बीजेपी ने शनिवार को आरोप लगाया कि सोनिया गांधी ने कांग्रेस मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान ‘वंदे मातरम्' के सभी छह अंतरों के गायन पर आपत्ति जताई, जबकि कांग्रेस ने इस आरोप का खंडन करते हुए कहा कि गांधी केवल पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के लिए कुर्सी लाने को कह रही थीं क्योंकि वह काफी देर से खड़े थे.
'वंदे मातरम' का खुलेआम अपमान : सी.आर. केशवन
बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सी.आर. केशवन ने कहा कि देशभक्ति की भावना न रखने वाले सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने स्वतंत्रता दिवस पर हमारे गौरवशाली 'वंदे मातरम' का खुलेआम अपमान करके हमारे लोगों और पूरे देश की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचाई है. इस हरकत से कांग्रेस के 'फर्स्ट फैमिली' ने उन स्वतंत्रता सेनानियों के निस्वार्थ बलिदान का भी अपमान किया है, जिन्होंने 'वंदे मातरम' का उद्घोष करते हुए देश की आज़ादी के लिए अपनी जान दे दी थी. 1937 में नेहरू की कांग्रेस ने तुष्टिकरण की राजनीति के लिए 'वंदे मातरम' को छोटा कर दिया था और आज 2026 में राहुल की कांग्रेस ने उसी जहरीले सांप्रदायिक एजेंडे के तहत 'वंदे मातरम' का घोर अपमान किया है. कांग्रेस नेतृत्व पर शर्म आती है.
'यह असहजता फिर उजागर हो गई.'
बीजेपी आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने एक्स पोस्ट कर कहा, 'पहली बार स्वतंत्रता दिवस पर कांग्रेस मुख्यालय में संपूर्ण ‘वंदे मातरम्' का गायन हुआ. ‘वंदे मातरम्' की शुरुआती पंक्तियों के बाद सोनिया गांधी असहज हो गईं और पूरे गीत के गायन के बजाय इसे रोकने के लिए कहा. राहुल गांधी ने भी इसे रोकने का संकेत दिया. लेकिन उन्हें इसे जारी रखने के लिए कहा गया. संदेश स्पष्ट था: राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्' का पूर्ण सम्मान किया जाना चाहिए और जानबूझकर इसमें व्यवधान डालने या इसका अपमान करने पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं. आखिरकार, दोनों को पीछे हटना पड़ा और पूरा ‘वंदे मातरम्' गाया गया. दशकों से गांधी परिवार और कांग्रेस की एक ऐसे भारत की अवधारणा के साथ असहजता दिखाई देती रही है, जो अपनी सांस्कृतिक चेतना और सभ्यतागत मूल्यों में दृढ़ता से निहित हो. विडंबना देखिए कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ही यह असहजता फिर उजागर हो गई.'
दूसरी तरफ, कांग्रेस ने भाजपा के आरोप को खारिज करते हुए कहा कि ‘वंदे मातरम्' का गायन रोकने की कोई कोशिश नहीं की गई और सोनिया गांधी सिर्फ कांग्रेस अध्यक्ष के लिए कुर्सी लाने को कह रही थीं. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि 28 अक्टूबर 1937 को कलकत्ता में महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, सरदार वल्लभभाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद, जवाहरलाल नेहरू, गोविंद बल्लभ पंत और सी राजगोपालाचारी की मौजूदगी में कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक हुई थी. रमेश ने कहा कि उस बैठक में रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह पर यह तय किया गया था कि कांग्रेस अधिवेशनों में ‘वंदे मातरम्' के शुरुआती अंतरों का गायन किया जाएगा.
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