- बीजेपी के पूर्व सांसद बृज भूषण शरण सिंह ने राज्यसभा चुनाव लड़ने की अटकलों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है
- बृज भूषण सिंह ने कहा कि वे लोकसभा चुनाव लड़कर वापस राजनीति में सक्रिय होना चाहते हैं और रिटायर नहीं हुए हैं
- यूपी में सपा-कांग्रेस गठबंधन को लेकर उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पास यूपी में अब कोई नेता नहीं बचा है
बीजेपी के पूर्व सांसद बृज भूषण शरण सिंह ने एनडीटीवी से बात करते हुए राज्यसभा चुनाव लड़ने की अटकलों को पूरी तरह खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि वो चाहते तो छह-सात वोट ऐसे ही मैनेज कर लेते, लेकिन उन्हें राज्यसभा जाना ही नहीं है. बृज भूषण सिंह ने कहा कि मैं जब चाहूंगा, जहां से चाहूंगा, वहां से लोकसभा चला जाऊंगा. मैं रिटायर नहीं हुआ हूं, फिर से लड़ूंगा और लोकसभा जाऊंगा.
वहीं यूपी विधानसभा चुनाव में उतरने की संभावनाओं पर उन्होंने कहा कि मंत्री छोटी चीज है, अब मैं उससे ऊपर उठ चुका हूं. अखिलेश यादव की तारीफ वाले सवाल पर बृज भूषण शरण सिंह ने कहा कि अखिलेश यादव से उनके संबंध बहुत ही अच्छे हैं. मैंने अपने दोनों बेटों को कहा है कि संस्कार सीखने के लिए मुलायम सिंह यादव के घर जाकर 15 दिन रहो, तो समझ आएगा कि संस्कार क्या होता है.
इंडिया अलायन्स के सवाल पर उन्होंने कहा कि सपा-कांग्रेस गठबंधन में से अगर सपा अलग हो जाए तो कांग्रेस को प्रत्याशी तक नहीं मिलेंगे, लड़ाने के लिए. उन्होंने कहा कि ये देश का दुर्भाग्य है कि कांग्रेस जैसी बड़ी पार्टी के पास यूपी में नेता नहीं बचे हैं. वहीं नई प्रदेश अध्यक्ष बनीं आराधना मिश्रा मोना की तारीफ करते हुए बृज भूषण सिंह ने कहा कि प्रमोद तिवारी ने उन्हें बहुत अच्छे संस्कार दिए हैं, मोना जी को शुभकामनाएं हैं.

पायलट स्मित मच्छार पर बृज भूषण सिंह ने कहा कि उन्होंने इतना बड़ा काम किया, लेकिन राहुल गांधी उनकी तारीफ के लिए एक ट्वीट तक नहीं कर सके. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपने संबंधों को लेकर उन्होंने कहा कि सीएम योगी से हमारे बहुत अच्छे संबंध हैं. हालांकि सरकार किसकी आएगी, इस सवाल पर उन्होंने कहा कि झूठ ना बुलवाओ.
बृज भूषण सिंह की बेटी लड़ सकती हैं विधानसभा चुनाव
वहीं अपनी बेटी शालिनी सिंह के विधानसभा चुनाव लड़ने को लेकर उन्होंने इशारा किया कि उनकी बेटी चुनाव लड़ सकती है, हालांकि उन्होंने कहा कि मैंने बेटी से कहा है कि हड़बड़ी मत करना. एशियन गेम्स को लेकर बृज भूषण सिंह ने कहा कि अजीत कनखल के साथ बहुत भेदभाव किया गया. उन्होंने अपने आप को साबित किया है. विनेश फोगाट को सरकार ने दबाव में नियम के खिलाफ एक दिन में दो बार ट्रायल कराया, वहीं बजरंग पूनिया को खेल मंत्रालय और ट्रायल कमेटी ने आगे बढ़ाने का काम किया.
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