- बीजेपी ने विनोद तावड़े को उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया है. इससे पहले वह बिहार के प्रभारी थे.
- बिनोद तावड़े के प्रभारी रहते हुए बिहार विधानसभा चुनाव में बीजेपी गठबंधन ने बड़ी जीत हासिल की थी.
- विनोद तावड़े महाराष्ट्र से आते हैं और वर्तमान में राज्यसभा सांसद भी हैं.
बीजेपी के अध्यक्ष नितिन नवीन ने सोमवार को अपनी नई टीम का ऐलान किया था. अगले ही दिन मंगलवार को उन्होंने तीन चुनावी राज्य उत्तर प्रदेश, पंजाब और गुजरात में नए प्रभारियों की नियुक्ति कर दी है. पार्टी महासचिव विनोद तावड़े को उत्तर प्रदेश की कमान सौंपी गई है, महासचिव सतीश पूनिया पंजाब के प्रभारी बनाए गए हैं, जबकि तरुण चुघ को गुजरात का प्रभार दिया गया है. उत्तर प्रदेश के लिए तावड़े की नियुक्ति के जरिए बीजेपी बड़े लक्ष्य की तरफ नजर बनाए हुए है, इस बार पार्टी राज्य में हैट्रिक लगाने के उद्देश्य से मैदान में उतरेगी. बिहार में बतौर प्रभारी तावड़े ने जोरदार रणनीति बनाई और राज्य में बड़ी जीत दर्ज करने में अहम भूमिका निभाई थी. ऐसे में अब उन्हें उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी सौंपी गई है, उनके साथ जगदीश पटेल को सह प्रभारी बनाया गया है.
विनोद तावड़े को यूपी की कमान
बीजेपी का उत्तर प्रदेश पर सबसे ज्यादा फोकस है. पार्टी ने लगातार दो लोकसभा और दो विधानसभा चुनाव जीते, लेकिन 2024 के पिछले लोकसभा चुनाव में झटका लगा. ऐसे में राज्य में हैट्रिक लगाने की उसकी रणनीति को जमीन पर उतारना विनोद तावड़े के लिए चुनौती रहेगी. वे पिछले कुछ महीनों से उत्तर प्रदेश में सक्रिय रहे हैं. चाहे योगी मंत्रिपरिषद का विस्तार हो या प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की टीम का गठन करना, इन सबमें उन्होंने बड़ी भूमिका निभाई है. इसके अलावा प्रदेश स्तर पर कई नियुक्तियों में भी तावड़े की छाप दिखी है. सरकार और संगठन के बीच सामंजस्य बेहतर करने और तालमेल बढ़ाने के लिए तावड़े सक्रिय रहे हैं. वे सबको साथ लेकर चलने वाले माने जाते हैं. ऐसे में गुटबाजी की शिकार उत्तर प्रदेश बीजेपी को वे संभाल सकते हैं.
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बिहार में बीजेपी के रणनीतिकार थे विनोद तावड़े
इससे पहले विनोद तावड़े ने बिहार के प्रभारी के तौर पर अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभाया था. वहां उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण और निर्णायक संगठनात्मक रणनीतिकार की रही है. 2022 में जब बीजेपी ने उन्हें बिहार का प्रभारी बनाया था, तब वहां का सियासी माहौल चुनौतीपूर्ण था. उन्होंने जदयू को फिर से NDA गठबंधन में वापस लाने और सीट बंटवारे को सहल बनाने में मुख्य मध्यस्थ और समन्वयक की भूमिका निभाई. इसके अलावा तावड़े ने बिहार में बूथ स्तर पर बीजेपी के कैडर को मजबूत करने, अलग-अलग जिलों में राज्य कार्यकारी बैठकों के माध्यम से कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भरने और सामाजिक-जातीय समीकरणों को साधने के लिए काम किया था.
बिहार में एनडीए के दूसरे घटक दल जिसमें जदयू, लोजपा (रामविलास), हम, आरएलएम के बीच आपसी तालमेल बनाए रखने और चुनाव रणनीतियों को जमीनी स्तर पर लागू कराने की जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर थी. वह राज्य में केंद्रीय नेताओं के दौरों, स्टार प्रचारकों की बैठकों और पार्टी के प्रमुख नैरेटिव को जनता तक पहुंचाने की रणनीति तैयार करने में पहली पंक्ति में रहे. विधानसभा चुनाव में प्रचंड विजय के बाद नीतीश कुमार की जगह राज्य में बीजेपी का पहली बार मुख्यमंत्री बनवाने में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई. इससे पहले वह हरियाणा के प्रभारी भी रह चुके हैं.
नितिन नवीन की टीम में महासचिव
विनोद तावड़े संगठन में बीजेपी के अहम रणनीतिकार माने जाते हैं. संगठनात्मक स्तर पर उनके इसी कुशल प्रबंधन और बिहार में पार्टी के प्रदर्शन को देखते हुए केंद्रीय नेतृत्व ने उन पर लगातार भरोसा जताया और उन्हें राष्ट्रीय महासचिव के पद पर बनाए रखा. सुनील बंसल के अलावा वे अकेले ऐसे महासचिव हैं जो टीम नड्डा के बाद टीम नवीन में भी बने हुए हैं.
महाराष्ट्र से आते हैं विनोद तावड़े
विनोद तावड़े मूल रूप से महराष्ट्र से आते हैं. वह लंबे समय से संगठन में कई अहम पदों पर रहे हैं, वे छात्र जीवन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से सक्रिय रूप से जुड़े रहे है. 1980 के दशक में वह ABVP में पूरे समय के कार्यकर्ता के रूप में उभरे. मराठा समुदाय से आने वाले विनोद तावड़े 2014 से 2019 तक देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं. वह महाराष्ट्र विधान परिषद के सदस्य रहे और 2011 से 2014 तक विधान परिषद में विपक्ष के नेता की भूमिका निभाई. 1999 में वह सबसे कम उम्र के नेताओं में से एक के रूप में मुंबई बीजेपी के अध्यक्ष बने थे. इसके अलावा उन्होंने महाराष्ट्र बीजेपी के प्रदेश महासचिव के रूप में भी कई सालों तक काम किया है. पार्टी ने उन्हें 2026 में महाराष्ट्र से राज्यसभा भेजा है.
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