बिहार में हाल ही में हुए विधान परिषद (MLC) चुनावों में नतीजे आने के कुछ दिन बाद ही बड़ा उलटफेर हो गया है. इस चुनाव में जीते दोनों निर्दलीय विधान पार्षदों ने भाजपा को समर्थन दे दिया है. चुनाव में बंशीधर ब्रजवासी और राहुल राज ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव जीता था. अब दोनों ने ही भाजपा को समर्थन देने का ऐलान कर दिया है.
बिहार में हाल ही में 8 सीटों पर चुनाव हुए थे. आठ में से तीन पर भाजपा और दो निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की थी. वहीं, जेडीयू के खाते में सिर्फ एक सीट ही आई थी. आरजेडी और प्रशांत किशोर की जन सुराज ने 1-1 सीट जीती थी.
भाजपा को चुनावों में तब बड़ा झटका लगा था, जब पांच बार के MLC नवल किशोर यादव पटना-शिक्षक सीट से अपनी सीट हार गए थे. उन्हें आरजेडी के डॉ. संजीव कुमार ने हराया है.
अब दोनों निर्दलीय भाजपा के साथ
बिहार की आठ सीटों पर 23 अक्टूबर को वोटिंग हुई थी. इस चुनाव में दो निर्दलीय उम्मीदवार- बंशीधर ब्रजवासी और राहुल राज जीते थे.
अब दोनों ही निर्दलीय भाजपा के साथ हो गए हैं. दोनों की मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात हुई थी. इसके बाद दोनों ने यह फैसला लिया है.
राहुल राज सारण-शिक्षक और बंशीधर ब्रजवासी तिरहुत-स्नातक सीट से जीते थे. दोनों ही जगह जेडीयू उम्मीदवार की हार हुई थी.
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दोनों निर्दलीयों का क्या रहा है रिकॉर्ड
राहुल राज भाजपा नेता रहे हैं. उन्होंने सारण-शिक्षक सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था. इसमें उन्हें जन सुराज के मौजूदा विधान पार्षद आफाक अहमद को हराया था.
आफाक अहमद ने 2021 में प्रशांत किशोर के समर्थन से यह सीट जीती थी. उस समय प्रशांत किशोर ने अपनी पार्टी नहीं बनाई थी.
इस बार जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरे आफाक अहमद को आसान मुकाबले की उम्मीद थी. इसकी एक वजह जेडीयू के आनंद पुष्कर और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के राम पुकार सिन्हा के चुनाव लड़ने से एनडीए के वोटों में बंटवारे के आसार थे. हालांकि, राहुल राज ने उन्हें हरा दिया.
वहीं, निर्दलीय उम्मीदवार बंशीधर ब्रजवासी ने तिरहुत-स्नातक से अपनी सीट बरकरार रखी. उन्होंने दो साल पहले हुए उपचुनाव में जेडीयू से यह सीट छीनी थी.
भाजपा को इससे क्या फायदा?
बिहार की विधान परिषद में 75 सीटें हैं. एक सीट गंवाने के बाद भाजपा की सीटें घटकर 24 रह गई थीं. हालांकि, अब दो निर्दलीयों का समर्थन मिलने के बाद भाजपा के पास 26 विधान पार्षदों का समर्थन आ गया है.
भाजपा ने आठ में से चार सीटों पर चुनाव लड़ा था और इनमें से तीन सीटों पर उसके उम्मीदवार पहले से काबिज थे.
पार्टी को दरभंगा-स्नातक और पटना-शिक्षक में हार का सामना करना पड़ा, जबकि तिरहुत-शिक्षक में उसने जीत दर्ज की.
भाजपा की सहयोगी जेडीयू के पास विधान परिषद में 20 सीटें हैं. तीसरे नंबर पर आरजेडी है जिसके पास 17 सदस्य हो गए हैं.
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