बिहार में दो निर्दलीय विधान पार्षदों के भाजपा की सदस्यता लेने पर बवाल हो गया है. निर्दलीय उम्मीदवारों के भाजपा की सदस्यता लेने के बाद जन सुराज ने उनकी सदस्यता रद्द करने की मांग की है, वहीं राष्ट्रीय जनता दल ने इसे गैरकानूनी बताया है.
शनिवार को ही दो निर्दलीय विधान पार्षद- राहुल राज और बंशीधर ब्रजवासी भाजपा में शामिल हो गए.
अब जन सुराज ने राहुल राज और बंशीधर बृजवासी के भाजपा में शामिल होने को विधान परिषद के सभापति, चुनाव आयोग और कोर्ट में चुनौती देने की बात कही है. पार्टी ने कहा है कि यह दसवीं अनुसूची के तहत दल बदल कानून का उल्लंघन है.
क्या है मामला?
बिहार में आठ सीटों पर हुए विधान परिषद के चुनाव में दो निर्दलीय उम्मीदवार जीते थे. सारण शिक्षक से राहुल राज तो तिरहुत स्नातक से बंशीधर ब्रजवासी चुनाव जीते थे. दोनों ने जदयू के उम्मीदवारों को हराया था.
राहुल राज पहले भाजपा में थे. निर्दलीय चुनाव लड़ने के कारण पार्टी ने उन्हें निष्कासित भी कर दिया था. वहीं, बंशीधर ब्रजवासी पहले भी निर्दलीय विधान पार्षद रह चुके हैं.
इस बार चुनाव जीतने के बाद दोनों ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात की, तभी दोनों ने भाजपा में शामिल होने का फैसला किया. अब उनकी सदस्यता विवादों में आ गई है.
पहले सदस्यता ली, अब मुकर रहे बंशीधर
बंशीधर ब्रजवासी ने पार्टी की सदस्यता ली. उन्होंने बाहर आकर मीडिया से बात करते हुए यह स्वीकार किया कि उन्होंने पार्टी की सदस्यता ली.
लेकिन जब NDTV ने उनसे फोन पर बात की तो वे मुकर गए. उन्होंने कहा, 'हमने सिर्फ समर्थन दिया है. सदस्यता नहीं ली है.'
NDTV के पास सदस्यता रसीद थामे उनकी फोटो है. इस पर यह डिटेल दर्ज है कि उन्होंने सदस्यता ली है.

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क्या है दल बदल कानून के नियम ?
संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत कोई संसद या विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य अयोग्य होगा, अगर वह जीत के बाद किसी और राजनीतिक दल में शामिल हो जाता है.
अब आरजेडी और जन सुराज इसी कानून के हवाले से दोनों की सदस्यता रद्द करने की मांग कर रहे हैं.
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राजद ने गैर-कानूनी बताया, जन सुराज कोर्ट जाएगी
राष्ट्रीय जनता दल के मुख्य प्रवक्ता शक्ति यादव ने वीडियो जारी कर इसे गैरकानूनी बताया. उन्होंने कहा कि भाजपा संविधान से खेलती है, दल बदल विरोधी कानून के तहत कोई निर्दलीय चुनाव जीतने के बाद पार्टी में शामिल नहीं हो सकता.
वहीं, जन सुराज के राष्ट्रीय प्रवक्ता सौरभ सिंह ने कहा कि पार्टी इसे विधान परिषद के सभापति, चुनाव आयोग, न्यायालय में चैलेंज करेगी. निर्दलीय जीते हुए प्रत्याशी भाजपा या कोई और दल ज्वाइन नहीं कर सकते हैं. सदस्यता चली जाएगी.
2020 में सर्वेश कुमार BJP में आना चाहते थे
2020 में भी ऐसा ही एक मामला आया था. तब दरभंगा स्नातक से सर्वेश कुमार निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव जीते थे. वे पहले भाजपा में थे, चुनाव जीत के आने के बाद उन्होंने भाजपा में शामिल होने की इच्छा जताई थी.
सूत्रों के मुताबिक, तब उन्हें पार्टी के नेता सुशील कुमार मोदी ने ऐसा करने से रोका था. मोदी ने उन्हें दल-बदल कानून का हवाला दिया था.
हालांकि, सर्वेश कुमार बाहर से पार्टी को समर्थन देते रहे. 2026 में भाजपा ने उन्हें उम्मीदवार भी बनाया था.
जिग्नेश-पप्पू यादव भी नहीं बन पाए कांग्रेसी
सितंबर 2021 में जब कन्हैया कुमार ने कांग्रेस ज्वाइन की थी तब जिग्नेश मेवानी भी उनके साथ थे. कन्हैया ने आधिकारिक रूप से कांग्रेस की सदस्यता ली लेकिन जिग्नेश मेवानी ने ऐसा नहीं किया था.
उन्होंने तब इसी तकनीकी कारण का हवाला दिया था. क्योंकि जिग्नेश निर्दलीय विधायक थे, अगर वे कांग्रेस की मेंबरशिप लेते तो उनकी विधानसभा सदस्यता चली जाती.
वहीं, पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव भी कांग्रेस के मंच पर दिखने के बावजूद कांग्रेस के आधिकारिक सदस्य नहीं बन पाए थे.
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