प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने की हालिया अपील ने बिहार की राजनीति में एक नई चर्चा छेड़ दी है. इस अपील का असर बिहार सरकार के शीर्ष नेतृत्व और सत्ताधारी गठबंधन के नेताओं पर स्पष्ट रूप से दिखने लगा है. मुख्यमंत्री से लेकर केंद्रीय मंत्रियों तक, सभी ने अपने सुरक्षा काफिलों और वाहनों की संख्या में भारी कटौती कर एक कड़ा संदेश देने की कोशिश की है. बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रधानमंत्री की अपील को जमीन पर उतारने की शुरुआत अपने स्वयं के काफिले से की है.
जानकारी के अनुसार, सामान्य तौर पर मुख्यमंत्री के साथ चलने वाला 19 गाड़ियों का बड़ा काफिला होता है. लेकिन अब वह 3 गाड़ियों के साथ चल रहे हैं. गुरुवार को जब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी के साथ दरभंगा जाने के लिए पटना एयरपोर्ट पहुंचे, तो वहां का नजारा बदला हुआ था. बिना किसी भारी ताम-झाम के, मुख्यमंत्री बेहद सीमित सुरक्षा वाहनों के साथ पहुंचे.
सत्ता पक्ष के मंत्रियों ने भी छोड़ी 'लग्जरी' कार
मुख्यमंत्री की इस पहल के बाद बिहार सरकार के अन्य मंत्रियों में भी होड़ लग गई है बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी जब आज पार्टी कार्यालय पहुंचे, तो वे अपनी लंबी-चौड़ी गाड़ियों की कतार छोड़ सिर्फ एक गाड़ी में सवार थे. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की अपील राष्ट्रहित में है और इससे विदेशी मुद्रा के साथ-साथ पर्यावरण की भी बचत होगी. उन्होंने विरोधियों के तंज को दरकिनार करते हुए इसे जनहित का कार्य बताया.
नित्यानंद राय मुख्य सचिव को लिखा पत्र
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने इस दिशा में एक कदम आगे बढ़ते हुए बिहार के मुख्य सचिव को औपचारिक पत्र लिखा है. उन्होंने अपनी सुरक्षा में तैनात गाड़ियों की संख्या कम करने का निर्देश दिया है. साथ ही, उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं से भी अपील की है कि उनके स्वागत या कार्यक्रमों के दौरान गाड़ियों का अनावश्यक प्रदर्शन न करें.
पूर्व केंद्रीय मंत्री शाहनवाज हुसैन ने ईंधन बचाने के लिए इलेक्ट्रिक वाहन (EV) को अपना लिया है. वे अब पेट्रोल-डीजल की जगह क्लीन एनर्जी को बढ़ावा दे रहे हैं.
विपक्ष का पलटवार
जहां एक ओर सत्ता पक्ष इसे राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक बड़ा कदम बता रहा है, वहीं विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल (RJD) इसे केवल एक 'सियासी स्टंट' मान रहा है. प्रधानमंत्री की अपील पर प्रतिक्रिया देते हुए नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने तीखा हमला बोला. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सरकार बुनियादी मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए ऐसे प्रतीकात्मक काम कर रही है. उन्होंने चुटकी लेते हुए यहां तक कह दिया कि कल को प्रधानमंत्री कुछ और भी त्यागने को कह सकते हैं, तो क्या उनके नेता वैसा ही करेंगे?
लालू यादव के काफिले में कोई बदलाव नहीं
सत्ता पक्ष के दावों के उलट, राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के काफिले में कोई खास बदलाव नजर नहीं आया. आज भी उनके साथ सुरक्षा और सहयोगियों की पांच गाड़ियां मौजूद रहीं. विपक्ष का मानना है कि सुरक्षा प्रोटोकॉल और कार्यक्षमता से समझौता करना व्यावहारिक नहीं है.
बिहार में 'ईंधन बचाओ' अभियान ने सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच एक नई लकीर खींच दी है. जहां एनडीए के नेता अपने काफिलों को छोटा कर जनता के बीच एक 'संवेदनशील नेता' की छवि गढ़ रहे हैं, वहीं महागठबंधन इसे 'प्रोपेगेंडा' बताकर जनता के असली मुद्दों (बेरोजगारी, महंगाई) पर बात करने की मांग कर रहा है.
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह मुहिम केवल सरकारी स्तर तक सीमित रहती है या आम जनता भी प्रधानमंत्री की इस अपील को इसी गंभीरता से लेती है.
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