विज्ञापन

'हेक्सागन' क्या है? जिसमें भारत को शामिल करना चाहते हैं बेंजामिन नेतन्याहू

नेतन्याहू का मकसद सिर्फ व्यापार नहीं है. वो साफ़ कह रहे हैं कि ये गठबंधन 'रेडिकल' दुश्मनों के खिलाफ होगा. उनका इशारा शिया और सुन्नी एक्सिस की तरफ है, यानी आसान शब्दों में कहें तो ईरान और उसके प्रॉक्सी गुटों के खिलाफ एक लोहे की दीवार खड़ी करना.

'हेक्सागन' क्या है? जिसमें भारत को शामिल करना चाहते हैं बेंजामिन नेतन्याहू
  • इजरायल के PM नेतन्याहू ने भारत को 'हेक्सागन' में एंकर बनाने का प्रस्ताव रखा है
  • हेक्सागन गठबंधन का उद्देश्य ईरान और उसके प्रॉक्सी गुटों के खिलाफ एक मजबूत सुरक्षा दीवार खड़ी करना है
  • भारत की विदेश नीति गुटबंदी से दूर रहकर इजरायल, ईरान और अरब देशों के साथ संतुलित रिश्ते बनाए रखने पर आधारित है
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।
नई दिल्ली:

इजरायल के तेल अवीव एयरपोर्ट पर वो तस्वीर हम सबने देखी. बाहें फैलाई गईं और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पीएम मोदी को गले लगा लिया. ये दोस्ती पुरानी है, केमिस्ट्री भी जबरदस्त है. लेकिन इस बार की ये गर्मजोशी सिर्फ दोस्ती तक सीमित नहीं है. इसके पीछे एक बहुत बड़ा जियो-पॉलिटिकल प्लान है. एक ऐसा प्लान जिसे नेतन्याहू ने नाम दिया है- 'हेक्सागन'. जी हां, छह कोनों वाला एक ऐसा सुरक्षा घेरा, जिसके केंद्र में नेतन्याहू भारत को देख रहे हैं. आखिर क्या है ये हेक्सागन और क्यों इजरायल को अपनी सुरक्षा के लिए अब भारत की इतनी सख्त जरूरत पड़ गई है? 

सबसे पहले तो ये शब्द पकड़िए- 'हेक्सागन'. आसान भाषा में कहें तो षट्कोण. बेंजामिन नेतन्याहू ने पीएम मोदी के आने से ठीक पहले एक विजन दुनिया के सामने रखा. उनका कहना है कि वो मिडिल ईस्ट के इर्द-गिर्द अलायंस यानी गठबंधनों का एक पूरा सिस्टम बनाना चाहते हैं. इसमें छह तरह के देश शामिल होंगे. पहला- भारत, जिसे उन्होंने ग्लोबल पावर कहा है. दूसरे- अरब देश, तीसरे- अफ्रीकी देश, चौथे- ग्रीस और साइप्रस जैसे मेडिटेरेनियन देश और बाकी एशिया के कुछ और देश. अब अगर आप नक्शे पर नजर डालें, तो ये बिल्कुल वैसा ही नक्शा है जैसा 'IMEC' यानी इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर का था.

 नेतन्याहू का मकसद सिर्फ व्यापार नहीं है. वो साफ़ कह रहे हैं कि ये गठबंधन 'रेडिकल' दुश्मनों के खिलाफ होगा. उनका इशारा शिया और सुन्नी एक्सिस की तरफ है, यानी आसान शब्दों में कहें तो ईरान और उसके प्रॉक्सी गुटों के खिलाफ एक लोहे की दीवार खड़ी करना.

भारत को 'एंकर' क्यों बनाना चाहते हैं नेतन्याहू? 

अब सवाल ये है कि नेतन्याहू भारत को इसमें क्यों शामिल करना चाह रहे हैं? नेतन्याहू ने पीएम मोदी को 'पर्सनल फ्रेंड' कहा है. लेकिन दोस्ती अपनी जगह है और कूटनीति अपनी जगह. किंग कॉलेज लंदन के प्रोफेसर एंड्रियास क्रेग का मानना है कि इजरायल दरअसल खुद को घिरा हुआ महसूस कर रहा है. उसे लगता है कि अगर भारत जैसा ग्लोबल पावर उसके साथ खुलकर खड़ा हो गया, तो ईरान, तुर्किये और दूसरे दुश्मनों को कड़ा संदेश जाएगा. नेतन्याहू चाहते हैं कि भारत इस 'हेक्सागन' का एंकर बने, यानी वो धुरी जिसके भरोसे ये पूरा गठबंधन टिका हो.

भारत के लिए धर्मसंकट और जोखिम क्या है?

