- पश्चिम बंगाल उपचुनाव में बीजेपी ने नंदीग्राम में 1,22,753 वोटों के रिकॉर्ड अंतर से जीत हासिल की
- मुख्यमंत्री ने भाजपा की विकास-प्रमुख नीतियों को लेकर पांच साल में राज्य को आगे बढ़ाने का संकल्प व्यक्त किया
- भाजपा नेता दावा करते हैं कि नंदीग्राम में 80 प्रतिशत और रेजीनगर में 60 प्रतिशत मुस्लिम वोट मिले
बीजेपी ने पश्चिम बंगाल उपचुनाव में नंदीग्राम में रिकॉर्ड अंतर से जीत हासिल की और मुस्लिम बहुल रेजीनगर में भी शानदार जीत दर्ज की. नंदीग्राम में, बीजेपी उम्मीदवार हासी रानी रथ को 1,64,427 वोट मिले, जबकि जमानत पर बाहर कांग्रेस के मिलन प्रधान 41,674 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे. जीत का अंतर 1,22,753 वोट था, जो पांच महीने पहले पश्चिम बंगाल चुनाव में सुवेंदु अधिकारी की जीत के अंतर से भी ज्यादा है.
उपचुनाव के ये नतीजे जमीन पर बीजेपी का दबदबा तो दिखाते ही हैं. साथ ही ये सुवेंदु अधिकारी की स्थिति को भी मजबूत करते हैं. सुवेंदु अधिकारी ने दावा किया, "रेजीनगर में 60% मुसलमानों ने हमें वोट दिया है और नंदीग्राम में 80% मुसलमानों ने हमारे पक्ष में वोट किया है. मैंने 6 अक्टूबर को 'फ्रेंडशिप डे' की बात की थी, उन्होंने उस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है, जिससे मैं खुश हूं." हालांकि, ECI धर्म के आधार पर डाले गए वोटों का डेटा नहीं देता है.
अल्पसंख्यकों के वोट कैसे मिले?
यह नतीजा BJP के लिए राहत की बात है, जो अपने चुनावी घोषणापत्र में किए गए वादों को पूरा करने और 'अल्पसंख्यक-विरोधी' होने के ठप्पे को हटाने के लिए प्रतिबद्ध है. लेकिन राज्य चुनावों के बाद से विपक्ष के कमजोर और बिखरे हुए होने के कारण, राजनीतिक हालात बदल गए हैं. इससे मुकाबला लगभग एकतरफा हो गया है. लेकिन BJP ने अल्पसंख्यकों का समर्थन कैसे हासिल किया?
BJP ने विपक्ष के 'अल्पसंख्यक-विरोधी' नैरेटिव को गलत बताते हुए अपने "सबका साथ, सबका विकास" के नारे को फिर से दोहराया. NDTV से बात करते हुए BJP नेता शिशिर बजोरिया ने कहा, "अगर हमें राज्य चुनावों में अल्पसंख्यकों का समर्थन नहीं मिला होता, तो BJP को इतनी बड़ी जीत नहीं मिलती. यह 'अल्पसंख्यक-विरोधी' ठप्पा विपक्ष द्वारा वोटरों को गुमराह करने के लिए फैलाया गया झूठ है. सत्ता में आने के बाद हम अपने वादे पूरे कर रहे हैं और इसीलिए अल्पसंख्यकों का समर्थन और बढ़ा है. बंगाल में वे लंबे समय से तुष्टिकरण की राजनीति का शिकार रहे हैं और अब वे विकास देख रहे हैं."
जादवपुर यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर का तर्क अलग
लेकिन राजनीतिक विश्लेषक और जादवपुर यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर ईशानी नस्कर का कहना है कि उपचुनाव के नतीजे इस बात का शुरुआती संकेत हैं कि लोग सरकार में BJP के कामकाज को किस तरह देखते हैं. वो कहती हैं, “रेजीनगर में BJP का आगे रहना, राज्य में सत्ता में आने के बाद पिछले 4 महीनों में BJP के कुल कामकाज को सीधे तौर पर नहीं दिखाता; पार्टी ने राज्य विधानसभा चुनावों में भारी बहुमत से जीत हासिल की थी. लेकिन सत्ता में आने के बाद हुए पहले उपचुनाव के तौर पर, यह इस बात का शुरुआती संकेत है कि लोगों ने BJP की सरकार को किस तरह देखा है.”
मई 2026 में हुए पश्चिम बंगाल चुनावों के बाद विपक्ष कमजोर पड़ गया है. पांच महीने पहले TMC, कांग्रेस और लेफ्ट के बीच अल्पसंख्यक वोटों का जो बंटवारा हुआ था, वह तृणमूल में फूट के कारण और बढ़ गया है. जादवपुर यूनिवर्सिटी की प्रोफ़ेसर इशानी नस्कर का कहना है, "हुमायूं की गिरफ्तारी से AJUP उम्मीदवार, उनके बेटे गोलम नबी के लिए सहानुभूति की एक बड़ी लहर पैदा होनी चाहिए थी. लेकिन रेजीनगर जैसे अल्पसंख्यक-बहुल निर्वाचन क्षेत्र में ऐसा नहीं हुआ, जहां आजाद को 26.29% वोट मिले, वहीं BJP उम्मीदवार को 63.14% वोट मिले. यह पश्चिम बंगाल की राजनीति के आम लक्षणों को भी दिखाता है - यानी विपक्षी ताकतों की सत्ताधारी पार्टी (इस मामले में BJP) के खिलाफ मजबूत लड़ाई लड़ने में नाकामी. लंबे समय में किसी भी राजनीतिक व्यवस्था के लिए यह अच्छी बात नहीं है - यह तो 'नई बोतल में पुरानी शराब' जैसा है!"
एक समय मुर्शिदाबाद जिले की 22 विधानसभा सीटों में से 20 पर TMC का दबदबा था. लेकिन मई में यह संख्या घटकर सिर्फ 9 रह गई. वहीं BJP ने 8 सीटें जीतीं, जबकि AJUP को 2 और कांग्रेस को 3 सीटें मिलीं. अब AJUP की सीटों के नुकसान से BJP के पास TMC के बराबर सीटें हो गईं हैं.
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