुख्यमंत्री बनाया. कांग्रेस में रहते हुए सीएम नहीं बन सके, लेकिन बीजेपी में आकर शीर्ष पद तक पहुंचे.

एन. बीरेन सिंह (मणिपुर)
एन. बीरेन सिंह पहले कांग्रेस के नेता और विधायक रह चुके हैं. उन्होंने 2016 में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर बीजेपी का दामन थामा. बीजेपी में शामिल होने के एक साल के भीतर पार्टी ने सरकार बनाई. साल 2017 में एन. बीरेन सिंह को मणिपुर का मुख्यमंत्री बनाया गया. इसके बाद वे लगातार बीजेपी का चेहरा बने.

माणिक साहा (त्रिपुरा)
माणिक साहा कांग्रेस की राजनीति से जुड़े रहे हैं और वहीं से करियर की शुरुआत की. साल 2016 में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर बीजेपी जॉइन की. बीजेपी ने उन्हें पहले संगठन और फिर सरकार में अहम जिम्मेदारियां सौंपी. 2022 में पार्टी ने उन्हें त्रिपुरा का मुख्यमंत्री बनाया. वे कांग्रेस से बीजेपी आकर सीएम बनने वालों में शामिल हैं.

पेमा खांडू (अरुणाचल प्रदेश)
पेमा खांडू मूल रूप से कांग्रेस नेता थे और कांग्रेस सरकार में मुख्यमंत्री भी बने. फिर साल 2016 में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल होने का फैसला किया. बीजेपी में आने के बाद उन्होंने बहुमत के साथ सरकार कायम रखी. 2016 से ही वे बीजेपी के मुख्यमंत्री के रूप में अरुणाचल प्रदेश का नेतृत्व कर रहे हैं. पार्टी बदलने के बाद भी उनकी मुख्यमंत्री की कुर्सी बरकरार रही.

बसवराज बोम्मई (कर्नाटक)
बसवराज बोम्मई ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत जनता दल से की थी. इसके बाद उन्होंने बीजेपी का हाथ थामा. बीजेपी में आने के बाद वे राज्य सरकार में मंत्री बने और संगठन में मजबूत नेता के तौर पर उभरे. बी. एस. येदियुरप्पा के इस्तीफे के बाद जुलाई 2021 में बीजेपी ने उन्हें कर्नाटक का मुख्यमंत्री बनाया. इस तरह जनता दल से बीजेपी में आकर वे मुख्यमंत्री बनने वाले नेताओं में शामिल हुए.
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