सावन के तीसरे सोमवार पर नागपंचमी का दुर्लभ संयोग... 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं का सैलाब... और मंदिर की ओर बढ़ती करीब 2 किलोमीटर लंबी अटूट कतार... लेकिन तभी फैली करंट की एक अफवाह और पल भर में गूंज उठीं चीख-पुकारें...बिहार के लखीसराय में मौजूद मशहूर अशोक धाम मंदिर में मची भयानक भगदड़ की यही खौफनाक दास्तान है, जिसने सात श्रद्धालुओं के जीवन के इस पावन दिन को हमेशा-हमेशा के लिए सावन का अंतिम सोमवार बना दिया.घटना पर दुख जताते हुए मंत्री से लेकर कलेक्टर तक, हर कोई यही कह रहा है कि सुबह-सुबह फैली एक अफवाह ने पूरे माहौल को पलक झपकते ही त्रासदी में बदल दिया. हालांकि, जिला प्रशासन का दावा है कि अप्रत्याशित भीड़ की आशंका को देखते हुए कड़े इंतजाम किए गए थे, लेकिन आस्था के इस सैलाब में महज एक अफवाह ने इंतजामों को ताश के पत्तों की तरह ढहा दिया.आखिर उस सुबह अशोक धाम मंदिर के पास ऐसा क्या हुआ था? कैसे एक छोटी सी अफवाह ने सात बेगुनाह जिंदगियां छीन लीं? और क्या है 'मिनी देवघर' कहे जाने वाले इस ऐतिहासिक अशोक धाम मंदिर की पौराणिक मान्यता? पढ़िए इस रिपोर्ट में
#WATCH | Lakhisarai DM Shailendra Kumar says, "The queue of devotees had reached till Ashokdham Halt. Two trains had stopped at the Halt. Suddenly, an electric pole fell there. The pole was located on the right side of the men's queue. When the pole collapsed, a rumour spread… https://t.co/utto4M8r8c pic.twitter.com/Q14X6PVLmX
— ANI (@ANI) August 17, 2026
जब 2 किलोमीटर लंबी कतार में अचानक मच गई अफरा-तफरी
चश्मदीदों का कहना है कि अशोक धाम मंदिर के रास्तों पर लंबी लाइनें लगी थीं. कुछ का दावा है कि ये लाइन 2 किलोमीटर तक लंबी थी. सड़कें खचाखच भरी थीं. इसी बीच सुबह करीब 6:30 से 6:45 बजे के बीच अशोक धाम हॉल्ट पर दोनों ओर से एक साथ दो पैसेंजर ट्रेनें आ गईं. ट्रेनों से उतरे सैकड़ों यात्री, जिनमें अधिकतर महिलाएं थीं, सीधे मंदिर की कतार की ओर भागे, जिससे भीड़ का दबाव अचानक कई गुना बढ़ गया.
#WATCH | Bihar: Seven people died in a stampede-like incident at Ashokdham in Lakhisarai. Several injuries reported.
— ANI (@ANI) August 17, 2026
Visuals from the hospital and area of the incident. pic.twitter.com/NghSZcnBAF
DM शैलेंद्र कुमार ने बताया- कैसे टूटे बैरिकेड्स और क्यों मची भगदड़
मामले की जानकारी देते हुए लखीसराय के जिलाधिकारी (DM) शैलेंद्र कुमार ने बताया, "भीड़ की संख्या अप्रत्याशित रूप से बहुत अधिक बढ़ गई थी. सुबह करीब 6.30 से 6.45 बजे के बीच दो ट्रेनें यहां आईं, जिससे भीड़ में और इजाफा हो गया. हमने भीड़ की संभावना को देखते हुए तैयारियां की थीं, लेकिन भीड़ के भारी दबाव के कारण एक तरफ का बैरिकेड टूट गया और लोग एक-दूसरे के ऊपर गिर पड़े. घटना की जानकारी मिलते ही हमने तुरंत 10-15 लोगों को अस्पताल पहुंचाया." डीएम के बयान के मुताबिक, बैरिकेड्स टूटने और इसी दौरान पास में लगा बिजली का पोल गिरने के बाद भीड़ में यह अफवाह फैल गई कि गिरे हुए तारों में करंट दौड़ रहा है. हालांकि उस समय बिजली सप्लाई पूरी तरह बंद थी और तार कवर्ड थे, लेकिन कई किलोमीटर लंबी लाइन में खड़े लोगों के बीच अफ़वाह का खौफ ऐसा फैला कि लोग जान बचाने के लिए एक-दूसरे के ऊपर चढ़ने लगे. संकरे रास्ते पर जो नीचे गिरा, भीड़ उसे कुचलती हुई आगे निकल गई.
#WATCH | UPDATE | Bihar: Seven people died in a stampede-like incident at Ashokdham in Lakhisarai. Several injuries reported.
— ANI (@ANI) August 17, 2026
SDPO Shivam Kumar tells ANI, "Seven casualties have been reported. It is being said that an electric pole fell there and people were electrocuted, which… pic.twitter.com/jqOdIBj8rw
नागपंचमी और सावन सोमवार का दुर्लभ संयोग
अशोक धाम में सोमवार को उमड़ी यह भारी भीड़ यूं ही नहीं थी. सावन का तीसरा सोमवार होने के साथ-साथ आज नागपंचमी का भी पावन पर्व था. शास्त्रों में सावन सोमवार और नागपंचमी के एक साथ पड़ने के संयोग को अत्यंत फलदायी और दुर्लभ माना गया है. इसी कारण बिहार के विभिन्न जिलों के अलावा झारखंड और पश्चिम बंगाल से भी हजारों श्रद्धालु रविवार रात से ही लखीसराय पहुंचने लगे थे और तड़के सुबह 4 बजे से ही लंबी लाइन बननी शुरू हो गई थी.
'मिनी देवघर' माना जाता है अशोक धाम
मगध क्षेत्र में मौजूद लखीसराय के इस अशोक धाम मंदिर (इंद्रदमनेश्वर महादेव मंदिर) को 'मिनी देवघर' का दर्जा प्राप्त है. पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, त्रेतायुग में राजा इंद्रद्युम्न ने इसी पावन स्थान पर भगवान शिव की घोर तपस्या की थी और विशाल यज्ञ कराया था, जिसके कारण इसे 'इंद्रदमनेश्वर महादेव' कहा जाता है.वहीं इसके आधुनिक इतिहास की कहानी भी बेहद दिलचस्प है. 7 अप्रैल 1977 को 'अशोक' नाम का एक स्थानीय बालक जब यहां मैदान में अपने दोस्तों के साथ गुल्ली-डंडा खेल रहा था, तब ज़मीन खोदने के दौरान एक विशालकाय काले पत्थर का प्राकृतिक शिवलिंग प्रकट हुआ. जब पुरातत्व विभाग और स्थानीय लोगों ने खुदाई बढ़ाई, तो यह देश के सबसे विशाल शिवलिंगों में से एक निकला. उसी बालक 'अशोक' के नाम पर इस पावन स्थल का नाम 'अशोक धाम' प्रसिद्ध हो गया. हर साल सावन में लाखों भक्त इस विशाल शिवलिंग पर जल चढ़ाने आते हैं, लेकिन आज सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन की चूक के बीच फैली एक अफ़वाह ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं.
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