लेकिन, यहां भारत के लिए मामला इतना सीधा नहीं है. हम इजरायल के दोस्त जरूर हैं, और पीएम मोदी का ये दूसरा इजरायल दौरा बहुत ऐतिहासिक है. 2017 के बाद वो दोबारा वहां गए हैं. लेकिन, भारत की विदेश नीति हमेशा से किसी भी गुट में बंधने की नहीं रही है. हम इजरायल के दोस्त हैं, तो हम ईरान के साथ भी अच्छे रिश्ते रखते हैं. सऊदी अरब के साथ हमारी स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप बढ़ रही है. हम रूस और अमेरिका दोनों को साध कर चलते हैं. एक्सपर्ट्स चेतावनी दे रहे हैं कि अगर भारत नेतन्याहू के इस 'सिक्योरिटी अलायंस' का हिस्सा बनता है, तो ये रीजनल पोलराइजेशन को बढ़ा देगा. यानी दुनिया और ज्यादा बंट जाएगी. इससे इजरायल के दुश्मनों को ये कहने का मौका मिल जाएगा कि देखो, भारत भी अब हमें घेरने की साजिश में शामिल है.

दौरे का असली एजेंडा: टेक्नोलॉजी और ट्रेड 

हालांकि, भारत की अपनी प्राथमिकताएं एकदम क्लियर हैं. पीएम मोदी वहां जंग लड़ने या गुट बनाने नहीं गए हैं. भारत का इंटरेस्ट है- डिफेंस, टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और ट्रेड. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर दोनों देश मिलकर काम करना चाहते हैं. जेरूसलम में इनोवेशन इवेंट होने वाला है. हमारे लिए इजरायल तकनीक की खान है, और इजरायल के लिए भारत एक बहुत बड़ा बाजार. तो कुल मिलाकर तस्वीर ये है कि नेतन्याहू चाहते हैं 'सुरक्षा का हेक्सागन', जबकि भारत चाहता है 'विकास का कॉरिडोर'. अब पीएम मोदी वहां पहुंच चुके हैं, गले मिल चुके हैं. अब देखना दिलचस्प होगा जब बंद कमरों में बात होगी तो क्या भारत इस 'हेक्सागन' में फिट होता है, या फिर अपनी पुरानी 'सबका मित्र' वाली नीति पर कायम रहता है. 

क्या भारत होगा शामिल?

क्या आपने देखा कैसे तेल अवीव एयरपोर्ट पर नेतन्याहू ने पीएम मोदी को गले लगाया? ये सिर्फ दोस्ती नहीं, ये एक बहुत बड़ी रणनीति है. इजरायल के पीएम ने एक नया शब्द उछाला है- 'The Hexagon'. यानी छह तरह के देशों का एक ऐसा चक्रव्यूह जिसे वो अपने दुश्मनों के खिलाफ खड़ा करना चाहते हैं. और जानते हैं इस चक्रव्यूह का 'मैजिक वेपन' कौन है? भारत. नेतन्याहू चाहते हैं कि भारत, अरब देश, अफ्रीकी देश, ग्रीस और साइप्रस जैसे मेडिटेरेनियन देश और बाकी एशिया के कुछ और देश मिलकर ईरान और कट्टरपंथ के खिलाफ एक दीवार बन जाएं. लेकिन क्या भारत इजरायल की जंग में उसका साथ देगा? या पीएम मोदी सिर्फ बिजनेस और टेक्नोलॉजी तक मतलब रखेंगे? 

इजरायल का हेक्सागन: ऑफ अलायंस क्या है?

पीएम मोदी इजरायल पहुंच चुके हैं और ये दौरा ऐतिहासिक हो गया है. बेंजामिन नेतन्याहू ने 'हेक्सागन' अलायंस का ऐलान किया है. इजरायल चाहता है कि भारत, अरब देश, अफ्रीकी देश, ग्रीस और साइप्रस जैसे मेडिटेरेनियन देश और बाकी एशिया के कुछ और देश मिलकर कट्टरपंथ के खिलाफ एक नया मोर्चा खोलें. इसे 'शिया और सुन्नी एक्सिस' के खिलाफ एक ढाल की तरह देखा जा रहा है. हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारत की नजर युद्ध पर नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी और एआई (AI) पर है. भारत ने हमेशा गुटबाजी से दूरी बनाई है, क्योंकि हमारे रिश्ते ईरान और अरब देशों से भी अच्छे हैं. अब देखना ये है कि पीएम मोदी इजरायल की सुरक्षा के इस 'हेक्सागन' मॉडल को स्वीकार करते हैं या अपनी शर्तों पर दोस्ती निभाते हैं.

ये भी पढ़ें-: भारत का 'ब्रह्मास्त्र' बनेगा आयरन डोम! सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों से घातक ड्रोन तक, इजरायल से डिफेंस डील पर सबकी नजरें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com