विज्ञापन

मंत्री नहीं बने तो सचेतक बनाया, बड़े नेताओं को साधने की स्मार्ट कोशिश, समझिए बिहार CM सम्राट चौधरी का यह दांव

बिहार में मंत्री पद न मिलने से नाराज बड़े नेताओं को शांत करने के लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने नया दांव चला है. सरकार ने ऐसे 11 दिग्गज विधायकों को सचेतक बनाकर राज्य मंत्री का दर्जा दिया है.

मंत्री नहीं बने तो सचेतक बनाया, बड़े नेताओं को साधने की स्मार्ट कोशिश, समझिए बिहार CM सम्राट चौधरी का यह दांव
  • मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 11 नेताओं को सचेतक पद पर मनोनीत किया है, जिन्हें मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिल पाई
  • संजीव चौरसिया को मुख्य सचेतक बनाया गया है, उन्हें कैबिनेट मंत्री के बराबर का दर्जा मिलेगा
  • जदयू के तेजतर्रार नेता मंजीत सिंह को उपमुख्य सचेतक बनाया गया है, जिससे राजपूत मतदाताओं को संदेश जाएगा

बिहार सरकार उन नेताओं को रिझाने में जुटी है, जिन्हें मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिल पाई. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिख कर 11 नेताओं को सचेतक मनोनीत किया है. इनमें दीघा के विधायक संजीव चौरसिया, बरौली से विधायक मंजीत सिंह, गोविंदगंज विधायक राजू तिवारी, पटना साहिब के विधायक रत्नेश कुमार, परिहार की विधायक गायत्री देवी जैसे नाम शामिल हैं. यह सभी मंत्री बनने की रेस में थे. लेकिन इन्हें मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिल पाई. अब उन्हें सचेतक बनाया गया है. मुख्य सचेतक को कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिलता है और सचेतक को राज्य मंत्री का.

क्यों महत्वपूर्ण हैं इन नेताओं का चयन?

1. संजीव चौरसिया: संजीव चौरसिया पार्टी के दिग्गज नेता हैं. दीघा से 3 बार के विधायक हैं. अति पिछड़ा चेहरा हैं. मुख्यमंत्री की रेस में भी उनका नाम था. बाद में यह माना जा रहा था कि पटना जिले से उन्हें मंत्री बनाया जाएगा. लेकिन वे दोनों नहीं बन पाए. पार्टी को इस वरिष्ठ नेता को एडजस्ट करना था. इसलिए एक वरिष्ठ विधायक विनोद नारायण झा की जगह उन्हें मुख्य सचेतक बनाया गया है.

2. मंजीत सिंह: मंजीत सिंह उपमुख्य सचेतक बनाए गए हैं. वे जदयू के विधायक हैं. मंजीत सिंह तेजतर्रार नेता हैं. बीते दो सत्र में सदन में उनके सवालों ने मंत्रियों की मुश्किलें बढ़ाई हैं. जदयू के राजपूत चेहरों में उनकी गिनती होती है. आनंद मोहन के नाराजगी भरे बयानों के बीच उन्हें उपमुख्य सचेतक बना कर पार्टी ने राजपूत मतदाताओं को संदेश देने की कोशिश की है. एक और राजपूत नेता राणा रणधीर सिंह को भाजपा ने सचेतक बनाया है.

3. राजू तिवारी: राजू तिवारी चिराग पासवान की पार्टी लोजपा के प्रदेश अध्यक्ष हैं. वे मंत्री बनना चाहते थे. लेकिन लोजपा कोटे से 2 मंत्री पहले से बनाए जा चुके थे. इसलिए मंत्रिमंडल में उन्हें जगह नहीं मिल पाई. मंत्री न बनाए जाने के कारण वे नाराज भी थे. चर्चा थी कि वे प्रदेश अध्यक्ष के पद से इस्तीफा दे सकते हैं. इसलिए अब पार्टी ने उन्हें सचेतक बनाया है.

4. रत्नेश कुमार: रत्नेश कुमार पटना साहिब से विधायक हैं. उनकी गिनती सम्राट चौधरी के करीबी नेताओं में होती है. बंगाल चुनाव में वे सिलीगुड़ी के इलाके में प्रभारी थे. उन सीटों पर पार्टी को जीत मिली थी. चर्चा थी कि उन्हें भी मंत्री बनाया जा सकता है. लेकिन कुशवाहा जाति के मुख्यमंत्री और जदयू, RLM से कुशवाहा नेताओं को मंत्री बनाए जाने के कारण उन्हें एडजस्ट नहीं किया जा सका. उन्हें अब सचेतक बनाया गया है.

इसके अलावा कृष्ण कुमार ऋषि पहले भी मंत्री रहे हैं. उन्हें भी सचेतक बनाया गया है. सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरण साधने के लिए रामविलास कामत, अरुण मांझी, गायत्री देवी को भी सचेतक बनाया गया.

यह भी पढ़ें: Bihar Politics: तेज प्रताप का सम्राट चौधरी पर सीधा हमला, बोले- 'जब PM दो गाड़ियों में चल सकते हैं, तो बिहार के CM क्यों नहीं?'

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Bihar Politics 2026, Samrat Chaoudhary, CM Samrat Chaudhary, CM Samrat Chaudhary News, Cm Samrat Choudhary
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com