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नए साल से पहले जम्मू इलाके में एक्टिव हैं 30 से 35 पाकिस्तानी आतंकी, सेना ने चलाया खास ऑपरेशन, पढ़ें पूरी डिटेल

सेना अब निगरानी के साथ-साथ तेज कार्रवाई की रणनीति पर काम कर रही है, ताकि आतंकियों को दोबारा संगठित होने या आबादी वाले इलाकों तक पहुंचने का कोई मौका न मिले.

नए साल से पहले जम्मू इलाके में एक्टिव हैं 30 से 35 पाकिस्तानी आतंकी, सेना ने चलाया खास ऑपरेशन, पढ़ें पूरी डिटेल
भारतीय सेना इलाके में चाल रही है सघन ऑपरेशन
  • जम्मू के डोडा और किश्तवाड़ जिलों के 200 से अधिक गांवों और जंगलों में चल रहा है जांच अभियान
  • यह अभियान 30 से 35 पाकिस्तानी आतंकियों को पकड़ने या मार गिराने के लिए कड़ाके की ठंड में तेज किया गया है
  • आतंकियों की पहुंच अब ऊंचे और सुनसान इलाकों तक सीमित हो रही है और उनका लोकल सपोर्ट कमजोर पड़ चुका है
नई दिल्ली:

जम्मू , डोडा और किश्तवाड़ के करीब 200 से अधिक गावों और जंगलों में सुरक्षा बलों का जबरदस्त तलाशी अभियान चल रहा है.यह ऑपरेशन उन 30 से 35 पाकिस्तानी आतंकियों के लिये लांच किया गया है, जिनके बारे में आशंका है कि फिलहाल वें इस इलाके में सक्रिय हैं रक्षा सूत्रों के मुताबिक कड़ाके की ठंड और भारी बर्फबारी के बीच सेना ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी हैं .आशंका है कि दुर्गम पहाड़ी इलाकों में आतंकी छिपे हो सकते है. इस ऑपरेशन का मकसद उन पाकिस्तानी आतंकियों को पकड़ना या मार गिराना है जो इस मौसम का फायदा उठाकर छिपने की कोशिश कर रहे हैं .हालांकि, क्या इन आतंकियों ने ताजा घुसपैठ की है  या नही ,इसको लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नही हुई हैं . इसके बावजूद यह सच है कि  10 से 15 दिनों से करीब 200 गांवों और जंगलों में व्यापक तलाशी अभियान चलाया जा रहा है . 

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ऐसी भी खबरे मिली है कि इलाके में संदिग्ध बंदूकधारी देखे गए है. इससे लोगो मे काफी दहशत का माहौल बना है. कई बार ऐसा भी देखने मे आया है कि सर्दियों के दौरान आतंकी ऊंचे पहाड़ियों से नीचे की ओर आ जाते है ताकि ठंड से बच सके और उनको खाने को राशन भी मिल सके . आतंकियों की कोशिश यह भी है कि सर्दियों के मौसम और बर्फ का इस्तेमाल करके वह अपनी पहचान छुपा सकें और सुरक्षा बलों के साथ सीधी लड़ाई से बचें. 

सूत्रों का कहना है कि आमतौर पर सर्दियों में जम्मू कश्मीर में आतंकी गतिविधियां कम हो जाती हैं, लेकिन इस बार सेना ने आतंकियों के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाते हुए अस्थायी चौकियां, लगातार गश्त और निगरानी को प्राथमिकता दी है. 

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अब आतंकियों का लोकल सपोर्ट कमजोर पड़ चुका है, जिनसे वे जबरन खाना और पनाह लेने की कोशिश करते थे .आतंकियो की पहुंच ऊंचे सुनसान इलाकों तक सीमित होती जा रही है. सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस, सीआरपीएफ, बीएसएफ, एसओजी, वन विभाग और विलेज डिफेन्स कमेटी  के बीच मजबूत तालमेल से खुफिया जानकारी साझा की जा रही है. पुख्ता इनपुट मिलने पर संयुक्त अभियान चलाए जा रहे हैं.

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सेना अब निगरानी के साथ-साथ तेज कार्रवाई की रणनीति पर काम कर रही है, ताकि आतंकियों को दोबारा संगठित होने या आबादी वाले इलाकों तक पहुंचने का कोई मौका न मिले. इसके लिए ड्रोन, थर्मल इमेजिंग, ग्राउंड सेंसर और निगरानी रडार जैसी आधुनिक तकनीक के साथ विशेष रूप से प्रशिक्षित विंटर वारफेयर यूनिट्स तैनात की गई हैं.  बढ़ती ठंड के बीच डोडा और किश्तवाड़ में यह सख्त कार्रवाई साफ संदेश देती है कि अब मौसम आतंकियों के लिए ढाल नहीं बनेगा और सुरक्षा बल हर हाल में आतंक के खतरे को खत्म करने के लिए पूरी तरह मुस्तैद हैं.

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